The News (All World Gayatri Pariwar)
Home Editor's Desk World News Regional News Shantikunj E-Paper Upcoming Activities Articles Contact US

देव संस्कृति के दिव्य आलोक में डूबे कनाडा- अमेरिका के प्रवासी भारतीय

[Canada], Aug 28, 2017
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी के दस दिवसीय प्रवास से हुआ नई ऊर्जा का संचार 
इस वर्ष आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी २१ जुलाई से २ अगस्त तक कनाडा के प्रवास पर थे। उनका यह प्रवास युवा क्रांति वर्ष की सक्रियता और सफलताओं पर नैष्ठिक कार्यकर्त्ताओं की पीठ थपथपाने, उन्हें मातृशक्ति श्रद्धांजलि महापुरश्चरण की योजनाओं से अवगत कराने के लिए समर्पित था। उनके सान्निध्य में नन्हे बच्चों से लेकर प्रौढ़ों तक में युग के नवसृजन प्रवाह से जन- जन को अनुप्राणित करने का जबरदस्त उत्साह उभरा। विभिन्न क्षेत्रों में साधना एवं सृजन अभियान को गति दिने की योजनाएँ बनीं। गुरुसत्ता के दिव्य अनुदान और संरक्षण के प्रति विश्वास दृढ़ हुआ। 

शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री राजकुमार वैष्णव भी उनके साथ गये थे। इससे पूर्व वहाँ शांतिकुंज की प्रो. विश्वप्रकाश त्रिपाठी, श्री ओंकार पाटीदार एवं श्री छबिलाल जी की टोली पिछले लगभग ३ माह से सक्रिय थी, जिन्होंने सैकड़ों कार्यक्रम सम्पन्न कराते हुए आदरणीय डॉ. साहब के वर्तमान प्रवास के कार्यक्रमों की सफलता की पृष्ठभूमि रची थी। 

आदरणीय डॉ. साहब, डॉ. चिन्मय जी एवं श्री राजकुमार वैष्णव २१ जुलाई को जब टोरंटो के पियरसन एअरपोर्ट पर पहुँचे तो वहाँ शांतिकुंज प्रतिनिधियों के संग प्रतीक्षा कर रहे ५०- ६० प्रमुख कार्यकर्त्ताओं के चेहरे अद्भुत उल्लास से भर गये। सुधीरभाई, मधुभाई पटेल, राकेश शर्मा, श्री शरद- पूर्णिमा पटेल, न्यूजर्सी से आये पार्थ देसाई, केटकी से आये हेमाबेन, आस्था, चेतन देसाई, वैशाली आदि ने पुष्पगुच्छ प्रदान करते हुए उनका हार्दिक स्वागत किया। 

शांतिकुंज प्रतिनिधियों का स्वागत करने कार्यकर्त्तागण बड़ी दूर- दूर से आये थे। आदरणीय डॉ. साहब ने अपनी १४००० मील की लम्बी यात्रा की थकान की बिलकुल परवाह न करते हुए बड़ी आत्मीयता के साथ सबसे व्यक्तिगत रूप से मिले, कुशलक्षेम पूछी। गुरुधाम के आशीर्वाद पाकर सभी अभिभूत दिखाई दिये। 

तत्पश्चात् तीनों शांतिकुंज प्रतिनिधि टोरंटो के ओकविल- मिल्टन में श्री मधुभाई पटेल के साथ श्री इंद्रजीत ज्योतिबाला पटेल के घर पहुँचे। यहीं उनका निवास था। श्री मधुभाई भी उनके पड़ोसी हैं, जिनके यहाँ पहले से प्रो. विश्वप्रकाश त्रिपाठी की टोली ठहरी थी।






Click for hindi Typing


Related Stories
Recent News
Most Viewed
Total Viewed 105

Comments

Post your comment