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डॉ चिन्मय पण्ड्या ने मानवीय उत्कर्ष विषय पर दिया उद्बोधन, बॉस्टन (अमेरिका)

[Shantikunj,Pracharatmak],

संयुक्त राज्य अमेरिका की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक राजधानी बॉस्टन में मानवीय उत्कर्ष पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने मानवीय उत्कर्ष विषय पर उद्बोधन दिया। बॉस्टन के उपनगर बिल्लेरीका स्थित श्री द्वारकामाई विद्यापीठ के सभागृह में संपन्न हुए इस आयोजन में सैकड़ों उत्साही लोगों ने भाग लिया।

डॉ चिन्मय ने बताया कि यह समय जिसमें हम गति कर रहे हैं, बहुत ही विषम है। आज मनुष्य का दृष्टिकोण बहिर्मुखी हो गया है। दिव्य संस्कृति से विमुख होकर भोगवादी विचारोन्मुख हो गया है। यह पतन पराभव की ओर ले जा रहा है। इस दृष्टिकोण में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

डॉ. चिन्मय के अनुसार आज मनुष्य को अपने क्रियाकलापों व जीवन क्रम पर पुनर्निरीक्षण करने की आवश्यकता है। वह क्रियाकृत्य जो मनुष्य को गहरे अन्धेरे में धकेल रहा है, उससे बचकर नवसृजनात्मक विचारधाराओं को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज विज्ञान बहुत प्रगति कर ली है। सुविधा साधनों के अम्बार लगा दिए हैं। पर साथ ही विनाश के सरंजाम भी खड़े हो गए हैं। ऐसे में यदि मनुष्य के अन्दर यदि मानविकता सुलभ भाव संवेदना जाग्रत सक्रिय न रहे तो निश्चय वह विनाश को न्योत दे देगा। विश्व में हो रहे तमाम विग्रहों और संघर्षों के पीछे मानवी दुर्बुद्धि का ही हाथ है।

डॉ. चिन्मय ने विनाश से बचने का उपाय बताते हुए कहा, सद्बुद्धि ही वह अमोघ उपाय है जिससे संघर्ष विग्रह समाप्त होकर सुख शांति का वातावरण विनिर्मित हो सकता है। देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति के साथ प्रो० विश्व प्रकाश त्रिपाठी एवं राजकुमार वैष्णव थे।










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Padmakant joshi
2014-08-03 19:30:45
alongwith NRI foreign people and other religion priests meetings to be held e.g.vedant world iscon etc
Om Prakash Sable
2014-07-31 16:35:07
vartman samay me hame ishwar ko shakshi mankar, vevek ka upyog karake, sanmarg per chalana awasyak hai