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गुजरात प्रांत के ५५० से अधिक शिक्षकों के शिक्षक गरिमा शिविर का शुभारंभ

[Shantikunj],
भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति : डॉ. पण्ड्याजी
हरिद्वार १६ मई।

अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है। भारतीय संस्कृति मानव जीवन के विकास को उच्च स्तर पर ले जाने की कला सिखाती है।

डॉ. पण्ड्याजी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृति के पाठ पढ़ाने वाले गुजरात प्रांत से आये शिक्षकों के शिक्षक गरिमा शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य की शिक्षण प्रक्रिया जन्म से पूर्व अर्थात माँ के गर्भ से प्रारंभ हो जाती है। इसलिए यहीं से संस्कृति का पाठ पढ़ाना प्रारंभ कर देना चाहिए। गायत्री परिवार ने इन दिनों गर्भोत्सव के माध्यम देश भर में एक विशेष अभियान चलाया है, इसके द्वारा भावी माताओं को विशेष संस्कार के माध्यम से प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।

संस्कृति व सभ्यता का अंतर स्पष्ट करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि संस्कृति हमारी संवेदना को जगाती है, अध्यात्म की ओर ले जाती है, हमारी पात्रता को विकसित करती है और जीवन को उच्च स्तर पर ले जाने सहायक होती है। संस्कृति हमें दूसरों की पीड़ा को समझने का बोध कराती है और उनकी सहायता करना सिखाती है। जबकि सभ्यता केवल भौतिक वैभव अर्जित करना सिखाती है। शिक्षा व विद्या पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा जहाँ सभ्यता के विकास एवं व्यावहारिक ज्ञान के संर्वधन के लिए आवश्यक है, वहीं विद्या अपने जीवन के उद्देश्यों को समझने, अनगढ़ता को सुगढ़ता में बदलने और जीवन जीने की कला के शिक्षण में रूप में जरूरी है। ईशोपनिषद का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्या और अविद्या की भी विस्तार से जानकारी दी।

शिक्षकों का आवाहन करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि इस समय संस्कृति को बचाये रखने में शिक्षकों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। आधुनिक संसाधनों का उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की ओर प्रेरित करते रहना चाहिए। डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि शिक्षा, साधना, स्वास्थ्य, पर्यावरण, स्वच्छता, कुरीति- नशा उन्मूलन, स्वावलंबन एवं नारी जागरण जैसे आन्दोलनों में विद्यार्थियों की भागीदारी से उनमें सेवा एवं सहयोग की प्रवृत्ति बढ़ेगी।

इससे पूर्व डॉ. बृजमोहन गौड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी परम उदारता है। भारतीय संस्कृति व्यक्ति को व्यक्तित्व देती है और उसे महान् कार्यों के लिए प्रोत्साहित करती है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ के श्री प्रदीप दीक्षित ने बताया कि इस शिविर में अहमदाबाद, बड़ौदा, बलसाड़, राजकोट, बनासकांठा, पंचमहल, कच्छ, गांधीनगर, आणंद, सूरत, भुज, अमेरली सहित गुजरात प्रांत के सभी जिलों के ५५० से अधिक शिक्षक- शिक्षिकाएँ शामिल हैं। इस अवसर पर डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. पीडी गुप्ता सहित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से जुड़े अनेक कार्यकर्त्ता एवं प्रशिक्षणार्थी शामिल रहे।






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