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युग निर्माण अभियान बनाम पाँच वर्षीय राष्ट्र जागरण अभियान

एक नया सुयोग मनुष्य मात्र के लिये उज्ज्वल भविष्य की संरचना हेतु ईश्वरीय नवसृजन की प्रक्रिया चालू है। इसके लिये विश्व की भौतिकतावादी, भोगवादी मानसिकता को दुरुस्त करके उसे अध्यात्मवादी, योगयुक्त जीवनशैली के लिये प्रेरित, प्रशिक्षित करना होगा। यह महत्वपूर्ण भूमिका भारतवर्ष को निभानी है। स्वामी विवेकानन्द और श्री अरविन्द जी ने इस सन्दर्भ में अनेक बार प्रकाश डाला है। ...

उत्थान और पतन का आधार- संवेदना

खेल मानवीय बुद्धि का 
मनुष्य हाड़- माँस का पुतला एक तुच्छ प्राणी मात्र है उसमें न कुछ विशेषता है न न्यूनता। उच्च भावनाओं के आधार पर वह देवता बन जाता है, तुच्छ विचारों के कारण वह पशु दिखाई पड़ता और निकृष्ट, पाप बुद्धि को अपनाकर वह असुर एव पिशाच बन जाता है। 
कोई व्यक्ति अच्छा या बुरा तभी तक रह सकता है, जब तक कि उसकी धर्मबुद्धि सावधान रहे। पाप बुद्धि के प्रकोप से यदि मनुष्य ...

Unique and Eco Friendly way of Ganesh Puja

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शब्दों से परे भी गायत्री महामंत्र के भावों की महत्ता अद्भुत- अनुपम है

जिन्हें भी सत्य की झलक मिली उन्होंने वही भाव अपनाये, दिव्य अनुदान पाये ।

अद्भुत श्रेष्ठतम मंत्र

भारतीय आर्ष ग्रंथों में तो गायत्री महामंत्र की महत्ता मुक्त कंठ से गायी ही गयी है, अन्य देशों और अन्य सम्प्रदायों के आध्यात्मिक साधकों, विचारकों ने भी उसे अद्भुत, अनुपम कहा है। मंत्रों की विशेषता उनके शब्द गठन से भी होती है और उनमें सन्निहित भावों से भी। गायत्री मंत्र   ...

धर्म आदर्शवादिता और एकता का प्रतीक बने

पर्व आयोजनों की प्रस्तुत वेला में हर क्षेत्र, वर्ग द्वारा किये जाये ऐसे प्रयास अनेक सम्प्रदाय, अनेक देवता, अनेक ग्रन्थ, अनेक विधि- निषेध गढ़े गये और बिलगाव की जडें मजबूत होती चली गर्इं। इससे केवल पुरोहित वर्ग का स्वार्थ सधा। बाकी सब लोग भ्रान्तियों के जंजाल में फँसकर अपना समय, धन और विवेक गँवाकर घाटे में ही रहते रहे। विवेक की माँग है कि इस अनेकता को घटाया और मिटाया जाय। एक ...

गुरु के निर्देशों पर खरे सिद्ध होने की सच्ची साधना करें

गुरु के साँचे में ढलें, सच्चे समर्पण का अभ्यास करें, स्वयं भी साँचे बनें

पाक्षिक के गत (१६ जून) अंक में गुरुपूर्णिमा के संदर्भ में गुरुगीता के संदर्भ से गुरुसत्ता की महत्ता, गुरुतत्त्व के बोध और दिव्य अनुदानों को पाने, धारण करने की पात्रता बढ़ाने के सूत्रों पर प्रकाश डाला गया था। इस अंक में पूज्य गुरुदेव के निर्देशों के अनुसार जीवन साधना करते हुए युगधर्म के बेहतर ...

गुरुपर्व पर बाह्य समारोह से अधिक बल आन्तरिक साधना पर दें

गुरुतत्त्व क बोध करने कि क्षमता, उनके प्रति सच्चे समर्पण की पात्रता बढ़ायें

गुरुकृपा की चाह बनाम राह
आध्यात्मिक जगत में गुरुकृपा के महत्त्व को मुक्त कंठ से गाया और सराहा गया है।। सनातन आर्ष परम्परा में तो गुरु को ब्रह्मा- विष्णु-महेश्वर और साक्षात् परब्रह्म ही माना गया है ।। उनके प्रति श्रद्धा जाग जाये, उनका अनुग्रह मिल जाये तो लौकिक और पारलौकिक जीवन की श्रेष्ठतम ...

नवयुग सृजन के लिए युगशक्ति का अवतरण

प्रेरणा, प्रोत्साहन, अग्रगमन का दायित्व अग्रदूतों को ही निभाना होगा देवत्व उभारें, अग्रदूत बनें भगवान निराकार है। उसका कर्तृत्व प्रेरणाओं तक ही सीमित रहता है। उन्हें क्रियान्वित करने का उत्तरदायित्व देवमानवों के कंधों पर आता है। युद्ध में योद्धा का पराक्रम और साहस ही जीतता है, पर प्रत्यक्षतः लड़ाई तो हथियारों से ही होती है, भले ही वे लोहे जैसी सस्ती धातु के ही क्यों ...





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