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अमेरिकी युवाओं का प्रगति पथ प्रशस्त कर लौटी शांतिकुंज की टोली

[न्यूजर्सी],

न्यूजर्सी में १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के साथ मना गुरुपर्व
अमेरिका-कनाडा के ३००० लोगों ने भाग लिया

न्यूजर्सी ः २० जुलाई को गायत्री चेतना केंद्र पिस्काटवे, न्यूजर्सी में भव्य क्0त्त् कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के साथ गुरुपूर्णिमा पर्व मनाया गया। इसमें अमेरिका-कनाडा के ३००० से अधिक परिजनों ने भाग लिया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या की मुख्य उपस्थिति ने इस विशाल सम्मेलन को अत्यंत प्रभावशाली और चिर-स्मरणीय बना दिया था। 

डॉ. चिन्मय ने सबसे पहले परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी तथा आदरणीय डॉ. साहब-जीजी की ओर से सभी को गुरुपूर्णिमा पर्व की मंगलकामनाएँ दीं। अपने संदेश में उन्होंने गुरुदेव-माताजी के साथ बिताये बचपन के संस्मरण सुनाए। गुरुदेव-माताजी के स्नेह ने कैसे उनमें समाज और संस्कृति का दर्द जगाया, संस्कारवान बनाया, यह सुनना अपने बच्चों को संस्कार देने की दृष्टि से लोगों को बहुत उपयोगी लगा।

‘मानवीय उत्कृष्टता’ विषय पर बोलते हुए डॉ. चिन्मय ने जीवन उत्कर्ष के लिए उद्ेश्यपूर्ण जीवन, सुदृढ़ व्यक्तित्व एवं लोकमंगल की भावना को प्रमुख आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य, बड़ी योजनाएँ जरूरी हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा आवश्यक है अवसर को पहचानना और उसका पूरा-पूरा लाभ उठाना। मेज पर सजी मोटी मोमबत्ती से उस छोटे-से दीपक का जीवन श्रेष्ठ है जो दूसरे दीपकों को जलाने में ही अपना जीवन खपा देता है। 

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पिस्काट-वे के मेयर मिस्टर ब्रायन व्हेयर द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। अपने संदेश में उन्होंने डॉ. प्रणव जी का विशेष उल्लेख किया, जिनकी प्रेरणा से गायत्री चेतना केंद्र पिस्काट-वे सांस्कृतिक, चिकित्सकीय, बाल संस्कार शाला एवं मल्टीफेथ गतिविधियों द्वारा समाज की सेवा कर रहा है। 

शांतिकुंज प्रतिनिधि प्रो. विश्वप्रकाश त्रिपाठी, श्री राजकुमार वैष्णव, श्री शांतिलाल पटेल एवं श्री रमेश तिवारी ने महायज्ञ का संचालन किया। टोली के भाव संवेदना तथा नवसृजन के संकल्पों से ओतप्रोत प्रज्ञागीतों एवं लयबद्ध कर्मकाण्ड ने जनभावनाओं में दिव्यता का संचार किया। 

आरंभ में अमेरिका के प्रथम प्रवास पर गये डॉ. चिन्मय पण्ड्या का गायत्री चेतना केन्द्र की ओर से श्री नटुभाई एवं श्री रावजी भाई ने भव्य स्वागत किया। श्री मयूर ठाकर ने शांतिकुंज प्रतिनिधियों का परिचय दिया।  

श्री नटुभाई रावजीभाई एवं पार्थ देसाई ने डॉ. चिन्मय पण्ड्या को केन्द्र की समस्त गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। श्रावण मास में सैकड़ों लोगों द्वारा रुद्राभिषेक, होली-दीवाली पर औसतन पाँच हजार लोगों की भागीदारी, बाल संस्कार शाला में ३०० बच्चों की भागीदारी, पुस्तकालय जैसी गतिविधियों की जानकारी प्रसन्नतादायक थी। 

उत्कर्ष के लिए जरूरी है लोकमंगल की भावना तथा दृढ़ संकल्प
  • हिन्दू टेम्पल ऑफ सेन ऐन्टानियो के महालक्ष्मी हॉल में डॉ. चिन्मय पण्ड्या का उद्बोधन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम था। 
  • गायत्री परिवार डलास, ह्यूस्टन एवं सेन एंटानियो के परिजन, एचटीएसए ट्रस्टी, स्वामीनारायण, स्वाध्याय परिवार, हिन्दू सेवा संघ, साईं थियोसॉफिकल सोसायटी, आपी, टिप्स, ताना, सहित विभिन्न संस्थानों के विशिष्ट आमंत्रित 250 गणमान्य इसमें उपस्थित थे।
  • कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं मुकेश भगानी, वीना प्रसाद, अम्बिका नटराजन, ममता कापड़िया एवं शांतिकुञ्ज प्रतिनिधि श्री राजकुमार वैष्णव द्वारा प्रस्तुत गीतों के साथ हुआ। महेश कापड़िया ने डॉ. चिन्मय जी का परिचय दिया। 
  • डॉ. चिन्मय ने डॉ. रामकृष्ण राव को विशेष रूप से सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. रामकृष्ण राव ने आदरणीय डॉ प्रणव पण्ड्या एवं आदरणीया शैल जीजी से हुई मुलाकात के संस्मरण सुनाए। 
  • डॉ. चिन्मय ने पावर प्वाइंट के माध्यम से ‘ह्यूमन एक्सीलेंस’ पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उद्देश्यपूर्ण जीवन में लोकमंगल की भावना के साथ अपनायी गयी सक्रियता किसी व्यक्ति को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करती है। इरादे पक्के हों तो किसी भी प्रकार की बाधा, कोई भी अशक्तता सफलता का मार्ग नहीं रोक सकती। स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद, महर्षि रमण, परम पूज्य गुरुदेव के जीवन इस संदर्भ में प्रत्यक्ष उदाहरण है।
  • इस मंच से शांतिकुंज प्रतिनिधि ने सेन एंटानियो के विशिष्ट जनों को सम्मानित किया। इस क्रम में डॉ. रामा एवं कमला राव, डॉ. पी.एन. एवं रानी, डॉ. जयश्री एवं सुधीर जागीरदार, डॉ. बेलूर एवं बना रामनाथ, डॉ. श्रीधर एवं डॉ. नीला पटेल को सम्मानित किया गया। ममता कापड़िया द्वारा आभार ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ। डॉ. कल्पना अयंगर ने मंच संचालन किया। 






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