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आस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति का उद्घोष - देश के बाहर 11वें अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का भव्य शुभारम्भ

[ब्रिस्बेन-हरिद्वार 19 अप्रैल], Dec 18, 2017
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या एवं संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी की अगुवाई में ब्रिस्बेन आस्ट्रेलिया के माउण्ट ग्रेवेट शो ग्राउण्ड में अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर भारत, आस्ट्रेलिया सहित विभिन्न देशों एवं अश्वमेध की धर्मध्वज फहराया गया। जो अनेकता में एकता, मानव मात्र के विकास एवं विश्व शांति की भावना से परिपूर्ण था। इस दौरान प्रमुख रूप से डॉ पण्ड्या, शैल दीदी के अलावा मुख्य अतिथि सीएण्डएम प्रोडक्शन डायरेक्टर मिक मोस, पुलिस के सारजेन्ट जिम बेलोस आदि कई देशों से आये गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

प्राप्त सूचना के अनुसार आस्ट्रेलिया, फीजी, न्यूजीलैण्ड सहित कई देशों से आई बहिनों ने 501 कलशों के साथ भव्य शोभा यात्रा निकाली। वहीं जवारा, झण्डे, बैनर एवं युग निर्माणी, भारतीय संस्कृति के नारे, श्रीराम, श्रीकृष्ण, पर्यावरण सरंक्षण की विभिन्न झांकियों के साथ ब्रिस्बेन शहर गुंजायमान हो उठा।

आश्वमेधिक संसद, अध्वर्यु, उद्गाता एवं ब्र्रह्मणाछंसी के वैदिक मंत्रों, शंख घंटी, घड़ियाल के साथ संस्था की अधिष्ठात्री शैलबाला पण्ड्या ने पूरी शृंखला के 41वें तथा विदेश की धरती के ग्यारहवें - ब्रिस्बेन अश्वमेध गायत्री महायज्ञ की घोषणा की और इसे विश्व मानवता के कल्याण का आधार बताया। इसके साथ अत्यंत मनोरम विशिष्ट टेण्ट में बने 251 कुण्डीय यज्ञशाला में देवपूजन के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं आस्ट्रेलिया के उन्नयन के लिए वैदिक मंत्रों से आहुतियाँ दी गईं। जल, जंगल, जमीन, वायु, सूर्य, समुद्र को अपना प्रकोप शांत करने के लिए विशिष्ट प्रार्थना की गई।          

इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं भारत को विश्वगुरु बनना भवितव्यता है। यही विश्व के पर्यावरण संकट का समाधान प्र्रस्तुत करेगा। आस्ट्रेलिया को ‘लैण्ड ऑफ अपार्चनीटी’ अर्थात् भौतिक प्रगति करने का अवसर देने वाली भूमि कहा जाता है, इसे अश्वमेध के महायज्ञ से ‘लैण्ड ऑफ फिजिकल, मेंटल एण्ड स्प्रिच्यूअल अपार्चनीटी’ बनाना है, इससे पूरे आस्ट्रेलिया महाद्वीप में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लाभ मिलेगा तथा बाढ़, तूफान, भूकम्प, सुनामी, बुश फायर का समाधान निकलेगा, ऐसी आशा है।

विशाल मंच पर भारत के विभिन्नता के एकता को दर्शाता सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक आस्ट्रेलियन नृत्य से दल का स्वागत किया। वहीं भांगड़ा, गरबा, कत्थक, भोजपुरी नृत्य आदि प्रस्तुत किये गये। सिडनी के बाल संस्कार केन्द्र की लघु नाटिका को सबने सराहा। वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगीत की प्रस्तुति ने प्रवासी भारतीयों को अपनी मातृभूमि की याद दिला दी। शांतिकुंज स्थित विदेश विभाग के अनुसार अप्रैल 2013 से इस महायज्ञ की तैयारियां चल रही थीं। वहीं शांतिकुंज के प्रो0 प्रमोद भटनागर के नेतृत्व में 13 सदस्यीय दल ने पिछले दो माह से आस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों का मंथन किया।







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RAVI SHARMA
2015-11-11 13:56:39
misbind
cp Sharma
2014-05-10 03:24:35
jai ho guru maharaj saari duniya pe kripa barsao,jay ho maa bhagwati ki
neelu
2014-04-23 15:03:53
SAT SAT NAMAN TO GURUDEV,GURU MAA SHREDHEYA PANDEYA JI,SHAIL DIDI
RAMPAL TIWARI
2014-04-21 15:27:42
SHAT SHAT NAMAN 21 VI SADI UJJAL BHAVISHY
UPENDRA LAL DAS
2014-04-20 17:05:30
DR.PANDYA / ADARNIYA SHAIL DIDI ko sat sat naman
UPENDRA LAL DAS
2014-04-20 16:59:19
SAT SAT NAMAN TO GURUDEV,GURU MAA SHREDHEYA PANDEYA JI,SHAIL DIDI