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देसंविवि में चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2 अक्टूबर से

[Shantikunj,Pracharatmak],
कई देशों के योग प्रशिक्षु होंगे सम्मिलित

देवभूमि उत्तराखंड स्थित देवसंस्कृति विवि, हरिद्वार ने अपनी अल्प आयु में योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय ख्याति अर्जित की है। प्राचीन गुरुकुल परंपरा का निर्वहन करते हुए देसंविवि ने अब तक तीन अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव को आशातीत सफलता के साथ संपन्न कराया है। देवभूमि उत्तराखंड में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में प्रतिभागी, ऋषि संस्कृति व अध्यात्म को लेकर एक समग्र आयोजन के साक्षी बनेंगे। साथ ही वैकल्पिक चिकित्सा के अंतर्गत आने वाली विविध पद्धतियों जैसे यज्ञोपैथी, प्राणिक हीलिंग, एक्यूप्रेशर, नैचरोपैथी, पंचकर्म आदि पद्धतितियो से स्वास्थ्य लाभ की विधा से भी अवगत होंगे। प्रतिभागीगण पुण्यतोया मां गंगा मैया की गोद में बैठकर योग व ध्यान का लाभ उठायेंगे।

देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या के अनुसार 2 से 6 अक्टूबर तक होने वाले चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में करीब बीस देशों के प्रतिनिधियों के अलावा देश भर से योग के अनेक प्रशिक्षु व जिज्ञासु भाग लेने आ रहे हैं। डॉ चिन्मय के अनुसार 02 अक्टू को देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्याजी की गरिमामयी उपस्थिति में इस योग महोत्सव का शुभारंभ होगा। इसके अतिरिक्त इस समारोह में लाटविया एवं चेक रिपब्लिक के राजदूतों, अमेरिका के प्रसिद्ध पैट्रिक मैक्कुलम, राईट फाउण्डेशन के कुलाधिपति डॉ0 बॉब राइट एवं पूर्व सी.बी.आई. निदेशक पद्मश्री श्री कार्तिकेयन जी भी उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस योग महोत्सव की विशेषता यह है कि आज योग महोत्सवों में केवल योग को ही महत्त्व दिया जाता रहा है, किन्तु देसंविवि ने एक नये आयाम प्रस्तुत किया है, जिसमें योग, अध्यात्म, संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। प्रतिकुलपति के अनुसार इस फेस्टिवल में एक ओर जहाँ योग गुरु व आध्यात्मिक मार्गदर्शक प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे, वहीं विविध देशों से आये कलाकार अपनी सांस्कृतिक छटाएँ बिखरेंगे।

डॉ चिन्मय ने बताया कि इस वर्ष दो अक्टूबर को जहाँ एक ओर शक्ति की उपासना का पर्व चल रहा होगा, वहीं विश्व भर के योग जिज्ञासु कुलपिता पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी की साधना, उपासना व आराधना की विचारधाराओं से रुबरू होंगे। इस आयोजन में इटली के भाई हरिसिंह खालसा, लाटविया से प्रो. सिग्मा एवं प्रो. पिराग, नार्वे से प्रो0 मोस्ताद के अलावा अनेक देशों के गणमान्यों ने आयोजन में सम्मिलित होने की अनुशंसा कर दी है।






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