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बाल संस्कार शाला बदल रही हैं मन, विचार और संस्कार


झुग्गी वासी बच्चों की शिक्षा-दीक्षा में संलग्न है ऋतु शर्मा 

नागपुर (महाराष्ट्र)
युग निर्माण आन्दोलन का प्रमुख लक्ष्य है सद्बुद्धि और भाव संवेदनाओं का जागरण। यह मानव जन्म को सार्थक करने वाला परमात्मा का अनमोल अनुग्रह है। जो जितने अंशों में इस लक्ष्य-सिद्धि की ओर अग्रसर होता जाता है, वहाँ उसी अनुपात में सेवा और सत्कर्म का स्रोत फूटता दिखाई देता है। 

परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी की प्रेरणा और अनुदान से अनगिनत लोगों को यह सिद्धि पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्हीं में से एक हैं नागपुर निवासी श्रीमती ऋतु शर्मा। 

श्रीमती ऋतु शर्मा पिछले एक वर्ष से अपने घर पर झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले अनाथ और अत्यंत गरीब बच्चों के लिए बाल संस्कार शाला चलाती हैं। लगभग ५० बच्चे उनकी सेवाओं का नियमित रूप से लाभ ले रहे हैं। 

श्रीमती ऋतु शर्मा ने बताया कि उनका लक्ष्य है इन बच्चों के हीन संस्कार और हीन भावनाओं का शमन कर उनकी वास्तविक क्षमताओं को उभारना। हर बच्चे को उन्होंने गायत्री मंत्र सिखाया है, उसकी सामर्थ्य का बोध कराते हुए गायत्री उपासक बनाया है। तरह-तरह की नैतिक शिक्षा दी जाती है और अच्छी आदतों का अभ्यास कराया जाता है। 

वे बच्चों को हिंदी, गणित और अंग्रेजी पढ़ाती हैं। प्रत्येक बच्चे का जन्म दिवस मिशन की आदर्श परंपराओं के साथ मनाती हैं। इस अवसर पर उन्हें नये वस्त्र, नये बस्ते और कॉपी-किताब भेंट करती हैं। एक अच्छे अभिभावक की भूमिका में उन्हें अपनाकर बच्चे बहुत प्रसन्न दिखाई देते हैं। उनके अभिभावक और शिक्षक भी श्रीमती ऋतु शर्मा द्वारा बच्चों के विचार, व्यवहार, संस्कार और सारे जीवन को बदलने के लिए किये जा रहे प्रयासों की भरपूर सराहना करते हैं। इस सेवा-समर्पण में उनके पति श्री राकेश शर्मा का भी भरपूर सहयोग है। 








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