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देसंविवि के उत्सव- १७ के दूसरे दिन हुईं कई प्रतियोगिताएँ

[हरिद्वार ], Mar 10, 2017
कबड्डी में बीएससी की टीम विजयी, उत्सव में पहली बार शामिल हुआ हेमर थ्रो

हरिद्वार १० मार्च।
देवसंस्कृति विवि में चल रहे तीन दिवसीय उत्सव- २०१७ के दूसरे दिन कई शारीरिक व बौद्धिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। इसमें कबड्डी, बालीबाल में शानदार खेल का माजरा दिखाई दिया।

खेल अधिकारी श्री नरेन्द्र सिंह ने बताया कि देसंविवि युवाओं में वैचारिक क्रांति लाने के लिए प्रख्यात है। यहाँ पाठ्यक्रम के साथ- साथ विभिन्न कार्यक्रमों में युवाओं को सकारात्मक प्रेरणाएँ देने वाली गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। उत्सव- २०१७ में भी यह क्रम जारी रहा। कबड्डी में (छात्र वर्ग) में बीएससी व एमए- एमएससी की टीम के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दी। अंतिम समय में बीएससी की टीम ४९- ३७ पाइंट से विजयी हुई। बॉलीबाल (छात्रा वर्ग) में मास्टर्स की टीम ने बैचलर्स की टीम को ०- २ से हरायी। बॉस्केट बॉल के छात्र वर्ग में बीएससी की टीम ने मास्टर्स की टीम को ३१- ९ से हराया। बॉलीबाल के छात्रा वर्ग में बीएससी- ए की टीम ने बीसीए की टीम को मात दी।

एथलेटिक्स प्रतिस्पर्धा के प्रभारी श्री विक्रांत वाधवा ने बताया कि वार्षिकोत्सव में पहली बार हेमर थ्रो को शामिल किया गया। इसमें बीएससी के शिखर साहू ने २३.१५ मीटर फेंककर पहला स्थान प्राप्त किया तथा भोला महतो १३.८ मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहे। जेवलीन थ्रो में हिमांशु को प्रथम तथा रतनसिंह को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। गोला फेंक में हिमांशु भट्ट को प्रथम व रतनसिंह चौहान को द्वितीय स्थान मिला। १५०० मीटर दौड़ में दीपक शर्मा ने आशुतोष को हराकर प्रथम रहे। रिले रेस में एमएससी की टीम ने बीएसए की टीम को पछाड़कर पहला स्थान प्राप्त किया।

सांस्कृतिक प्रतियोगिता के प्रभारी डॉ. शिवनारायण प्रसाद ने बताया कि खेलों के साथ- साथ बौद्धिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। इसमें शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत, ढपली वादन, नृत्य, क्वीज सहित विभिन्न प्रतियोगिताओंं में विद्यार्थियों ने अपनी कलाओं का प्रदर्शन किया। संगीत में लोकरंजन से लोकशिक्षण पर आधारित प्रज्ञा युगसंगीत में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा दिखाई दी। तो वहीं चित्रकला में विद्यार्थियों ने युथ डिजीटल इंडिया को सुंदर तरीके से उकेरा। स्वरचित कविताओं में छात्र- छात्राओं ने समाज की कुरीतियों पर ध्यानाकर्षित करते हुए सभ्य एवं सुसंस्कृत समाज निर्माण की मार्मिक अपील था। सेवाभावी युवा- स्वावलंबी युवा तथा सम्पन्न राष्ट्र पर आधारित मूक अभिनव ने उपस्थित जनसमुदाय की खूब तालियाँ बटोरीं।







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