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शक्तिपीठ द्वारा संचालित विद्यालय द्वारा बच्चों में देव संस्कृति का संचार

[हरिद्वार 6 मार्च।], Dec 26, 2017
राँची (झारखंड) गायत्री शक्तिपीठ, राँची द्वारा संचालित युग निर्माण कन्या विद्यालय अपने युग निर्माण आन्दोलन के मुख्य ध्येय-बच्चों में नैतिकता संवर्धन के लिए किये जा रहे प्रयासों के कारण विख्यात् है। यह विद्यालय अपने 300 विद्यार्थियों को परस्पर सम्मान, सेवा, विनयशीलता के गुण प्रदान कर रहा है। यह वह विद्यालय है जहाँ सास-बहू के रिश्तों के बीच आत्मीयता बढ़ाने के सूत्र भी बताये जाते हैं। प्राचार्य श्री नरोत्तम महतो एवं सचिव डॉ. रविशंकर त्रिपाठी के अनुसार देश के नागरिकों में नैतिकता का विकास देश को एक नयी आजादी दिलाने जैसा ही अभियान है, जिसके लिए वे पूरी निष्ठा से प्रयत्नशील हैं। जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए विद्यार्थियों को तैयार करें शिक्षकधनबाद (झारखंड)शिक्षक का लक्ष्य अपने विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। आज की सबसे बड़ी चुनौती जीवन में नैतिक मूल्यों का ह्रास है, जिसे हमें अच्छी तरह से समझना चाहिए। समाज की समस्याएँ नैतिकता के अभाव में ही उभरती हैं तथा नैतिक रूप से कमजोर व्यक्ति ही तनाव, अभाव, अशक्ति, बीमारियों के चंगुल में आते हैं। अतः विद्यार्थी के व्यक्तित्व विकास में शिक्षक को एक अनुभवी मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। यह विचार गायत्री शक्तिपीठ बस्ताकोला, धनबाद में दिनांक 12 जनवरी को गायत्री परिवार द्वारा आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. आर.पी. कर्मयोगी, निदेशक, स्कूल ऑफ एजुकेशन, देव संस्कृति विवि. ने व्यक्त किये। इसमें 178 विद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षकों ने भाग लिया। प्रादेशिक संगठन प्रभारी श्री परशुराम गुप्ता, श्री अभयानंद पाठक-अवकाश प्राप्त महाप्रबंधक बीसीसीएल, श्री पीके दुबे-मुख्य महाप्रबंधक आदि गणमान्यों ने भी इस समारोह को सम्बोधित करते हुए शिक्षा में नैतिक मूल्यों के समावेश की ओर ध्यान देने का आह्वान शिक्षकों से किया। श्री विभूतिशरण सिंह ने अतिथि परिचय के क्रम में जिले के 24 विद्यालयों में संस्कृति मंडलों के गठन का संकल्प दोहराया। कई शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए गायत्री परिवार द्वारा शिक्षा के उन्नयन के प्रयासों की सराहना की, सुझाव और अपने सहयोग का आश्वासन दिया। शक्तिपीठ कार्यवाहक श्री केपी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। देव संस्कृति विवि. के प्रतिनिधि डॉ. आर.पी. कर्मयोगी ने अगले दिन दो प्रतिष्ठित विद्यालय-डीएवी महुदा तथा राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर  में सभाओं को संबोधित किया। गायत्री ज्ञान मंदिर, सिंदरी में कार्यकर्त्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विद्यालयों में वातावरण निर्माण के लिए सभी का उत्साहवर्धन किया। श्रीमती मंजुला कुमारी, अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापिका गुजराती हाई स्कूल, झरिया ने अपना शेष जीवन गायत्री परिवार के साथ मिलकर विद्यार्थियों के कल्याण के लिए लगाने का संकल्प लिया।






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