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इंटर्नशिप संभावनाओं को अवसर में बदलने का सुअवसर

[देसंविवि ], Jan 03, 2017
देसंविवि के ३६० विद्यार्थी देश के २७ राज्यों में परिव्रज्या के लिए रवाना

हरिद्वार, ३ जनवरी।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए वर्ष के प्रथम मंगलवार एक नया संदेश लेकर आया, जब वे विवि में अर्जित शिक्षा एवं विद्या का लाभ समाज में बाँटने के निर्देश के साथ रवाना हुए।

विद्यार्थियों को विदाई संदेश देते हुए विवि के अभिभावक व कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि इंटर्नशिप संभावनाओं को अवसर में बदलने का सुनहरा समय है। परिव्राजक धर्म का आदर्श प्रस्तुत करने वाले स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि जब कोई सद्गुरु का संदेशवाहक बनकर निकलता है, तो उसकी शक्तियाँ सौ गुनी हो जाती है। उसका विचार, चरित्र और व्यवहार समाज को प्रभावित करता है। डॉ पण्ड्याजी ने इंटर्नशिप के दौरान किये जाने वाले संभावित कार्यक्रमों एवं जीवनचर्या पर विस्तार से जानकारी दी। परिव्रज्या के दौरान अपने जीवन में घटी घटनाओं का जिक्र करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि अच्छे परिव्राजक को प्रतिकूलताओं के बीच अपना आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए। समय व कार्य की प्रतिबद्धता ही मनुष्य को ऊँचा उठाता है।

प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने कहा कि देवसंस्कृति विवि की अनुठी इंटर्नशिप प्रक्रिया के तहत यहाँ अध्ययनरत विद्यार्थियों को अपना पाठ्यक्रम के दौरान एक निश्चित अवधि के लिए परिव्रज्या करनी होती है। इसके पश्चात ही उन्हें डिग्री दी जाती है। उन्होंने कहा कि युवावर्ग की समस्याओं को युवा ही बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और समझदार, सुलझे हुए युवा ही सर्वश्रेष्ठ समाधान सुझा सकते हैं।

विवि के इंटर्नशिप विभाग से मिली जानकारी के अनुसार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के बीए, बीएससी, बीसीए, एमए, एमएससी, बीएड के अंतिम वर्ष तथा डिप्लोमा, सर्टीफिकेट कोर्स के कुल ३६० छात्र-छात्राएँ एक महीने तक निःशुल्क योग शिविर, शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिभा परिष्कार कार्यशाला सहित विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों का संचालन करेंगे। ११८ टोलियों में बंटे ये युवा महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मप्र, उप्र, सिक्किम, पं बंगाल, बिहार, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, केरल, राजस्थान सहित देश के २७ राज्यों के विभिन्न शहरों में भारतीय संस्कृति की अलख जगायेंगे। इनके कार्यक्रमों में भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे युवाओं को व्यक्तिगत संकीर्णता से ऊपर उठकर समाज व राष्ट्र के लिए अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करना अहम होगा।







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