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आदिवासी बाहुल्य वलसाड जिले मे शांतिकुंज दवारा आदर्श ग्राम का संकल्प

१ जनवरी से १५० गावो मे  ग्राम तीर्थ यात्रा 
   गुजरात के अंतिम  जिले मे १ जनवरी से १३ जनवरी तक १५० गावो  मे आदर्श ग्राम  रथ यात्रा का आयोजन शांतिकुंज दवारा हुआ।  इस  माध्यम से जिले मे स्वावलंबन को प्रोत्साहित किया गया।  गौ, गंगा, गीता और  ग्राम भारतीय संस्कृति के चार आधारभूत स्तंभ हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में गायत्री परिवार प्राण प्रण से जुटा हुआ है। भारत स्वतंत्र होने पर गाँवों को महत्त्व देने पर चर्चाएँ तो होती रहीं, किंतु उस दिशा में आवश्यकता के अनुकूल कार्य नहीं किए जा सके। जीवन की आधारभूत सुविधाएँ ७० प्रतिशत गाँववासियों तक पहुँचाने से अधिक जोर ३० प्रतिशत नगरवासियों को उपलब्ध कराने पर ही दिया जाता रहा। योजनाएँ बनीं भी, चली भी, लेकिन उन पर समुचित ध्यान न दिये जाने के कारण उनके वांछित परिणाम सामने नहीं आ सके। युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव ने मालवीय जी तथा गाँधी जी के विचारों को महत्त्व देते हुए अपने अभियान को नगरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में गति देने की व्यवस्था बनायी। उन्हीं के निर्देशों का अनुसरण करते हुए अपने संगठन नेजिले में कम से कम एक आदर्श ग्राम विकसित करने का लक्ष्य रखकर अपनी गतिविधियाँ चलायीं, जो क्रमशः गति पकड़ रही हैं।
 अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में यहाँ १३ दिवसीय ग्राम तीर्थ यात्रा चल रही हे। १५० से अधिक ग्रामो यह यात्रा पूर्ण  चुकी है। यह यात्रा आदिवासी  बाहुल्य वलसाड एवं  दादरा नगर हवेली ,दमण मे जनजागरण  के उद्देश्य  चलाई जा रही है।

सहयोग की अनुठी पहल :मिशन के परिजनों ने ग्राम तीर्थ यात्रा की अनुठी पहल  प्रारभ की। शांतिकुंज के युवा प्रकोश्ठ के मार्गदर्सन मे तीन चराणो  मे हुवे इस आयोजन का १ चरण शांतिकुंज के निवासी व् वलसाड के मूल निवासी कीर्तन देसाई जी ने मार्च २०१४   जिल्ला संगढन की गोष्ठी कर आयोजन  रूपरेखा बनाई। इस आयोजन मे भोपाल के सुरज सिह परमार,व् उज्जैन के सूरज उपाध्याय जी ने 2  चरण मे दो माह पूर्व सर्व टोली के माद्यम से तथा भोपाल के श्याम किशोर ,कमलेश उज्जैन के नंदकिशोर पाटीदार ,ओम  ढाकुर ,शाजापुर के धनश्याम जी ,गुरुबक्श जी ने 3  फ़ैज़ मे रथ यात्रा के साथ दिया समयदान। रथ के सारथी का समयदान भी विभिन चरणो मे हुवे। जिल्ला संगढन का हर परिजनों  का सहयोग रहा किन्तु  नीरज भाई ,मगन भाई ,छोटू  भाई, छना भाई ,उर्मिल भाई ,गिरीश भाई ,महेद्र भाई ,दौलत भाई ,राजू भाई  पटेल ,कोकी बहन , भारती बहन आदि  परिजनों ने 13 दिन सतत समयदान किया। 

उत्साह जगा ,सक्रियता बढ़ी। 
              पिछले  कुछ  वर्ष  मे परिजनों मे उत्साह  कम  हो गया था। रथ के  आने से नवसारी ,वलसाड जील्ला  ,दादरा नगर हवेली ,दमन  के परिजनों मे सक्रियता बढ़ी।  चिखली ,खरग्राम ,आचवनि ,धरमपुर ,सलवासा आदि आदिवासी  बाहुल्य ग्रामो मे रथ के पास स्वतः  आकर लोग जुटे। 

 दो जिले  व् २ केंद्र शासित प्रदेशो के १५० ग्रामो के 50000 से अधिक लोगो तक पोहची आवाज़. 
           नवसारी ,वलसाड जील्ला  ,दादरा नगर हवेली ,दमन के १५० ग्रामो मे यग ऋषि की ग्राम तीर्थ  की योजना  पोह्ची। प्रतिदिन  १२ से २४  ग्रामो तक रथ पोहचता। जिले के परिजनों का काफला आगे -आगे चलता।रथ के साथ आदर्स ग्राम की योजना बताई जाती। कोई बड़ा आयोजन नहीं सीधा संवाद।  ग्राम स्वछता ,जैविक खेती ,स्वावलंबन व् व्यसन मुक्ति के संकल्प दिलाई  जाते।स्कूलों मे विचार दिये जा रहे हे। 






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