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निर्मल गंगा जन अभियान - समूह साधना - जनप्रेरक टोलियाँ - आयोजनों का स्वरूप इस प्रकार

सफलता के लिए जनजागरण करने और व्यवस्था बनाने में सहयोग करें

क्षेत्रों में सार्वजनिक आयोजनों का क्रम शारदीय नवरात्रि के लगभग शुरु कर दिया जाता है। इस वर्ष भी इसी अवधि में केन्द्रीय टोलियों को क्षेत्र में भेजने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। क्षेत्रों में स्थानीय प्राणवान परिजनों के सहयोग से क्षेत्रीय टोलियों के निकलने का भी यह समय अनुकूल पड़ता है। उनके अलावा जहाँ-जहाँ केन्द्रीय टोलियों के कार्यक्रम होते हैं वहाँ परिजनों को विशेष सक्रियता बरतनी पड़ती है। केन्द्रीय टोलियों के कार्यक्रमों के स्वरूप की ठीक-ठीक जानकारी होने पर परिजन बेहतर सहयोग कर पाते हैं, इस तथ्य को ध्यान में रखकर इस आलेख को प्रस्तुत किया जा रहा है। इस बार तीन तरह की विशेष टोलियाँ एक साथ सक्रिय की जा रही हैं।
1. निर्मल गंगा जन अभियान के तीसरे चरण के लिए।
2. समूह साधना संगठन आधारित यज्ञायोजनों के लिए।
3. नये क्षेत्रों में अभियान को पहुँचाने और विस्तार देने के लिए ‘जनप्रेरक टोलियाँ’।

तीनों की समुचित जानकारी यहाँ प्रस्तुत की जा रही है। 

निर्मल गंगा जन अभियान
परिजनों को विदित है कि गंगा मैया की धारा को फिर से अविरलता और निर्मलता प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार से लेकर अनेक संगठनों ने अपने-अपने ढंग से सक्रियता बरतनी शुरू कर दी है। युग निर्माण परिवार ने गंगा के लगभग २५०० किलोमीटर लम्बे प्रवाह क्षेत्र को पाँच अंचलों में बाँटकर दीर्घकालीन कार्ययोजना के अनुसार कार्य प्रारंभ किया है। उसके दो चरण पूरे किये जा चुके हैं। 

पहले चरण में पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया। जगह-जगह पानी के नमूने लेकर उनकी जाँच करके उसमें प्रदूषण का स्तर नापा गया। प्रदूषण के कारणों को चिह्नित करने तथा उनके निवारण के उपाय करने पर शोधपूर्ण विमर्श किये गये। 

दूसरे चरण में एक साथ पाँचों अंचलों में गंगा की व्यथा-कथा के आयोजनों द्वारा जन साधारण को स्थिति की गंभीरता समझाते हुए माँ गंगा के प्रति उनकी संवेदना उभारने तथा अपनी क्षमतानुसार कुछ न कुछ करने की प्रेरणा देने का कार्य किया गया। 

तीसरे चरण की बात
अब तीसरे चरण का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। इसके लिए पाँचों अंचलों के लिए पाँच गंगा रथ तैयार किये गये हैं। इनके साथ केन्द्रीय टोली के सदस्य और प्रत्येक अंचल के प्राणवान परिजन अपने-अपने क्षेत्रों में पूर्व निर्धारित क्रम से साथ चलेंगे। प्रत्येक अंचल के समन्वयकों-प्रबुद्ध जनों ने इसके लिए कार्ययोजनाएँ तैयार कर ली हैं। मोटी रूपरेखा इस प्रकार है। 

गंगारथ गंगा के दोनों तटों पर यात्रा करेंगे। अपने-अपने अंचलों में वे जिस स्थान से यात्रा प्रारंभ करेंगे, उसी स्थल पर समापन होगा। एक किनारे से यात्रा गंगा के प्रवाह के साथ आगे बढ़ेगी तथा अपने क्षेत्र की सीमा समाप्त होने पर दूसरे किनारे से वापिसी यात्रा करेगी। 

रथ पर स्थापित कलश का पूजन जगह-जगह किया जायेगा। हर जगह जन-जन को जागरूक करते हुए उनके कर्त्तव्य समझाये जायेंगे। तद्नुसार संकल्प भी कराये जायेंगे। रथ के विराम स्थल पहले से निर्धारित कर लिये गये हैं। वहाँ परिजन पहले से उत्साहवर्धक वातावरण बना कर रखेंगे। रथ के साथ ध्वनि विस्तारक यंत्र की सहायता से गीतों, उद्बोधनों द्वारा प्रेरणा संचार का क्रम चलेगा। जहाँ रात्रि विराम होगा, वहाँ प्रोजेक्टर पर गंगा प्रदूषण तथा उसके निवारण पर वृत्तचित्र (डॉक्यूमैण्ट्री) भी दिखाने की व्यवस्था रहेगी। 

पदयात्री : विभिन्न टोलियों के पदयात्री यात्रा मार्ग के निकटवर्ती आश्रमों, विभिन्न संस्थाओं, संगठनों, ग्रामों से सम्पर्क करते हुए चलेंगे। उन्हें गंगा को प्रदूषित न करने के लिए प्रेरित-संकल्पित करेंगे। वे इस दिशा में व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर क्या कर सकते हैं, यह भी समझायेंगे। जैसे- 
 तटवर्ती गाँवों के लोग खुले में शौच न जायें। सस्ते शौचालयों की व्यवस्था बनायें, जिससे प्रदूषण भी रुके और कीमती खाद भी मिले। 
 ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं तथा औद्योगिक इकाइयों को इसके लिए दबाव दें कि प्रदूषित पानी बिना उपचार के गंगा में न डालें। 
 गंगा किनारे सघन वृक्षारोपण करके माँ को हरी चूनर चढ़ायें। इससे तटों की मिट्टी का कटाव रुकेगा। भूमिगत जल बढ़ेगा जो धारा को अविरल बनाने में मदद करेगा। हरीतिमा के अन्य लाभ तो मिलेंगे ही। 
 जगह-जगह घाटों पर क्या करें, क्या न करें? के निर्देशक सूचना पट स्थापित करने तथा श्रद्धालुओं को स्वच्छता के लिए जागरूक करते रहने की व्यवस्था बनाई जाये। 
 गंगा भक्त पहले स्वयं गंगा मैया का अंचल गंदा न करने का व्रत लें और फिर अन्य व्यक्तियों, संगठनों, संस्थानों को प्रेरित करें। 
 जहाँ रात्रि विराम होगा, वहाँ गंगा शुद्धि दीपयज्ञों के भी आयोजन किए जायेंगे। जन-जन को सुनिश्चित संकल्प भी कराये जायेंगे। पदयात्रा टोलियाँ भी अपने-अपने ढंग से सम्बद्ध व्यक्तियों को संकल्पित कराने का प्रयास करेंगी।
 पूरे कार्यक्रम के दौरान प्राणवान भावनाशीलों को चिह्नित करके ‘गंगा सेवक मंडलों’ का गठन किया जायेगा। उस मंडल के सदस्य उस क्षेत्र में निर्मल गंगा जन अभियान की सफलता के लिए निरंतर सक्रिय रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रमों, लिये गये संकल्पों को पूरा करने, उन्हें बेहतर बनाते रहने के प्रयास करते रहेंगे। 
 औसतन हर अंचल को परिस्थितियों के अनुसार ४०० से ६०० कि.मी. की जिम्मेदारी दी गयी है। दोनों तटों पर यात्रा करने से प्रत्येक रथ को ८०० से १२०० कि.मी. मार्ग तय करना होगा। प्रतिदिन औसतन १० कि.मी. यात्रा की जायेगी, ताकि सघन जनसंपर्क करने और संकल्प जगाने का पर्याप्त अवसर मिल सके। इस प्रकार प्रत्येक रथ को ८० से १०० दिन की कार्ययोजना बनाकर अभियान चलाना है। प्रत्येक अंचल के समन्वयकों ने अपने-अपने क्षेत्र की योजना तैयार कर ली है। 

यों करें सहयोग
गंगा के तटों तथा निकटवर्ती गाँवों, कस्बों, शहरों के रहने वाले भावनाशील प्राणवान परिजन योजना को अधिक प्रभावशाली बनाने में कई प्रकार सहयोग कर सकते हैं। 
 केन्द्र या जोन से संपर्क करके अपने-अपने क्षेत्र के गंगायात्रा समन्वयकों की जानकारी ले लें। उनसे संपर्क करके अपने-अपने अंचल की कार्ययोजना का विवरण जान लें। 
 अपने समय और सहयोग का स्वरूप निश्चित करके यात्रा के प्रयाज (पूर्व तैयारी), यात्रा क्रम में सहयोग देने तथा यात्रा के बाद सतत सम्पर्क स्थापित करके किये गये संकल्पों को मूर्त रूप देने के लिए सुनिश्चित जिम्मेदारी उठाने की तैयारी करें। 
 गंगा मंडलों में सायं शामिल हों तथा अपने प्रभाव-संपर्क क्षेत्र के नर-नारियों को इसके लिए तैयार करें। मंडल के सदस्यों से बार-बार संपर्क करके उनका उत्साह बढ़ायें तथा कठिनाइयाँ हल करने में मदद करें। 
 इसके लिए अपने तथा अपने परिचित अन्य भावनाशीलों को प्रेरित-प्रवृत्त करने का प्रयास करें। इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने से अनेक लाभ होगे। गंगा मैया की सेवा का पुण्य मिलेगा, अपना जनसंपर्क बढ़ेगा, जिससे युग निर्माण अभियान को गति देने के अनेक मार्ग प्रशस्त होंगे। अपनी लौकिक योग्यता तथा आध्यात्मिकता का भी विकास होगा, जो इस जन्म के साथ अगले जन्मों को भी धन्य बनायेगा। 

समूह साधना यज्ञीय कार्यक्रम
इन कार्यक्रमों के लिए अलग से टोलियाँ भेजी जानी हैं। क्षेत्रों की माँग के आधार पर अभी - टोलियों के शृंखलाबद्ध कार्यक्रम बना लिये गये हैं। टोलियों के प्रशिक्षण के बाद उन्हें ब् अक्टूबर से क्षेत्रों में भेजा जाएगा। क्षेत्र की माँग और टोली के लिए सक्षम प्रतिनिधियों की उपलब्धता के अनुसार बाद में और भी टोलियों के कार्यक्रम निर्धारित किए जा सकते हैं। कार्यक्रम की मोटी रूपरेखा इस प्रकार है-

पहले दिन - क्षेत्र की परिस्थितियों और आवश्यकता के अनुसार मंगल कलश यात्रा। उसकी योजना तथा व्यवस्था क्षेत्रीय आयोजकगण अपने-अपने ढंग से बनायेंगे। यदि केन्द्रीय टोली समय से पहुँच सकेगी तो वह भी योगदान देगी। सायंकालीन संगीत-प्रवचन के पहले टोली अवश्य पहुँचेगी तथा मंचीय कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी।

दूसरे दिन - सवेरे समूह साधना का कार्यक्रम चलेगा। स्थानीय परिस्थितियाँ तथा मौसम के अनुसार इसका समय निर्धारित किया जाएगा। हर हालत में इसे प्रातः 8 बजे तक संपन्न करने का ध्यान रखा जाएगा। प्रयास यह किया जाना चाहिए कि समूह साधना में स्थानीय परिजनों के साथ-साथ अन्य श्रद्धालुगण भी भाग लें। सबके लिए उज्ज्वल भविष्य का वातावरण बनाने के लिए समूह साधना का महत्त्व सामूहिक अपीलों के साथ व्यक्तिगत संपर्क से भी समझाया जाना चाहिए। भागीदारों को सबके लिए सद्बुद्धि-सबके लिए उज्ज्वल भविष्य की भावना के साथ अपने-अपने इष्टमंत्र या नाम जप की छूट भी दी जा सकती है।

आसुरी प्रवृत्तियों के कुचक्रों को निरस्त करने के लिए दिव्य भावनासंपन्नों, सज्जनों में सामूहिक पुरुषार्थ करने की प्रवृत्ति और क्षमता बढ़नी ही चाहिए। दैैवीय प्रवृत्ति संपन्न पुरुषार्थियों के समन्वय से असुर वृत्ति विनाशिनी युगदुर्गा का स्वरूप उभरेगा। इसके लिए अपने आयोजन की समूह साधना में भागीदारी के लिए प्रेरणा देने के साथ ही अन्य संगठनों को भी अपने-अपने ढंग से उज्ज्वल भविष्य का आधार बनाने के लिए समूह साधनाओं का क्रम चलाने के लिए उत्साहित किया जाना चाहिए।

सामूहिक साधना के बाद प्रातः 7:30 या -9:00 से 11:00 तक यज्ञ-संस्कारों का क्रम चलाया जाएगा। संकल्पित भागीदारों के अनुसार यज्ञ कुण्डों की संख्या केन्द्र की सहमति से निर्धारित की जा सकती है।
मध्याह्न में - 2:00 या 2:30 से संगठन और आंदोलनपरक गोष्ठियाँ की जायेंगी। उनका स्वरूप केन्द्रीय टोली के सहयोग से क्षेत्रीय परिजनों को निर्धारित कर लेना चाहिए।
सायं को-संगीत प्रवचन का कार्यक्रम चलेगा। इसका समय भी स्थानीय सुविधा के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है।

तीसरे दिन - प्रातः से सायंकाल तक कार्यक्रम दूसरे ही दिन की तरह चलेंगे। दोपहर की गोष्ठियों के विषय पहले से निर्धारित-घोषित कर दिए जायेंगे। तद्नुसार प्रतिभागियों को एकत्रित किया जाएगा। प्रयास यह है कि गोष्ठियों में मंच से प्रेरणा भर देने की अपेक्षा उसे परिचर्चा का रूप दिया जाय। प्रारंभ में 15 से 20मिनट में अपना उद्देश्य समझाकर प्रतिभागियों से उनकी प्रगति और योजना की रिपोर्ट ली जाय। रिपोर्ट के आधार पर उन्हें मार्गदर्शन देने का क्रम चलाते रहा जाय।
तीसरे दिन शाम को उत्साह जाग्रत करके दीपयज्ञ के माध्यम से जन-जन को सुनिश्चित संकल्प दिलाये जायेंगे। लिए गये संकल्पों को निर्धारित समय में मूर्तरूप देने के लिए क्षेत्र के प्राणवान परिजनों द्वारा अनुयाज क्रम चलाने की व्यवस्था भी बनायी जानी उचित और आवश्यक है। 

चौथे दिन - कुण्डीय यज्ञ की पूर्णाहुति होगी। उसके बाद समय की मर्यादा देखते हुए टोली के सदस्य सफल अनुयाज का स्वरूप देने के लिए परिजनों औैर प्रभावशाली व्यक्तियों से चर्चा भी करेंगे। उसके बाद अगले कार्यक्रम के लिए प्रस्थान किया जायेगा।

जनप्रेरक टोलियाँ
नये क्षेत्रों में जहाँ अभी युग निर्माण आन्दोलन की गतिविधियाँ प्रारंभ नहीं हुई हैं, वहाँ यह टोलियाँ भेजी जायेंगी। यह टोलियाँ वहाँ के पूर्व परिचितों के सहयोग से अथवा स्वयं भावनाशीलों से संपर्क करके वहाँ प्रचार-प्रसार के कार्यक्रमों को चलायेंगी। उनमें प्रभात फेरी, जनजागरण रैली, परिचर्चा गोष्ठियाँ छोटी सभाएँ, दीपयज्ञ आदि के द्वारा मिशन का संदेश देंगी। जिनमें उत्साह दिखेगा उन्हें संगठित करके साधना मंडलों का गठन करेंगी। क्रमशः उनके प्रशिक्षण और विकास की व्यवस्था बनाकर वहाँ साधना, स्वाध्याय, संयम और सेवा कार्यों को प्रभावपूर्ण स्वरूप देने की तप साधना करेंगी। 

ऊर्जा का सुनियोजन
हमारे यज्ञायोजनों के प्रभाव से संपर्क क्षेत्र के भावनाशीलों में बहुत ऊर्जा-उत्साह का संचार होता है। लेकिन उनके सुनियोजन का तंत्र न बन पाने से वह वहीं का वहीं शान्त हो जाता है। मिशन औैर क्षेत्र को उत्पन्न ऊर्जा का लाभ ठीक से मिल नहीं पाता। श्रम की सार्थकता घट जाती है।

अब इस भूल को ठीक करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। उत्पन्न ऊर्जा के सुनियोजन की कुशलता हम प्राप्त कर लें तो हमारा यश, गौैरव भी बढ़े तथा युगऋषि भी तुष्ट होकर अपने बहुमूल्य अनुग्रहों की वर्षा करने लगें।   








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P.D.Bhatt
2014-10-17 13:23:33
प्रशंसनीय , वन्दनीय एवं अनुकरणीय
Geeta sinha
2014-10-01 21:00:08
bahut khub
RAMPAL TIWARI
2014-09-22 13:33:42
ssdhu wad