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वागड़ क्षेत्र के वनवासियों में देवत्व का उभार, बदल रहे हैं उनके संस्कार और विचार

[Dungarpur, Rajasthan], Jul 17, 2017
देव संस्कृति पुष्टिकरण, लोक आराधन, ग्राम वंदन, १५१ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, सागवाड़ा 

सागवाड़ा, डुंगरपुर। राजस्थान 
यह कार्यक्रम गायत्री शक्तिपीठ के वार्षिकोत्सव पर आयोजित हुआ। आसपास के कई जिलों के कर्मठ कार्यकर्त्ता एवं कई गाँवों के ६ से ८ हजार श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। इसे सम्पन्न कराने शांतिकुंज से सर्वश्री दिनेश पटेल, विष्णु पण्ड्या, रामावतार पाटीदार, संजय सिंह ठाकुर, दिलथिर यादव की टोली पहुँची थी। 

१२ जून को २५०० बहिनों ने मस्तक पर कलश धारण कर शानदार शोभायात्रा निकाली। दीपयज्ञ के अवसर पर डॉ. चिन्मय जी ने युवाओं को वीरभूमि की गरिमा के अनुरूप आदर्श जीवन जीने और समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। 

सर्वश्री भूपेन्द्र पण्ड्या, कमलेश राव, भूपेन्द्र पुरोहित, घनश्याम पालीवाल, विवेक चौधरी, विकास शेवाल, डॉ. विवेक विजय आदि का कार्यक्रम की सफलता में मुख्य योगदान रहा। 

वनवासी बहुल वागड़ क्षेत्र- डुंगरपुर, बाँसवाड़ा जिले में गायत्री परिवार के समर्पित कार्यकर्त्ताओं ने अपने अथक प्रयासों से वहाँ के लाखों लोगों के संस्कार और विचार बदलने का भागीरथी पुरुषार्थ किया है। उन्हें नैष्ठिक गायत्री उपासक बनाते हुए नशा- मांसाहार और वनवासियों में प्रचलित तरह- तरह की मूढ़ परम्पराओं, अंधविश्वासों से निकाला है। वनवासी बदल रहे हैं, परम पूज्य गुरुदेव के विचारों से प्रेरित होकर नवसृजन अभियान में जुट गये हैं। विचार क्रांति के ऐसे ही विशिष्ट प्रयोग के अंतर्गत १२ से १५ जून २०१७ की तारीखों में सागवाड़ा में देव संस्कृति पुष्टिकरण १५१ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ सम्पन्न हुआ। शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की मुख्य उपस्थिति ने क्षेत्र के लाखों लोगों को राजस्थान के गौरवशाली इतिहास की याद दिलायी, उनके वंशज होने का बोध कराया और उन्हीं की महान परम्पराओं का अनुसरण करने का उत्साह जगाया। 

वागड़ क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियाँ डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने वागड़ क्षेत्र में अपनी विशिष्ट सेवाएँ प्रदान करने वाले तीन महानुभावों को 'वागड़ क्षेत्र की विशिष्ट विभूति' के रूप में सम्मानित किया। सम्मानित होने वाली ये तीन विभूतियाँ हैं- श्री के.के. गुप्ता : अखिल भारतीय अग्रवाल समाज के १८ जिलों के अध्यक्ष एवं डुंगरपुर में पर्यावरण, जल स्वावलम्बन, स्वच्छता, श्रमिक योजना एवं गोसंरक्षण के लिए उल्लेखनीय सेवाएँ प्रदान कीं। 
श्री डायालाल पाटीदार : राजस्थान परिवहन निगम में प्रबंधक पद से सेवा निवृत्त, समाज से अशिक्षा को दूर करने और संस्कार परम्परा को प्रोत्साहित करने के अथक पुरुषार्थ किया। 

श्री अंबालाल शर्मा : गोवंश की रक्षा के लिए आदर्श प्रयास किये, विशाल गोशाला की स्थापना की। गायत्री मंदिर का निर्माण कराया एवं वैदिक पाठशाला का संचालन कर रहे हैं। 

महाकाल की प्राण प्रतिष्ठा डॉ. चिन्मय जी द्वारा दिनांक १५ जून को शक्तिपीठ में महाकाल की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। प्राण प्रतिष्ठा का कर्मकाण्ड श्री दिनेश पटेल ने  सम्पन्न कराया । 

प्रकृति ने ली परीक्षा प्रकृति ने भी कड़ी परीक्षा ली। १२ जून की शाम आये तूफान ने सब कुछ तहस- नहस कर दिया था, लेकिन नैष्ठिक कार्यकर्त्ताओं ने रातोंरातअथक परिश्रम कर यज्ञ पाण्डाल को पहले जैसा ही खड़ा कर दिया था।






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