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विनाश के कगार पर खड़ी दुनिया की रक्षा अब दैवी हस्तक्षेप से ही संभव है नवयुग सृजन के लिए युगशक्ति का अवतरण नवयुग सृजन के लिए युगशक्ति का अवतरण होलिकोत्सव का स्वरूप विवेकयुक्त, प्रदूषण- अंधपरम्परा मुक्त रहे ‘युवा क्रान्ति वर्ष’ का प्रखर अभियान वर्ष २०१७ में भी चालू रहेगा मैं क्या हूँ? What Am I? (भाग 33) 20 Nov मैं क्या हूँ? What Am I? (भाग 33) 20 Nov TEST NEWS TEST NEWS TEST NEWS TEST NEWS व्यसन मुक्ति का डॉक्यूमेंट्री फिल्म नवसृजन के अभियान में अपनी भूमिका समझे- निभाये नारी वन्दनीया माताजी का बाहरी रूप अति सहज और आन्तरिक रूप अति दिव्य रहा हीनता से उबरें, महानता उभारें पर्वों पर श्रद्धा-उल्लास भरा माहौल बने, साथ ही वे विवेक-विज्ञान सम्मत हों गुरु अनुग्रह का उपयोग व्यक्तित्व के श्रेष्ठ रूपान्तरण हेतु करें, यही है द्विजत्व भगवद्भक्ति का श्रेष्ठ रूप है सेवा - परोपकार

‘युवा क्रान्ति वर्ष’ का प्रखर अभियान वर्ष २०१७ में भी चालू रहेगा

गतवर्ष की उपलब्धियाँ रहीं शानदार, इस वर्ष के प्रयास रहें और भी जानदार

मनुष्य मात्र के लिए उज्ज्वल भविष्य का आधार बनाने ...

मैं क्या हूँ? What Am I? (भाग 33) 20 Nov

तीसरा अध्यायसुख और शान्तिपूर्वक स्थित होकर आदर के साथ उस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए बैठो, जो उच्च मन की उच्च कक्षा द्वारा तुम्हें प्राप्त होने को है।पिछले पाठ में तुमने समझा था कि 'मैं' शरीर से परे कोई मानसिक चीज है, जिसमें विचार, भावना और वृत्तियाँ भरी हुई हैं। अब इससे आगे बढ़ना होगा और अनुभव करना होगा कि यह विचारणीय वस्तुएँ आत्मा से भिन्न हैं।विचार करो कि द्वेष, क्रोध, ...

व्यसन मुक्ति का डॉक्यूमेंट्री फिल्म

०२ अक्टूबर २०१६ - दुर्ग छत्तीसगढ़ – दीपशिखा विद्यालय उतई जिला - दुर्ग में आज दो पाली में व्यसन मुक्ति का डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित की गयी। करीब लाभान्वित हुए  1150 विद्यार्थी।...

नवसृजन के अभियान में अपनी भूमिका समझे- निभाये नारी

नवजागरण की दिशा में नारी को बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी है। उसे लम्बे समय तक बन्धनों में जकड़े रहने से पैदा हुए अपने पिछड़ेपन से मुक्ति पाकर अपनी योग्यता और क्षमता को विकसित करना होगा और नये निर्माण की भूमिका बनाने में भी हाथ बँटाना होगा। अपने विकास के लिए स्वयं अपने आप से संघर्ष करना होगा तथा मार्ग में रुकावट डालने वाली परिवार और समाज में फैली रूढ़ियों से भी निपटना ...

वन्दनीया माताजी का बाहरी रूप अति सहज और आन्तरिक रूप अति दिव्य रहा

उनकी दिव्यता का अनुभव करने वाले साधकों में दिव्यता का विकास सहज संभव है 
सबकी माँ- सच्ची माँ 

उनकी स्थूल काया के अन्दर दिव्य मातृत्व कितनी गहराई से भरा था, इसका उल्लेख गत आलेख के अंत में पूज्य गुरुदेव के शब्दों में किया जा चुका है। बचपन में भी उनकी वह विशेषता प्रकट होती रहती थी, भले ही कोई समझे या न समझे। 
उनके प्रिय खेल थे भगवान शिव की पूजा और गुड्डे- गुड़ियों की ...





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