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धर्मतन्त्र से लोकशिक्षण का अभिनव प्रयोग कर रहे हैं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र- छात्राएँ

यज्ञीय परम्परा से ही व्यक्तित्व परिष्कार सम्भव 

धर्मतन्त्र से लोकशिक्षण के अनुपम आदर्शों और संकल्पों को लेकर अग्रसर हो रहे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र- छात्राएँ इन दिनों एक अनूठी पहल कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के बी०एड० विभाग के छात्र- छात्राओं द्वारा जनपद की उच्चस्तरीय माध्यमिक विद्यालयों में यज्ञीय परम्परा से व्यक्तित्व परिष्कार का कार्य प्रारम्भ किया गया है। इसके अन्तर्गत वजीराबादी, खड़खड़ी, हरिद्वार के राजकीय उच्चस्तरीय माध्यमिक विद्यालय में बी० एड० विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर श्री अतुल मिश्रा के नेतृत्व में छात्र- छात्राओं ने यज्ञ के माध्यम से विद्यालय की छात्राओं में विवेक (प्रज्ञा) का जागरण किया। ज्ञान- दीक्षा व जन्मदिवस संस्कार को यज्ञीय परिष्कृत वातावरण में जागृत किया गया। 

सभी शिक्षण- प्रशिक्षण कर रहे छात्र- छात्राओं को यज्ञीय प्रेरणा से मिलने वाली सफलताओं पर प्रकाश डाला। यज्ञाचार्यों ने बताया कि दक्षता, योग्यता, विवेक, चरित्र, अनुशासन और स्वास्थ्य प्राप्त करना ही विद्यार्थी जीवन का प्रथम उद्देश्य है, यही धर्म है, तथा समय- समय पर अपनी समीक्षा कर अपना सुधार करना ही अध्यात्म है। इस अवसर पर विद्यार्थियों से अपनी एक बुराई को छोड़ने और एक अच्छाई को धारण करने का संकल्प दिलाया गया। 

इस अवसर पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का पुरस्कार वितरण भी यज्ञीय वातावरण में किया गया। प्राचार्या- श्रीमती विमला उनियाल ने इस अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के सभी छात्र- छात्राओं की भूरि- भूरि प्रशंसा की तथा नये सत्र हेतु विद्यालय के विद्यार्थियों को फूल बरसाकर आशीर्वचन दिया। बी०एड० के छात्र- छात्राओं द्वारा आरम्भ की गई इस अनुपम पहल को प्रोत्साहित करते हुए विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्डया ने कहा कि आज के यह छात्र कल के शिक्षक हैं। बीएड से पास होकर यही कल राष्ट्र के भाग्यविधाता बनेंगे। ऐसे में यह पहल आल्हादित करने लायक है। इस अवसर वैदिक मन्त्रोच्चार एवं युगसंगीत से वातावरण आल्हादित करने वाला हो गया।






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Rajesh M. Bhavsar
2014-05-03 21:43:37
Very good initiative for development in the right direction.