The News (All World Gayatri Pariwar)
Home Editor's Desk World News Regional News Shantikunj E-Paper Upcoming Activities Articles Contact US
Editor's Desk

हम प्रकाश की ओर ही चलें पुराने वर्ष का मानें आभार, नये को करें अंगीकार समय बिना मूल्य मिलता है, लेकिन है बड़ा मूल्यवान युगावतार के लीला संदोह को समझें, युग देवता के साथ भागीदारी बढ़ायें सामूहिक उत्कर्ष के लिए सामूहिक साधना समग्र क्रान्ति-महाक्रान्ति को विश्वव्यापी-प्रचण्ड बनाने के लिए कमर कसें युवा क्रान्ति वर्ष के निष्कर्ष क्रान्तिकारी, सृजनशील और शानदार निकलें युगसृजेता सुनें पाञ्चजन्य का उद्घोष शुनिशेपों की खोज रूढ़ियों में न भटकें, विवेक मार्ग अपनायें महालक्ष्मी को प्रसन्न करके उनकी विशेष अनुकम्पा प्राप्त करने का दीपावली पर्व गायत्री उपासना- प्रकाश की साधना मन के हारे हार है मन के जीते जीत प्रखर साधना करें, ईश्वर को पाने की नहीं, अनुभव करने की इस नवरात्र को नौ वर्षीय साधना अभियान का जीवन्त अंग बनायें भक्ति साधना से शक्ति, ज्ञान साधना से प्रगति, कर्म साधना से सिद्धि पायें आत्मा समर्पण की साधना से मिलता हैं परमात्मा उत्थान और पतन का आधार- संवेदना
  • हम प्रकाश की ओर ही चलें

    सुख- दु:ख का कारण
    दु:ख का एक कारण है अज्ञान। अज्ञान- अर्थात् किसी वस्तु के वास्तविक स्वरूप को न जानना। वास्तविकता का ज्ञान न होने से ही मनुष्य गलती करता है और ...
  • पुराने वर्ष का मानें आभार, नये को करें अंगीकार

    समय के अनन्त प्रवाह की, मनुष्य द्वारा निर्धारित एक इकाई भर है 'वर्ष'
    इस तथ्य को समझें, पुराने वर्ष का मानें आभार, नये को करें अंगीकार

    अखण्ड काल प्रवाह
    परमात्मा की तरह ...
  • समय बिना मूल्य मिलता है, लेकिन है बड़ा मूल्यवान

    समय मनुष्य जीवन की वह मूल्यवान सम्पत्ति है, जिसकी कीमत पर संसार की कोई भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। भगवान ने मनुष्य को अपने राजकुमार के रूप में भेजा है और साथ ही समय ...

युगावतार के लीला संदोह को समझें, युग देवता के साथ भागीदारी बढ़ायें

अग्रदूतों को खोजने, उभारने और सामर्थ्यवान बनाने का क्रम प्रखरतर बनायें

युगऋषि और प्रज्ञावतार
युगऋषि के माध्यम से नवयुग की ईश्वरीय योजना की जानकारी युगसाधकों को मिली। इस प्रचण्ड और व्यापक क्रांतिकारी परिवर्तन चक्र को घुमाने के लिए परमात्मसत्ता 'प्रज्ञावतार' के रूप में सक्रिय हो उठी है। समय को, कालचक्र को बलपूर्वक वाञ्छित दिशा में घुमाने के लिए सन्नद्ध उस ...

सामूहिक उत्कर्ष के लिए सामूहिक साधना

हम अकेले नहीं हैं
व्यक्ति समूह का एक अविच्छिन्न घटक है। उसकी सत्ता का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब वह समाजनिष्ठ होकर रहे। घड़ी का एक पुर्जा अलग अपनी अहंता प्रकट करे तो वह समय की सूचना दे सकने वाले समर्थ यन्त्र का अंग नहीं बना रह सकेगा। हाथ, पाँव, आँख, नाक, हृदय, मस्तिष्क आदि अंग अपने अलग- अलग क्रियाकलापों में लगे रहने पर बल दें तो शरीर का चल पाना ही कठिन हो जाय, तब कोई ...

समग्र क्रान्ति-महाक्रान्ति को विश्वव्यापी-प्रचण्ड बनाने के लिए कमर कसें

प्रज्ञा परिजनों, प्रज्ञा पुत्रों एवं प्रज्ञा पुञ्जों को जाग्रत्-जीवन्त बनाना जरूरी है

आयोजन बनाम अभियान
युगऋषि के निर्देशन के अनुसार युग शिल्पियों-सैनिकों ने प्रज्ञा अभियान को विस्तार देने के लिए जनसम्पर्क एवं विभिन्न आयोजनों का क्रम प्रारम्भ किया। विपरीत परिस्थितियों में भी जन समर्थन जुटाने में, जन सहयोग इकट्ठा करने में सफलता मिलने लगी। आयोजनों का स्वरूप ...

युवा क्रान्ति वर्ष के निष्कर्ष क्रान्तिकारी, सृजनशील और शानदार निकलें

'जागो और जगाओ' के साथ ही 'बनो और बनाओ' का सशक्त क्रम चल पड़े

सारे संसार को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने के लिए, युग निर्माण के सूत्रों का विश्वव्यापी प्रचार करना और उन्हें व्यावहारिक जीवन में स्थान देना आवश्यक है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए देश की युवा पीढ़ी को जगाने, संस्कृतिनिष्ठ बनाने की जरूरत अनुभव की गयी। इसीलिए सन् २०१६ और १७ को 'युवा क्रांति वर्ष' के रूप में मनाने की ...

युगसृजेता सुनें पाञ्चजन्य का उद्घोष

समझदारी अपनायें, श्रेय- अनुदान पायें

बात प्रौढ़ों और प्रखरों से
ऐतिहासिक महाभारत में भारत देश को विशाल भारत के रूप में विकसित करने की योजना थी। आज का लक्ष्य एवं प्रसंग ऊँचा है। अब मनुष्य को महामानव, धरातल को स्वर्ग लोक बनाने की तैयारी है। पतन की दिशा में प्रवाहमान लोक मानस को मानवी गरिमा का गला घोंट डालने से कठोरतापूर्वक रोकना है। पतनोन्मुख प्रवाह को उलटना कितना कठिन ...

शुनिशेपों की खोज

एक पौराणिक कथा
एक बार इन्द्र देव ने कुपित होकर दुष्ट दुरात्मा प्रजाजनों के दुष्कर्मों का दण्ड देने के लिए उन्हें वर्षा का अनुदान देना बन्द कर दिया। बारह वर्षों तक लगातार दुर्भिक्ष पड़ा। पानी न बरसने से घास- पात, पेड़- पौधे, जलाशय सब सूख गये। अन्न उपजना बन्द हो गया। तृषित और क्षुधित प्राणी त्राहि- त्राहि करके प्राण त्यागने लगे। सर्वत्र हा- हाकार मच गया।

स्थिति असह्य हो गयी ...

रूढ़ियों में न भटकें, विवेक मार्ग अपनायें

समय- शक्ति को व्यसन से बचायें, सृजन में लगायें

सनातन दर्शन
भारतीय संस्कृति को 'सनातन' कहा गया है। सनातन का अर्थ होता है जिसका अस्तित्व अनादिकाल से बना रहा है और अनन्त काल तक बना रहेगा। जो सनातन है, वही सत्य है, वही अनश्वर है। परम पिता परमात्मा या माँ आदिशक्ति- चित्शक्ति सत्य- सनातन है। उसकी रची हुई माया परिवर्तनशील है, नश्वर है, उसके रूप बदलते रहते हैं। सभी वस्तुओं और ...

गायत्री उपासना- प्रकाश की साधना

ज्योति है तो जीवन हैअध्यात्म विज्ञान में स्थान- स्थान पर प्रकाश की साधना और प्रकाश की याचना की चर्चा मिलती है। यह प्रकाश बल्ब, बत्ती अथवा सूर्य आदि से निकलने वाला उजाला नहीं वरन् वह परम ज्योति है जो इस विश्व में चेतना का आलोक बनकर जगमगा रही है। गायत्री के उपास्य सविता देवता इसी परम ज्योति को कहते हैं। इसका अस्तित्व प्रत्येक व्यक्ति ऋतम्भरा प्रज्ञा के रूप में प्रत्यक्ष और कण- ...

महालक्ष्मी को प्रसन्न करके उनकी विशेष अनुकम्पा प्राप्त करने का दीपावली पर्व

माता महालक्ष्मी का अनुग्रह पाने के लिए दीपावली श्रद्धापूर्वक मनायें
किन्तु, अन्ध परम्पराओं के मोह में माँ की प्रतिष्ठा न गिरायें, उनका मन न दुखायें

पर्वों का प्रयोजन
भारत के ऋषि- मनीषियों ने मानव जीवन की हर धारा को दिव्य अनुशासनों, उच्च आदर्शों, लोकमंगल की प्रवृत्तियों से जोड़ने के लिए अनोखे और सफल प्रयोग किए हैं। मनुष्य अपने आप में अद्भुत क्षमताओं से सम्पन्न है, किन्तु ...

मन के हारे हार है मन के जीते जीत

मन मान जाता है, मनाइये तो सही - मन अधोगामी नहीं है ।
प्राय: लोगों की यह शिकायत होती है कि हमारा मन बुराई से हटता नहीं। इच्छा तो बहुत करते हैं, धर्मानुष्ठान भी चलाते हैं, जप और उपासना भी करते हैं, किन्तु मन विषयों से हटता नहीं। बुराइयाँ हर क्षण मस्तिष्क में आती रहती हैं।

जब ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं तो लगता है मन ही सब कुछ है, वही जीवन की सम्पूर्ण गतिविधियों का संचालन करता ...





Click for hindi Typing
News Videos - From the Studio of All World Gayatri Pariwar
Yug Pravah Video Magazine
Official Awgp Site
Literature Site
Awgp Store Site
Quotation Site