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भारतीय संस्कृति से प्रभावित हुए कॉमनवेल्थ देशों के अध्यक्ष एवं जार्डन के प्रिंस मो. बिन गाजी

डॉ चिन्मय पंड्याजी ने अपने यूरोप प्रवास के दौरान किया भारत का प्रतिनिधित्व

हरिद्वार १३ फरवरी।

ब्रिटिश विदेश मंत्रालय एवं कॉमनवेल्थ ऑफिस की ओर से आयोजित एसोसिएशन ऑफ कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटीज के अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन च्रोल ऑफ़ फेथ बेस्ड यूनिवर्सिटीज़ इन प्रमोटिंग रिस्पेक्टज् की अध्यक्षता भारत ने की। सम्मलेन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देसविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पंड्याजी ने अपने विचार प्रस्तुत किये। इस सम्मलेन में देश विदेश के चुने हुये २० प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर डॉ पंड्याजी ने कहा की वर्तमान समय विश्व के लिए अत्यंत विषम है। जहाँ आपसी तनाव व टकराव बढ़ रहा है, सहिष्णुता मिट रही है, सद्भाव मिट रहा है। ऐसे में भारतीय संस्कृति को अपनाने पर हम समाधान की सही कुंजी पा सकते है। वर्तमान विश्व की सभी समस्याओं के समाधान के रूप में उन्होंने भारतीय संस्कृति के वसुधैव कुटुंबकम तथा पंडित श्रीराम शर्मा के मानव मात्र एक सामान के सिद्धांत को प्रमुख बताया। इसके साथ डॉ पंड्या ने भारतीय संस्कृति की ऋषि परम्परा पर आधारित देव संस्कृति विश्वविद्यालय के स्वरुप को सभी के समक्ष रखा। देसंविवि के पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों को स्वावलंबी बनाने वाले शिक्षण तथा देसंविवि के आधुनिक शिक्षा के साथ व्यवहारिक जीवन मूल्यों के अद्भुत समन्वय से सभी काफी प्रभावित हुए।

डॉ. पंड्याजी के इस यूरोप प्रवास के दौरान चेक रिपब्लिक के संत चार्ल्स यूनिवर्सिटी, मासार्यक यूनिवर्सिटी के साथ महत्वपूर्ण विषयों को लेकर शैक्षणिक समझौते पर हस्ताक्षर भी हुए। इसके तहत विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के विकास हेतु चलाये जा रहे कार्यक्रमों का आदान प्रदान किया जायेगा।

इस सम्मेलन में मिडिल ईस्ट देश जॉर्डन के प्रिंस मो. बिन गाज़ी ने गायत्री परिवार एवं देसंविवि की प्रशंसा की। उन्होंने डॉ चिन्मय पंड्याजी के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए निकट भविष्य में देसंविवि एवं शांतिकुंज आने का वादा भी किया। कॉमनवेल्थ देशों की नई प्रमुख बैरोनेस स्कॉटलैंड ने भी देसंविवि की विचारधारा से जुड़ने के लिए स्वयं भारत आने का वादा किया।

डॉ चिन्मय पंड्याजी ने वर्तमान वैश्विक संकट के समाधान में कॉमनवेल्थ देशो के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे समय में कॉमनवेल्थ के प्रयास सराहनीय है। विभिन्न मतों के लोगो को एक मंच पर लाना एवं उन्हें जन समूह के हित के लिए सोचने हेतु प्रेरित करना निश्चय ही महत्वपूर्ण कदम है।






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