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मन की मलिनता मिटायें, शिवत्व जगायें हर व्यक्त‌ि इन बातों को समझे तो व‌िश्व में शांत‌ि और सद्भाव संभव है चोबीस मिनट में पाइए चौबीस घण्टों का स्वास्थ्य अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस छोड़ो ढर्रे का चिंतन, बदलो अपना जीवन बापू की महानता का रहस्य नारी तुम्हें नमन! अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष युवा पीढ़ी को बचायें दुर्व्यसनों से: डॉ प्रणव पण्ड्याजी एकता, समता, शुचिता का प्रतीक : गणेश उत्सव - डॉ. प्रणव पण्ड्याजी तब परलोक में आत्मा को कष्ट का सामना करना पड़ता है गुरुपूर्णिमा पर्व पर विशेष सद्गुरु की कृपा के अवतरण का महापर्व अभ्यास से क्षमताओं का विकास, (पं० श्रीराम शर्मा आचार्य) आत्मा, महात्मा और परमात्मा का विकास पं. श्रीराम शर्मा आचार्य आत्मा की उन्नति, पं० श्रीराम शर्मा आचार्य आत्म बल और परमात्मा की प्राप्ति पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जो औरों के काम आयें (पं० श्रीराम शर्मा आचार्य) आकर्षक व्यक्तित्व बनाइये (पं० श्रीराम शर्मा आचार्य) आप भला तो जग भला, (पं० श्रीराम शर्मा आचार्य)

छोड़ो ढर्रे का चिंतन, बदलो अपना जीवन

त्यागने के लिए हर किसी को विवश होना पड़ता है। किसी से चोर छीनता है, किसी से बेटा। पेट भरने और तन ढकने के अतिरिक्त और किसी के पल्ले कुछ नहीं पड़ता। जब विरानों के लिए ही सब कुछ छोडऩा है तो इन विरानों का स्तर कुछ ऊँचा क्यों न उठा लिया जाय? जब अपना उपार्जन, श्रम, सहयोग किसी को देना ही है तो उन्हें देवताओं, ऋषियों एवं सदुद्देश्यों के लिए ही क्यों न दिया जाय ? 
अध्यात्मवादी चिंतन ...

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस

एक निवेदन :-
अत्यंत हर्ष का विषय है कि ऋषियों की महानतम धरोहर योग की महत्ता को स्वीकार करते हुए पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र संघ ने ...

नारी तुम्हें नमन! अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

अणु में एक मध्यवर्ती केन्द्र सत्ता होती है, जिसे नाभिक कहते हैं। अणु की शक्ति का स्रोत नाभिक में ही होता है। उसके इर्द- गिर्द उसकी सहायक इकाइयाँ जुड़ी रहती हैं। इस परिवार के सहारे ...

बापू की महानता का रहस्य

एक बार महात्मा गाँधी से एक स्पेनिश पत्रकार ने प्रश्न किया, ‘‘आप अब जिस रूप में हैं, वह बनने की प्रेरणा कहाँ से मिली?’’ गाँधी जी ने बताया, ‘‘भगवान श्रीकृष्ण, महात्मा ईसा, दार्शनिक रस्किन और सन्त टॉलस्टॉय से।’’

पत्रकार अचंभे में आ गया। उसने अनुभव किया कि इनमें से कोई ...

प्रणव (ॐ - ओंकार) मंत्र का विशिष्ट प्रयोग भी करें :

    युगऋषि ने गायत्री विद्या के व्यापक विस्तार के लिए स्वजनों को प्रेरित करते हुए कहा था, ‘‘गायत्री मंत्र के उपयोग में बहुतों को संकोच हो सकता है, इसलिए मैंने नयी गायत्री बना दी है। वह है उज्ज्वल भविष्य हेतु प्रार्थना ‘‘हे परमात्मा! हम सबको उज्जवल भविष्य के मार्ग पर बलपूर्वक ...

युवा पीढ़ी को बचायें दुर्व्यसनों से: डॉ प्रणव पण्ड्याजी

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं बिहार के युवाओं ने लिये आदर्श भारत बनाने के संकल्प! 
शराब व अन्य नशीली चीजों के व्यवसाय से जितनी आय होती है, उससे कहीं ज्यादा समाज का नुकसान होता है। शराब कई सामाजिक बुराइयों की जड़ है। इसके दूरीकरण के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्ग को विशेष पहल करने की जरूरत है, तभी देश की युवा पीढ़ी की दशा व दिशा सुधर सकती है। यह बात गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या ...

तब परलोक में आत्मा को कष्ट का सामना करना पड़ता है

जीवन की वास्तविक सफलता और समृद्घि आत्मभाव में जागृत रहने में है। जब मनुष्य, अपने को आत्मा अनुभव करने लगता है तो उसकी इच्छा, आकांक्षा और अभिरूचि उन्हीं कामों की ओर मुड़ जाती है, जिनसे आध्यात्मिक सुख मिलता है। ...

गुरुपूर्णिमा पर्व पर विशेष सद्गुरु की कृपा के अवतरण का महापर्व

हम चाहे जो हों, जैसे हों, गुरु हममें से हर एक के जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। अपने जीवन के अतीत के बारे में सोचें, वर्तमान को परखें और भविष्य पर नजर डालें तो समूचा अस्तित्व एक ...

आप भला तो जग भला, (पं० श्रीराम शर्मा आचार्य)

    जीवन अनेकों समस्याओं के साथ उलझा हुआ है। उन उलझनों को सुलझाने में, प्रगति पथ पर उपस्थित रोड़ों को हटाने में बहुधा हमारी शक्ति का एक बहुत बड़ा भाग व्यतीत होता है, फिर भी कुछ ही समस्याओं का हल हो पाता है, अधिकांश तो उलझी ही रह जाती हैं। उस अपूर्णता का कारण यह है कि हम हर समस्या का हल अपने से बाहर ढूँढ़ते हैं जब कि वस्तुत: वह हमारे शरीर के अंदर ही छिपा रहता है।    यदि हम कोई ...

आकर्षक व्यक्तित्व बनाइये (पं० श्रीराम शर्मा आचार्य)

     सद्भावनायुक्त नागरिक ही आपको सामाजिक प्रतिष्ठा और मान-सम्मान देने वाले हैं। उनके दृष्टिकोण एवं विचारधारा पर आपकी सफलता अवलम्बित है। जैसा आपके आसपास वाले समझते हैं, वैसे ही वास्तव में आप हैं। समाज में आपके प्रत्येक कार्य की सूक्ष्म अलक्षित तरंगें निकला करती हैं, जो दूसरों पर प्रभाव डालती हैं। भलाई, शराफत आदि सद्व्यहार वह धन है जो रात-दिन बढ़ता है। यदि दैनिक व्यवहार ...





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