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होली पर अश्लीलता उन्मूलन हेतु प्रचण्ड आन्दोलन चलाया जाय

नर- नारी की पवित्रता और समाज की गरिमा के लिए घातक है अश्लीलता

युवा क्रान्ति वर्ष के अन्तर्गत जवानी को जगाने उसे समाजोत्कर्ष की दिशा में संकल्पपूर्वक नियोजित करने के विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। उसी क्रम में विभिन्न पर्वों पर अनेक सुधारात्मक एवं रचनात्मक आन्दोलनों को गति देने का निर्धारण भी किया गया है। उस शृंखला में पहला आन्दोलन अश्लीलता उन्मूलन को होली पर्व पर व्यापक रूप दिया जाता है। उसी संदर्भ में यह आलेख प्रस्तुत किया जा रहा है। परिजन निर्धारित रीति- नीति के अनुसार उसे विभिन्न क्षेत्रों में गतिशील बनायें, ऐसी आशा अपेक्षा की गयी है।

यह कुचक्र तोड़ना ही होगा 
 
अश्लीलता की प्रवृत्ति आदि को एक भयानक विषबेल की तरह अपना प्रभाव दिखा रही है। एक पतली सी बेल जिसमें वृक्षों, पौधों की तरह अपने बूते खड़े होने की क्षमता भी नहीं है, भूमि पर फैलती हुई इतने विषैले फल पैदा कर देती है जो समाज के एक बड़े वर्ग के लिए संकट पैदा कर देते हैं। वर्तमान समय में सभ्य समाज को कलंकित करने वाले ढेरों दुष्कृत्य अश्लीलता की विषबेल से ही उपज रहे हैं। विचार करने पर स्पष्ट होने लगता है कि यह दुष्प्रवृत्ति कितने अनर्थ कर रही है। 

पुरुष के पुरुषार्थ को पंगु बनाना पुरुष को उसके पौरुष, पराक्रम के कारण पहचाना जाता है। अश्लीलता की प्रवृत्ति पौरुष को पंगु- लंगड़ा अप्रभावी बनाती जा रही है। अश्लील चिन्तन तथा उसके कारण उभरने वाली कुचेष्टायें जैसे मनुष्य की मनुष्यता का गला घोंटे दे रही हैं। शारीरिक और मानसिक शक्तियों का इतना क्षरण हो रहा है कि किसी आदर्श को अपनाने और उसके लिए पुरुषार्थ करने की हिम्मत ही नहीं होती। जो पुरुषार्थ समाज को दिशा देने, उसकी गरिमा बढ़ाने में लगना चाहिए था, वह कामना वासना के छिद्रों से बहकर नष्ट हो रहा है।

नारी का नारकीय उत्पीड़न : जिस नारी को पुरुष की पूरक प्रकृति, देवी के रूप में पूजा जाता रहा है, उसे भोग्या मानकर मनमाने अनगढ़ ढंग से उसका उपभोग करने की हीन प्रवृत्ति इसी अश्लील चिन्तन की उपज है। इसी प्रवृत्ति से उभरे पागलपन ने नारी को नारकीय उत्पीड़न झेलने के लिए बाध्य कर दिया है। उसके माता- बहन, पुत्री, गृहलक्ष्मी जैसे पवित्र और सम्मान जनक स्वरूपों की उपेक्षा इसी दुष्ट प्रवृत्ति ने कराई है।

परिवार और समाज की गरिमा पर चोट : इस राक्षसी प्रवृत्ति ने शिष्ट परिवारों और सभ्य समाज की गरिमा को ध्वस्त कर देने का कुचक्र भी रच दिया है। अश्लीलता से प्रेरित दुष्कर्मों के कारण समाज को बार- बार शर्मिंदा होना पड़ता है।

अजीब सी स्थिति पैदा हो गयी है। अधिकांश समाज इस से त्रस्त है, दुखी है। थोड़ी से भटकी हुई प्रतिभाओं ने वातावरण में अश्लीलता फैला दी है। उसके कारण अधकचरे मन- मस्तिष्क उस हवा में चाहे- अनचाहे बह रहे हैं। अश्लीलता की विषबेल को नष्ट किए बिना समाज के विकास के लिए स्वस्थ वातावरण बनाना असंभव ही है। इसलिए सद्भावसम्पन्न, लोकहितैषी ऊर्जावान व्यक्तियों को एकजुट होकर अश्लीलता उन्मूलन आन्दोलन को गतिशील बनाना होगा। यह पूतना नयी पीढ़ी के बच्चों को पयपान कराने- सुख देने के बहाने विषपान कराकर नष्ट कर रही है। इसका वध तो करना ही होगा। यह होलिका प्यार से अपनी गोद में बिठाकर प्रह्लादों को कामाग्रि में भस्म करने का कुचक्र रच रही है। यह कुचक्र तो यथाशीघ्र तोड़ना ही होगा।

मर्म पर प्रहार किया जाय
जन आन्दोलनों की सफलता के लिए उन्हें सुगम किन्तु प्रभावी सूत्रों से जोड़ना होता है। अंग्रेज भारत में व्यापारी बनकर आये थे और शासक बनकर बैठ गये थे। उनकी दुरभिसंधियों को प्रबुद्ध जन तो समझ रहे थे, किन्तु आम जनता उनसे अनभिज्ञ थी। जन- जन को शामिल किए बिना ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो (क्विट इंण्डिया)’ अभियान सफल नहीं हो सकता था। इसलिए महात्मा गाँधी जी ने खादी आन्दोलन तथा नमक सत्याग्रह जैसे सुगम कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को उससे जोड़ दिया। खादी से आर्थिक स्वावलम्बन का आत्मविश्वास जगाने तथा नमक सत्याग्रह से ब्रिटिश सरकार की सत्ता को चुनौती देने के सफल प्रयोग किये गये थे।

अश्लीलता के घातक दर्शन को भले ही जनमानस न समझे, किन्तु अश्लील चित्रों, पोस्टरों और साहित्य के कुप्रभाव को सभी आसानी से समझ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि प्रबुद्ध वर्ग उसके लिए गम्भीर प्रयास करे और जन- जन को अश्लील साहित्य, चित्र, विज्ञापन आदि के बहिष्कार करने और उनकी होली जलाने के सुगम, लेकिन व्यापक अभियान से जोड़ा जाय।

संत विनोबा भावे ने भूदान आन्दोलन के दौरान अश्लीलता निवारण के लिए यही कार्यक्रम चलाने की प्रेरणा जन- जन को दी थी। उन्होंने कहा था कि अश्लील चित्र, पोस्टर, विज्ञापन आदि के द्वारा नयी पीढ़ी को अश्लीलता का मुफ्त, लेकिन अनिवार्य शिक्षण (फ्री एण्ड कम्पलसरी एजुकेशन) दिया जा रहा है। इससे भी अधिक इसे उन्होंने मानवीय मस्तिष्क पर लगाया गया अनचाहा टैक्स (अनवॉण्टेड टैक्स ऑन ह्यूमन ब्रेन) बताया था। उनका यह कथन एकदम सही है। इसका प्रतिकार किया ही जाना चाहिए।

युवा क्रान्ति वर्ष के अन्तर्गत अश्लीलता उन्मूलन को पहला व्यापक आन्दोलन बनाया जा रहा है। युवा जोश को अश्लीलता की अनगढ़ता से बचाकर शालीनता की, सृजन की दिशा में लगाया जाना जरूरी है। समाज की ऊर्जा को कुयोग से बचाकर सुयोग में लगाने को अभियान का एक महत्त्वपूर्ण चरण मानकर इसे व्यापक रूप दिया ही जाना चाहिए।

शुभारंभ होली से
होली पर्व इस शुभारंभ के लिए सर्वथा उपयुक्त है। प्रहलाद नयी पीढ़ी के आह्लाद- उमंग का प्रतीक है, जिसे अश्लीलता की होलिका अपनी गोद में बिठाकर कामाग्रि में भस्म कर देना चाहती है। प्रहलाद को प्रभुपरायण आदर्शनिष्ठ बना दिया जाय तो होलिका का कुचक्र टूट जायेगा और वह अपनी ही चाल का शिकार हो जायेगा। युग निर्माण परिवार द्वारा मनुष्य में देवत्व जगाने का जो सफल प्रयास चल रहा है, वह नयी पीढ़ी के प्रह्लाद को ईश्वरनिष्ठ बनाने का ही प्रयोग है। प्रभु निष्ठा से जुड़ी नयी पीढ़ी अपनी ऊर्जा को प्रभु कार्यों में, आदर्श प्रयोजनों में लगायेगी, तो उसका बाल भी बाँका नहीं होगा और कुचक्री अपनी मौत मरेंगे।
अंग्रेजी में कहावत है कि ‘वैल बिगन इज हाफ डन’ अर्थात् अच्छा प्रारंभ आधी सफलता के बराबर होता है। इसलिए होलिका पर्व के पहले से ही इस अभियान के पक्ष में वातावरण बनाना शुरु कर देना चाहिए।

प्रखर प्रयाज क्रम चलें
इस वर्ष होली पर अश्लीलता की दुष्प्रवृत्ति का दहन करना है, इस बात को खूब फैलाया जाय। इसके लिए कई तरह के प्रयोग प्रयास किये जा सकते हैं। 
जैसे -
एक पत्रक छपवाकर तैयार किया जाय, ‘अश्लीलता- होलिका को जलायें, नई पीढ़ी के प्रह्लाद को बचायें’। इस आलेख के प्रारंभ में दिये गये विचारों के आधार पर पत्रक का मैटर तैयार कर लिया जाय। उसके आधार पर जन- जन से सहयोग माँगा जाय।
 
जन सम्पर्क, नुक्कड़ नाटकों, विद्यालयों में उद्बोधनों, जनसभाओं के माध्यम से विचारशीलों- भावनाशीलों को उभारा जाय। अश्लील साहित्य, चित्र, पोस्टर, आदि का बहिष्कार करने के संकल्प कराये जाये। उन्हें एकत्रित किया जाय। 
 
सोशल मीडिया के माध्यम से अश्लीलता फैलाने के कुचक्र को रोका जाय। उसके लिए किशोरों- युवाओं को प्रेरित किया जाय और उस कुचक्र से बचने- बचाने के संकल्प कराये जाये।
होली पर अश्लील गीतों के स्थान पर उत्साह भरे प्रेरक गीतों के उपयोग के लिए प्रेरणा दी जाय।
होलिका दहन (२२ मार्च) के दिन इस संदर्भ में विशेष आयोजन करने की रूपरेखा तैयार कर ली जाय। गाँव में या मोहल्ले- मोहल्ले अश्लीलता की होली जलाने की, होली के उल्लास को सही दिशा देने की तैयार की जाय।

पर्व प्रकरण
होली पर्व के पहले से किए गये प्रचार और तैयारी के आधार पर हर गाँव, मोहल्ले मे विशेष समारोह किए जा सकते हैं। 

*उस दिन विशेष रैलियाँ निकाली जायें और अश्लीलता दहन के लिए सामग्री एकत्रित की जाये। जैसे अर्थी सजाई जाती है वैसे अश्लील साहित्य की अर्थी बनाकर भी रैली निकाली जा सकती है। होली के समय उन्हें घोषणापूर्वक जलाया जा सकता है। 
 
* जहाँ संभव हो, वहाँ गाँव, मोहल्लों में होली दहन के पूर्व कर्मकाण्ड भास्कर के अनुसार पर्व पूजन का क्रम चलाया जाय। मंच पर किन्हीं सम्मानित प्रतिनिधियों को बिठाकर पर्व पूजन का संक्षिप्त क्रम चलायें। 
 
* पूजन के बाद मंच पर मंत्रों के साथ यज्ञाग्नि या दीपक प्रज्वलित करें। अश्लील साहित्य चित्रादि के साथ समारोहपूर्वक रची होली के पास उसे ले जाया जाय। होलिका में अग्नि प्रवेश कराकर उसमें राक्षसी होलिका की प्रतीक अश्लील सामग्री को उसमें झोंक दिया जाय। प्रेरक जयकारों व होली के प्रेरक गीतों से माहौल को प्रभावशाली बनाया जाय। 
 
घूलि वन्दन, होली खेलने वाले दिन शाम को होली मिलन समारोह रखा जाय। उसमें अश्लीलता का बहिष्कार करने वालों के तिलक लगाकर सम्मानित किया जा सकता है। इसी के साथ अश्लीलता को न पनपने देने के लिए भाइयों- बहनों की सत्याग्रही टोलियाँ भी गठित की जा सकती है।

अनुयाज क्रम
होली पर्व पर श्रेष्ठ शुभारंभ करके अश्लीलता विरोधी लहर को जीवंत बनाये रखने के लिए अनुयाज प्रक्रिया भी चलाने की जरूरत है। समाज की हवा बदलने के लिए निरंतर जीवंत प्रयास करने पड़ते हैं। अनेक आन्दोलन समूहों की तरह अश्लीलता निवारण समूह भी सक्रिय करने होंगे। 
 
होली पर्व पर जो वातावरण बने, उसका भरपूर सदुपयोग करने की योजना प्रबुद्ध परिजन बनायें। इसके लिए अश्लीलता के वातावरण से होने वाले भयंकर दुष्परिणामों की ओर समाज के मूर्धन्यों और नयी पीढ़ी का ध्यान आकर्षित करने का व्यवस्थित क्रम चलाया जाय। नीचे लिखे अनुसार कुछ प्रयोग किए कराये जा सकते हैं। 
 
इस सन्दर्भ में विशेष प्रवचन, पॉवर पाइंट, स्लाइड शो, प्रदर्शनी आदि तैयार किए कराये जाये। शिक्षण संस्थानों में उनके द्वारा जागरूकता लाने के नियमित प्रयास किए जाये।
विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के सूत्रधारों को प्रेषित करके उन्हें भी इस अभियान को अपने ढंग से आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया जाय। कई संगठन मिल- जुलकर व्यापक कार्यक्रम भी बना सकते हैं। 

विश्वास रखा जाय कि जब थोड़े से भ्रमित- स्वार्थी लोग मिल- जुलकर अश्लीलता का घातक वातावरण बना सकते हैं, तो परमार्थ वृत्ति से प्रेरित व्यक्ति मिल- जुलकर कर वातावरण शुद्ध भी कर सकते हैं।   






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S R Bhavarkar
2016-03-19 23:25:24
vary nice
ललित नारायण शर्मा
2016-03-11 15:50:13
अश्लीलता उन्मूलन अभियान में क्या किया जा सकता है कृपया मार्गदर्शन करें ।
Jitendra Yadav
2016-03-11 09:37:52
Sir
Uma Sharma
2016-03-10 21:31:40
बहुत बढ़िया.इसीका पत्रक बनाकर स्कुल कॉलेज में एक पत्र के साथ देंगे तथा सहकार्य करने का निवेदन करेंगे।
Ashok Nag
2016-03-10 21:10:48
PDF format me is lekh download karane ka process kya hai
Rameshwar lal
2016-03-10 20:21:28
Very nice for all Indian s I m also follow rules
Dr SK Singh
2016-03-09 21:36:25
A great step. Sincerely wish it to succeed and it has to succeed for the future of our society.


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