The News (All World Gayatri Pariwar)
Home Editor's Desk World News Regional News Shantikunj E-Paper Upcoming Activities Articles Contact US

निर्मल गंगा जन अभियान - विधि प्रकोष्ठ हेतु शांतिकुंज में गोष्ठी संपन्न

निर्मल गंगा जन अभियान हेतु विधि प्रकोष्ठ  गठन हेतु  सर्वोच्च न्यायालय के विधि विशेषज्ञों की गोष्ठी 

निर्मल गंगा जन अभियान के लिये विविध विधि विषयक सहयोग हेतु प्रस्तावित विधि प्रकोष्ठ  के गठन हेतु दि 16 व 17 अगस्त 2014 को शान्तिकुन्ज के रामकृष्ण हाॅल में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं की गोष्ठी  का शुभारम्भ हुआ।
गोष्ठी  में लगभग 25 वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के आरंभ में शान्तिकुन्ज एक ऊर्जित आरण्यक इस विषय के माध्यम से आद श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी ने उपस्थितों को बताया कि जिस प्रकार से बीज को पल्लवित होने के लिये उर्वरा भूमि की आवश्यकता पड़ती है उसी प्रकार से प पू गुरुजी ने हमारे सद्विचारों को सत्संकल्पों को पूर्ण करने हेतु अनुकूल वातावरण देने हेतु शान्तिकुन्ज बनाया है। हमें गुरु के माध्यम से ईश्वर की वाणी सुनाई देती है एवं उसके निर्देश मिलते रहते हैं।
कार्यक्रम में आगे श्री के पी दुबे जी ने अपने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुये समाज के इस बुद्धिजीवी वर्ग से आव्हान किया कि सुशिक्षित नागरिक होने के नाते आपका यह परम कर्तव्य बनता है कि गंगा की रक्षा हेतु आगे आयें।
इस पर उत्तर देते हुये सर्वोच्च न्यायालय के बार एसोशिएशन के उपाध्यक्ष श्री शेखर ने कहा कि हम सब अधिवक्ता किसी भी समय दिन रात आपके इस अभियान की मदद करने हेतु पूर्णतः तैयार हैं। उन्होंने कहा कि आप हमें जो भी इस विषय में सामग्री उपलब्ध है वह कागज पर दें तो हमें कार्य करने में बहुत सरल होगा।  इस अभियान के बारे में हम सब बहुत ही प्रभावित हैं और लग रहा कि कोई सार्थक कार्य हो रहा है।
एक  अन्य अधिवक्ता श्री भाटिया ने इस पर सहमत होते हुये अपनी एक कविता गंगा पर सुनाई।
अंतर्राष्ट्रीय ज्यूरिस्ट श्री चारी ने भी कहा कि मैं अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर काम करता हूँ और इस पर भी मेरा पूरा सहयोग रहेगा।
श्री डाॅ आलोक शर्मा जो देश विदेश में कानून के मसलों पर कार्य करते हैं उन्होंने भी अत्यंत अभिभूत होते हुये अपनी पूर्ण सहमति दी एवं पूर्ण सहयोग का वचन दिया।
इसके उपरांत अगले सत्र में श्री अंकुर मेहता का जीवन प्रबंधन एवं भोजनोपरांत डाॅ श्रीमती वंदना श्रीवास्तव देसंविवि का समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन पर विचारोत्तजक एवं उपयोगी उद्बोधन हुआ जिस से प्रभावित होकर सभी अतिथियों ने एक स्वर से मांग की इस प्रकार की कक्षायें दिल्ली बार संघ में भी सभी वकीलों हेतु अवश्य लगाई जायें। इस विषय में उनकी ओर से शीघ्र ही संपर्क किया जायेगा।
सायं दे सं वि वि के संपूर्ण भ्रमण के उपरांत उनकी मांग पर हमारी गंगा पर बनाई गई फिल्म एवं विविध रचनात्मक कार्यक्रमों पर फिल्म दिखाई गई जिस से उन्हें हमारी विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम में दोपहर के सत्र में राष्ट्रीय  बार एसासियेषन के सचिव श्री प्रशांत जी भी पधारे थे। इस में विशेष उपस्थिति हेतु पूर्व न्यायाधीश  मान0 ज्ञानसुधा मिश्रा को भी आना था किंतु किन्हीं कारणों से उपस्थित न होने के बाद भी उनका लिखित संदेश आया जिसमें शुभकामनायें व्यक्त करने के साथ कार्यक्रम की सराहना भेजी गई जिसे गोष्ठी में पढ़ा गया। कार्यक्रम में हमारे परिजन एवं पूर्व न्यायाधीश आद श्री एस आर अत्रि जी की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन मिला।
संक्षेप में कहा जा सकता है कि पहले दिन ही अतिथियों की समग्र सहयोग की भावना स्पष्ट रूप मे उभर कर हमारे सामने आ गई थी। अतिथियों ने दोनों ही दिवस योग कक्षा एवं यज्ञ कार्य में रूचिपूर्वक भाग लिया।
द्वितीय दिवस के आरंभ में बोलते हुये आद श्री कालीचरण शर्मा जी ने कहा कि भारत के संविधान के वह महत्वपूर्ण अनुच्छेद आदि जो एक आम नागरिक के हित में हैं उनको सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाये जिससे वह अपने अधिकार और कर्तव्य भली प्रकार जान सके। 
इसके बाद के क्रम में सभी प्रतिभागियों से उनके विचार पूछे गये जिसमें सभी अधिवक्ताओं अलग अलग अपने विचार व्यक्त किये। 
अंत में आशीर्वचन के रूप में बोलते हुय गोष्ठी में उपस्थित वरिष्ठ भाईयों में आद श्री डाॅ बृजमोहन गौड़ जी ने कहा कि देश की प्रतिभायें यदि सही कार्य में लग जायें तो युग निर्माण का कार्य और सरल हो जायेगा। आद श्री डाॅ ओ पी शर्मा जी ने कहा कि शान्तिकुन्ज और समाज के आप जैसे प्रबुद्धों के एक हो जाने से समाज में भलाई फैलेगी। आद श्री कपिल केसरी जी ने अपने उद्गार में  आशा व्यक्त की  कि विधि व्यवस्था भी इस दिशा में चल पड़ी तो गंगा सफाई का काम पूरे देश में एक लहर की तरह चल पड़ेगा।
घन्यवाद प्रस्ताव आद श्री एस आर अत्रि जी ने दिया एवं सभी को साहित्य वितरण करने के पश्चातकार्यक्रम संपन्न हुआ। 








Click for hindi Typing


Related Stories
Recent News
Most Viewed
Total Viewed 693

Comments

Post your comment