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हर क्षेत्र में चल पड़ा नदी स्वच्छता अभियान


भुबनेश्वर (ओडिशा)
दिया, भुबनेश्वर और गायत्री शक्तिपीठ चंद्रशेखरपुर ने दिनांक १२ जून को निर्मल गंगा जन अभियान में भागीदारी करते हुए स्थानीय दया नदी की सफाई की। उल्लेखनीय है कि यह चक्रवर्ती सम्राट अशोक के हृदय परिवर्तन की साक्षी रही भूमि है। भगवान बुद्ध की कृपा से यहीं सम्राट को अपनी भूल का अहसास हुआ था। 

गायत्री परिवार के परिजनों ने जिस नदी में कभी खून की धारा बही थी, उसके तट पर बैठकर समूह साधना की। उन्होंने करुणा और शांति का संदेश जन-जन के मन में संचरित हो, ऐसी प्रार्थना की। तत्पश्चात् स्वच्छता अभियान आरंभ हुआ। कई घंटों तक सफाई अभियान चलता रहा। परिजनों ने इस अभियान को आगे भी चलाते रहने और दया नदी के तट पर सघन वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। 

मझोला, कासगंज (उत्तर प्रदेश)
जनपद कासगंज के गंगाघाट कादरगंज पर गायत्री परिवार के कार्यकर्त्ताओं ने गंगा सफाई अभियान चलाते हुए गंगा दशहरा, गायत्री जयंती पर्व मनाया। गायत्री शक्तिपीठ के प्रमुख कार्यकर्त्ता श्री महेशचंद्र पालीवाल के नेतृत्व में ७० कार्यकर्त्ताओं ने इसमें भाग लिया। उन्होंने जगह-जगह पॉलीथीन, बासी फूल और विसर्जित मूर्तियाँ गंगा के आँचल से निकालते हुए नगरवासियों और तीर्थयात्रियों को गंगा सफाई के प्रति जागरूक किया। मेगाफोन के सहारे गंगोत्री से गंगासागर तक के गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे निर्मल गंगा जन अभियान की जानकारी दी गयी। गंगा सफाई अभियान में भागीदारी और जागरूकता संबंधी पत्रक भी बाँटे गये। 

पुणे (महाराष्ट्र)
‘दिया’ पुणे से जुड़े नवयुवकों ने गायत्री परिवार के नदियों की स्वच्छता के लिए चलाये जा रहे राष्ट्रीय अभियान में भागीदारी करते हुए संत ज्ञानेश्वर की तपःस्थली आलंदी में बहने वाली इंद्रायणी नदी की सफाई की। बड़ी संख्या में नवयुवक अपने केशरिया गणवेश में पहुँचे और नदी में उतरकर कूड़ा-करकट हटाया, घाटों की सफाई की तथा तीर्थयात्रियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया। 

बण्डा, शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश)
श्री गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मस्थली ने अपने संकल्पित निर्मल गोमती एवं तीर्थ स्वच्छता अभियान को गति देते हुए गोमती तट पर स्थित पौराणिक तीर्थ एकोत्तर नाथ क्षेत्र की सफाई की। ऐतिहासिक वर्णन के अनुसार इसे देवराज इंद्र द्वारा स्थापित भगवान महाकालेश्वर का १७वाँ शिवलिंग माना जाता है। यह क्षेत्र शक्तिपीठ से १५ कि.मी. दूर है। 

गायत्री परिवार के परिजनों ने इस अभियान के अगले क्रम में गोमती उद्गम स्थल, माधोटांडा, पीलीभीत की सफाई का लक्ष्य रखा है। इस अभियान में तीर्थों की सफाई के साथ दीवार लेखन और जनजागरण के तमाम प्रयास किये जाते हैं। 






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