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देशभर के उच्च प्रतिभावान बच्चों का सम्मान समारोह शांतिकुंज में

[Shantikunj,Pracharatmak], Dec 26, 2017
देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने किया शिविर का उद्घाटन, देश भर के साढ़े तीन सौ से अधिक विद्यार्थियों ने की प्रतिभागिता

राष्ट्र के पुननिर्माण में छात्रों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। छात्र ही राष्ट्र के भाग्य निर्माता हैं। इस बात को चरितार्थ करने वाले साढ़े तीन सौ से अधिक छात्र इन दिनों युुगतीर्थ शांतिकुंज में व्यक्तित्व परिष्कार प्रशिक्षण हेतु आए हैं। यह वे बच्चे हैं जिन्होंने देशभर के विभिन्न राज्यों में संपन्न होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में वरीयताएँ प्राप्त की हैं। उल्लेखनीय है कि शांतिकुंज द्वारा प्रति वर्ष ५० लाख से अधिक छात्रों को भारतीय संस्कृति से रूबरू कराया जाता है। राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण सत्र का शुभारम्भ आज देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूलभूत तथ्यों और सिद्धान्तों की सरल भाषा में व्याख्या की। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है भारतीय संस्कृति। संस्कृति का अर्थ परिष्कृत जीवन शैली है। संस्कृति से मानव का नवनिर्माण होता है। मानव से महामानव बनाने की टकसाल है भारतीय संस्कृति।

डॉ. चिन्मय ने कहा कि भारतीय संस्कृृति के पाँच प्रमुख तत्त्व गौ, गंगा, गायत्री, गीता और गुरु हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही विद्यार्थी जीवन में सफलताएँ अर्जित होती हैं, वहीं गायत्री की उपासना से सद्बुुद्धि और सद्ज्ञान का प्रादुर्भाव होता है। गौ और गंगा के दर्शन से जहाँ हृदयमें विशालता और निर्मलता आती है, वहीं गीता से जीवन जीने की कला प्राप्त होती है।सौभाग्य से आप सभी इन पाँचों तत्त्वों को एक साथ इस गुरुकुल में प्राप्त कर सकते हैं। पाँच दिन तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को व्यक्तित्व परिष्कार, कैरियरबनाने के सूत्र, मानवीय जीवन और संस्कृति आदि विषयों के साथ- साथ भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्त्व योग, यज्ञ, आसन, प्राणायाम आदि पर उन्हें मार्गदर्शन दिया जाएगा।

इसके साथ साथ वे आश्रम दिनचर्या में भी शामिल होंगे। पाँच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा जी पुरस्कार वितरण के साथ करेंगे।









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Manisha Kumari
2014-05-27 09:08:13
It is appreciable to know of such an institute which provides knowledge with education.We would aspire to join it.
Kundan Lal Verma
2014-05-18 09:37:47
उत्तम एवं सराहनीय.....
Parshuram kushwaha
2014-05-18 06:42:33
Kya shantikunj me koi bhi bachcha pad sakta hai.
Vikash kumar
2014-05-18 01:03:32
बहुत हि अच्छा हे