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राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवा सम्मेलन

[ शांतिकुंज हरिद्वार], Jan 13, 2018
 “हमारे पूर्वज महान थे। पहले यह बात हमें याद करनी होगी, हमें यह समझना होगा कि हम किन उपदानों से बने है, कौन सा खून हमारी नसों में बह रहा है उस खून पर हमेशा विश्वास करना होगा और अतीत के उसके कृतित्व पर भी इस विश्वास और अतीत गौरव के ज्ञान से हम अवश्य एक ऐसे भारत कि नीव डालेंगे जो पहले से होगा” - युवा योद्धा और युवा हृदय सम्राट स्वामी विवेकानंद

     आखिल विश्व गायत्री परिवर शांतिकुंज हरिद्वार (उतराखंड) के तत्वावधान में राष्ट्र के सांस्कृतिक उत्थान के साथ नौतिक, बौद्धिक और सामाजिक क्रांति द्वरा भारत को पुन: चक्रवती और जगदगुरु राष्ट्र बनाने का संकल्पबद्ध अभियान का प्रारंभ हुआ है। यह महापरिवर्तनकारी अभियान युवा भक्ति के बिना असंभव है। स्वस्थ, शालिन, परिश्रमी, स्वावलंबी और श्रेष्ट्र युवा ही देश की रीढ़ और ऊर्जामय कड़ी मानी जाती है, जो भारत को पुन: अपने गौरवशाली रूप में विश्व मंच पर स्थापित कर सकता है। आज देश की तरुणाई ही भारत का स्वर्णिम इतिहास गढ़ सकता है।

        माननीय श्री नंदकिशोर यादव जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए विवेकानंद की बातों को कहा उठो! जागो और तब तक आगे बढ़ो, जब तक अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लो विवेकानंद की ये बाते आज भी युवाओं के लिए प्रासंगिक है। आज का युवक शॉर्टकर्ट में ही सबकुछ हासिल करना चाहता है। वह बहुत जल्द ही अपने को थका महसूस करता है। विवेकानंद के इस कथन को सूत्र वाक्य के रूप में अपनाया जा सकता है।  

 

        इस मौके पर प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ संचालक के श्री मनीष कुमार जी ने युवाओं से कहा की “विवेकानंद ने कभी कहा था की यदि उन्हे एक सौ युवा मिल जाए, तो वे अपने देश के साथ ही पूरी दुनिया की दिशा और दशा दोनों बदल कर रख सकते है। लेकिन आज युवाओं को अपना आत्मविश्वास को जगाना होगा और विवेकानंद के पद चिन्हों पर चलना होगा। आज के युवाओ को विवेकानंद के आदर्शो से सीख लेनी चाहिए। प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ विगत 22 वर्षों से विवेकानंद जैसे महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक फैलाने का कम कर रहा है। संस्कृति के बिना प्रगतिशील जीवन में भी संतुष्टि नहीं आ सकती है। गायत्री परिवार आत्मज्ञान और संस्कारो की शिक्षा दे रहा है, इसके माध्यम से ही समाज में फैली हुई कुरीतियों को दूर किया जा सकता है और युवाओं के माध्यम से भारत को  दुनिया का सिरमौर बनाया जा सकता है।

        श्री श्याम रजक जी ने विवेकानंद के कर्मठता और संकल्प के साथ राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित होकर कार्य करने की दृढ़ इच्छा शक्ति साथ ही विवेकानंद की तरह अपने जीवन को समाजिक कार्यो में लगाने के लिए आग्रह किया, ताकि हमारा देश फिर से जगतगुरु बने।

       डॉ डी.न. गौतम (पूर्व डी.जी.पी. बिहार) ने कहा कि यदि मानव जाति के विकास को देखेंगे तो काफी बदलाव पाएगें। आज इंसान कहाँ से कहाँ पहुँच गए हैं पर इसमें से कुछ बदलाव जैसे संचार, यातायात, सूचनाओ की क्रांति को शुभ, सकारात्मक कह सकते हैं। यातायात की क्रांति से दूरियाँ सिमट कर रह गई है। संचार क्रांति में संदेशों को पल भर में पहुंचाया जा सकता है। सूचना की क्रांति के चलते अब कई चीजें उपलब्ध है। जिसे हम बैठकर एक साथ पढ़ सकते है। वहीं कुछ परिवर्तन ऐसे भी हैं जिसे देखकर पीड़ा होती है। अब समय आ गया है कि युवा अपनी शक्तियों को पहचाने और राष्ट्र हित में लगाये। जैसे विवेकानंद जी ने लगाया था।

      डॉ० संजीव चौरीसाया जी (MLA) ने संबोधित करते हुये कहाँ की हमारे देश के नौजेवानो को विवेकानंद के दिखाये हुये रास्ते पर चलाने का  काम युवा प्रकोष्ठ गायत्री परिवार कर रहा है। ये कार्य जो गायत्री परिवार वर्षो से करते आ रहे है। हम इसकी तहे दिल से प्रशंसा करते है। साथ ही युवाओं से आग्रह करते है कि विवेकानंद के विचारों को आप भी अपनाये और बिहार ही नहीं पुरे देश को सस्कार के साथ समुन्नत बनाये।

       श्री छोटू सिंह जी ने युवाओं को विवेकानंद के विचारों को पढ़ने और अपनाने की सलाह दी।

 डॉ० राजीव रंजन जी ने विवेकानंद की तरह कर्मठी दृढ़ निश्चय और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए युवाओं को आग्रह किया। साथ ही इस बात को दुहराया की “जैसा खाए अन्न वैसे बने मन“ अत: युवा अपने खान पान को ठीक कर ले तो उनका भी चेहरा विवेकानंद की तरह चमकदार होगा।

        इस कार्यक्रम में लगभग 2000 युवाओं को उपस्थिती थी।  
      इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए ज्ञान प्रकाश जी, निशांत रंजन जी, राजीव जी, अभिषेक जी, विसला जी एवं युवा प्रकोष्ठ के सभी भाइयों का सहयोग रहा है।







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