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बाल संस्कार शाला प्रशिक्षण कार्यशाला, काठमाण्डू, नेपाल, फरवरी 2014

[kathmandu], Dec 26, 2017
देश की नौनिहालों के सार्थक निर्माण एवं देश के सुखद भविष्य को गढ़ने हेतु प पू गुरुदेव द्वारा सुझाये गये मार्ग-बाल संस्कार शाला के प्रशिक्षक प्रशिक्षण हेतु शान्तिकुन्ज से तीन सदस्यीय टोली काठमाण्डू प्रवास पर गई। यात्रा का आरंभ 10 फरवरी को एवं समापन 18 फरवरी को हुआ। नेपाल की राजधानी काठमाण्डू के स्थानीय गायत्री परिजनों द्वारा आयोजित तीन दिवसीय उक्त प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य शिक्षकों को बाल संस्कार शाला परिचालन हेतु प्रशिक्षित करना था। कुपंडोल नामक स्थान पर एक गुरुद्वारे में आयोजित शिविर में लगभग 70 प्रतिभागी उपस्थित हुये थे जिसमें प्राचार्य, प्रधान अध्यापक एवं शिक्षक सम्मिलित थे। सत्र के प्रथम दिन, विषय प्रवेश के रूप में बाल संस्कार क्यों एवं कैसे इस विषय पर उद्बोधन दिया गया जिसमें हमारी सांस्कृतिक विरासत एवं ऋषि परंपरा से लेकर आज तक के संकटों एवं उनके निवारण के उपाय के रूप में बाल संस्कार शाला के अपनाने की बात कही गई। भोजन पश्चात् के सत्र से विषय का प्रायोगिक प्रशिक्षण आरंभ हुआ जिसमें गीत याद कराना, कहानी सुनाने के प्रभावी उपाय, उपासना की सहज पद्धति एवं तत्वज्ञान के रूप में किसी भी मान्यता के बारे में पांच बातें सिखाई गई। बच्चों को कठपुतली के माध्यम से कहानी सुनाने का प्रात्यक्षिक भी उन्हें कराया गया एवं प्रतिभागियों के दल बना कर उन्हें अगले दिन के लिये कार्य दिया गया । टोली सदस्य एवं मुख्य आचार्य श्री प्रशांत सोनी एवं श्रीमती स्वाति सोनी दीदी ने रोचक ढंग से इनका अभ्यास कराया। सांय के अंतिम सत्र में रोचक एवं ज्ञानवर्द्धक खेल के अभ्यास कराये गये जिनसे क्या शिक्षा मिलती है इसका बोध हुआ। प्रथम दिन के परिचय सत्र के उपरांत टोली को यह ज्ञात हुआ कि अधिकांश प्रतिभागी गायत्री परिवार के बारे में अनभिज्ञ हैं इसके पश्चात् भी उनकी रुचि एवं लगन को देखकर सुखद अनुभव हुआ। द्वितीय दिवस, कक्षा का आरंभ पिछले सत्र रोचक अभ्यास से हुआ एवं उसके पश्चात् जीवन विद्या जैसे अतिमहत्वपूर्ण विषय पर आचार्यद्वय ने प्रेरक ज्ञान दिया। इस दिन के सत्रों में व्यक्तित्व विकास एवं पंचशीलों का महत्व भी बताया गया। इसी दिन टोली के अन्य सदस्य श्री सदानंद आंबेकर ने नगर के एक अन्य आश्रम- महर्षि अरविंद योग मंदिर में उनके आग्रह पर जाकर युग निर्माण योजना, गायत्री एवं यज्ञ, प पू गुरुदेव का साहित्य, युवा जागृति, पंच महाभियान एवं दे सं वि वि की अवधारणा पर विस्तार से बतलाया। अपनी प्रस्तुति दृश्य श्रव्य माध्यम से बतलाते हुये उपस्थित लगभग 30 शिक्षकों के प्रश्नों का भी समाधान किया। यह ज्ञातव्य है कि उक्त आश्रम गुरुकुल परंपरा पर विद्यालय चलाता है जिसमें आठवीं कक्षा तक विद्यार्थी पढ़ते हैं एवं उनको शिक्षण देने हेतु काॅलेज के विद्यार्थी अपनी अवैतनिक सेवायें देते हैं। यहां पर गौपालन, जैविक कृषि एवं स्वावलंबन केंद्र भी चलता है। इस प्रकार से यह लगा कि प पू गुरुजी की युग निर्माण योजना का वहां पर अनुपालन करने का पूर्ण प्रयास हो रहा है। इस कार्यक्रम में आश्रम के प्रमुख स्वामी जी पूर्ण समय उपस्थित रहे एवं अपने विद्यार्थियों को दे सं वि वि में अध्ययन एवं स्वावलंबन प्रशिक्षण हेतु भेजने हेतु सहमत हुये। उसी दिन सायं टोली सदस्यों को एक परिजन के संबंधी के यहां विवाह की 25 वीं वर्षगांठ पर आमंत्रित किया गया जहां गायत्री परिवार से कोई भी परिचित नहीं थे किंतु टोली द्वारा संस्कार संपन्न करवाने के उपरांत समस्त जन अत्यंत अभिभूत हो गये एवं शान्तिकुन्ज आगमन हेतु संकल्पित हुये तथा टोली द्वारा बतलाये गये अनुशासनों के पालन हेतु भी कटिबद्ध हुये। इसी दिन सायं स्थानीय चेतना केंद्र पर टोली गई एवं वहां प्रति गुरुवार को होने वाले दीप यज्ञ में सहभाग किया।अंतिम दिन प्रातः साप्ताहिक बागमति सफाई कार्यक्रम में टोली सदस्य गयें एवं निर्धारित समय पर सत्र में कार्यक्रम के आयोजक के विद्यालय, आरुणि स्कूल के कक्षा 5 व 6 के विद्यार्थी बाल संस्कार शाला के प्रदर्शन हेतु आये। उनकी कक्षा लेते हुये यह अनुभव हुआ कि गुरुजी के विचारों एवं सीखों को यथार्थ रूप देने का काम इस विद्यालय में हो रहा है। इस विद्यालय के गणवेश की पीठ पर स्कूल के नाम के साथ युग निर्माण योजना भी लिखा हुआ हमने देखा। इसके अतिरिक्त बच्चों को गायत्री मंत्र जाप नियमित कराया जाता है, हमारी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा को वहां नेपाली में अनुवाद कर संस्कृति ज्ञान परीक्षा के नाम से करवाया जाता है। उस विद्यालय की काॅपियों पर भी गायत्री मंत्र लिखा हुआ देखा गया। बच्चों की दो घंटे की संस्कार शाला में उपस्थितों ने एवं बच्चों ने भरपूर आनंद एवं ज्ञान लिया। टोली के विदाई वाले दिन, सदस्यों ने स्थानीय गायत्री प्रज्ञापीठ देखा जिसे हमारी कर्मठ बहिनें चला रहीं हैं जहां लगभग 20 कार्यकर्ताओं की संस्कार शाला संबंधी गोष्ठी हुई जिसमें सबको इस दिशा में संकल्पित कराया गया। इसके पश्चात् एक नये जुड़े किंतु अत्यंत भावनाशील युवा परिजन श्री अर्जुन धरेल की संस्था एस ट्रेवल में टोली को आमंत्रित किया गया। श्री अर्जुन मिशन के प्रति अत्यंत भावनाशील एवं निष्ठावान हैं एवं बागमति सफाई हेतु तन मन धन से सहयोग करते हैं। इसी दिन टोली ने आरुणि स्कूल एवं प्रस्तावित गायत्री ग्राम के स्थल का भी निरीक्षण किया। नेपाल प्रवास के दौरान यह अनुभव किया गया कि यहां पर सभी निवासी अत्यंत भावनाशील एवं ईश्वर पर आस्था रखने वाले हैं एवं हमारी किसी से भी भेंट में मिशन के प्रति अपार श्रद्धा एवं उत्सुकता देखी गई, इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि गौतम बुद्ध की वह जन्मभूमि अत्यंत उर्वर है केवल हमारे नैष्ठिक एवं कर्मठ परिजन प्रयास करें तो सभी को सहजता से मिशन की विचारधारा से जोड़ा जा सकता है एवं सब के जीवन को एक अच्छी दिशाधारा दी जा सकती है एवं गुरुजी के विचारों को जन जन तक पहुंचाया जा सकता है। बाल संस्कार शाला के प्रति यह संकल्पबद्धता इसी बात की पुष्टि करती है। इस कार्यक्रम में हमारे कर्मठ परिजन सर्वश्री केशव मरहट्टा, रमेश खंडेलवाल, विद्यालय के प्राचार्य हिकमत दहल का विशेष प्रयास एवं नारायण पंथी, राजू अधिकारी, श्रीमती सावित्री काफले, गायत्री आचार्य एवं अन्य परिजनों की सतत उपस्थिती एवं सहयोग रहा। इसीके साथ प.पू. गुरुदेव वंदनीया माताजी का सूक्ष्म संरक्षण एवं उनका मार्गदर्शन हमें सतत अनुभव होता रहा।






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