The News (All World Gayatri Pariwar)
Home Editor's Desk World News Regional News Shantikunj E-Paper Upcoming Activities Articles Contact US

जीवन के दुर्लभ अवसर को सौभाग्य में बदलने से चूकें नहीं -डॉ. चिन्मय जी

[DSVV, Haridwar],
डॉ. चिन्मय जी ने अपने दक्षिण भारत के प्रथम प्रवास में हैदराबाद में वैज्ञानिकों व कार्यकर्त्ताओं से किया आह्वान 

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी  ६ एवं ७ जुलाई को हैदराबाद प्रवास पर थे। इन दो दिनों में चार कार्यक्रमों  को उन्होंने संबोधित किया। शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री उत्तम गायकवाड़ और रामावतार पाटीदार उनके साथ रहे। दक्षिण भारत जोन के प्रभारी डॉ. अश्विनी सुब्बाराव, श्री अनिल सुब्बाराव, श्री एम.वी.एस. राजू इन कार्यक्रमों के प्रमुख समन्वयक थे। 

वैज्ञानिकों से कहा - अपने चिंतन के अनुरूप ढलता जाता है अपना जीवन   
प्रथम कार्यक्रम राजभाषा कार्यान्वयन समिति, नाभिकीय र्इंधन सम्मिश्र (NFL) के सभागार में आयोजित हुआ डॉ. चिन्मय जी ने 'ह्युमन एक्सीलेंस' विषय पर पावर पॉइण्ट के साथ अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन श्रेष्ठ कार्यों के लिए भगवान से मिला अनुपम वरदान है। हर मनुष्य अपने साथ अनंत संभावनाएँ और अवसर लेकर आता है, उन्हें सौभाग्य में या दुर्भाग्य में बदलना उसके अपने चिंतन पर  निर्भर है। जिनमें साहस है, संकल्प है और जो आशावादी हैं वे हर चुनौती का सामना करते हुए हँसता- हँसाता जीवन जीते हैं। 

इस अवसर पर उन्होंने प्रकृति से प्रेम करने और प्रकृति को बचाने का वैज्ञानिकों से आह्वान किया। 
  डॉ. चिन्मय जी के साथ श्री जी.कल्याणकृष्णन- प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एनएफएल के चेअरमेन एवं चीफ एक्ज़ीक्यूटिव, श्री ए.एन. वर्मा, हैवी वॉटर  के चेअरमेन एवं चीफ एक्ज़ीक्यूटिव, डॉ. आर.पी. आचार्य, चीफ एक्ज़ीक्यूटिव, डॉ. दिनेश श्रीवास्तव, चीफ एक्ज़ीक्यूटिव, सहित २५० वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक इस सभा में उपस्थित थे। शांतिकुंज प्रतिनिधि ने श्री जी.कल्याणकृष्णन जी को परम पूज्य गुरुदेव का साहित्य भेंट कर सम्मानित किया एवं सभी वैज्ञानिकों को शांतिकुंज आने का आमंत्रण दिया।   
'युग वेदव्यास' भवन का शिलान्यास 

६ जुलाई को ही डॉ. चिन्मय जी ने गायत्री ज्ञान मंदिर, स्वर्ण नगर, बोइनपल्ली में नये भवन का शिलान्यास शिलापट्ट का अनावरण कर किया। उन्होंने कहा कि भटके हुए व्यक्ति को सद्बुद्धि प्रदान करना उसकी सबसे अच्छी सेवा है। व्यक्ति के विचार बदल जायेंगे तो उसका जीवन भी बदल जायेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें दिलों का अमीर बनना होगा, राजा बनना होगा, अपनी साधना से- सद्विचारों से। 

आसपास के अनेक जिलों में जनसंपर्क, यज्ञ, दीपयज्ञ से विचार क्रांति का एक सशक्त अभियान चला रहे गायत्री ज्ञान मंदिर के लिए यह अत्यंत सौभाग्य के क्षण थे। शांतिकुंज के प्रखर युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय जी के विचारों ने उपस्थित २०० प्रमुख कार्यकर्त्ताओं का उत्साह दो गुना कर दिया। उन्होंने पूरे स्वर्णधाम नगर को गायत्रीमय बनाने वाली ज्ञान मंदिर की व्यवस्थापिका श्रीमती श्रीवाणी रंगा राव, राजपुरोहित जी के समर्पण और सूझबूझ के साथ किये जा रहे कार्यों का गुणगान किया। 

गुरुपूर्णिमा महोत्सव 

डॉ. चिन्मय जी की उपस्थिति का लाभ लेते हुए गुरुपूर्णिमा पर्व के उपलक्ष्य में गायत्री चेतना केन्द्र, मूसापेट पर ७ जुलाई को विशेष कार्यक्रम हुआ। दक्षिण भारत जोन प्रभारी डॉ. अश्विनी सुब्बाराव, श्री अनिल सुब्बाराव, श्री वेणुगोपाल राव, श्री एम.वी.एस. राजू, श्री हीरसिंह राजपुरोहित सहित १०० प्रमुख कार्यकर्त्ताओं ने इसमें भाग लिया। शांतिकुंज प्रतिनिधि ने अपने आराध्य परम पूज्य गुरुदेव की गुरुता के साथ उनके पिता- रूप का भावभरा स्मरण किया। उन्होंने कहा कि ऐसे महान गुरु का मिलना जीवन का श्रेष्ठतम सौभाग्य है। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का यही सर्वोत्तम समय है। इससे पूर्व ६ जुलाई को शृंग ऋषि भवन, फीलखाना में गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। समाचार गत  अंक के पृष्ठ ४ पर देखें। 






Click for hindi Typing


Related Stories
Recent News
Most Viewed
Total Viewed 34

Comments

Post your comment