The News (All World Gayatri Pariwar)
Home Editor's Desk World News Regional News Shantikunj E-Paper Upcoming Activities Articles Contact US

इस नवरात्र को नौ वर्षीय साधना अभियान का जीवन्त अंग बनायें

[Shantikunj, Haridwar], Sep 20, 2017
प्रस्तुत नवरात्र
आश्विन नवरात्र का पर्व सामने है। दिनांक २१ सितम्बर से २९ सितम्बर तक यह नवरात्र चलेगी। इस बार कोई तिथि घटी- बढ़ी नहीं है, इसलिए प्रतिपदा से नवमी तक पूरे ९ दिन हो जायेंगे। यों तो परिजन प्रति वर्ष की तरह व्यक्तिगत एवं सामूहिक अनुष्ठान संकल्पित जप- तप के साथ करेंगे ही, लेकिन इसका अपना कुछ विशेष महत्त्व भी है। विगत गुरुपूर्णिमा से प्रारंभ किए गये नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धाञ्जलि महापुरश्चरण के क्रम में आने वाली यह पहला नवरात्र है। स्नेहसलिला शक्तिस्वरूपा माँ को दी जाने वाली सभी व्यक्तिगत और सामूहिक साधनात्मक श्रद्धाञ्जलियाँ सार्थक, उन्हें संतोष पहुँचाने वाली सिद्ध हों, इसके लिए प्रत्येक नैष्ठिक साधक को प्रखर विवेकशीलता और प्रचण्ड साहसिकतायुक्त पुरुषार्थ करना होगा।

ध्यान रहे कि वन्दनीया माताजी कोई ऐसी साधारण आत्मा नहीं है कि हम उनके निमित्त विशेष जप- तप करके उनके लिए सद्गति के मार्ग खोल दें। ऐसा सोचना तो अपनी आस्था और उनकी महत्ता के साथ खिलवाड़ करने जैसा अनगढ़ कृत्य कहा जायेगा। ऐसी भूल संभवत: हममें से कोई भी श्रद्धालु परिजन नहीं करेंगे। फिर उनको श्रद्धाञ्जलि देने के नाम पर जप- तप, साधना करने का क्या उद्देश्य है? वह है महाकाल रूप गुरुदेव की युग निर्माण योजना को क्रियान्वित करने में जुटी महाशक्ति स्वरूपा माताजी को युगान्तरकारी परिवर्तन के लिए प्रामाणिक माध्यम, अग्रदूत बनने योग्य प्रामाणिक व्यक्तित्व समर्पित करना- कराना। इसीके लिए नौ वर्षीय विशिष्ट साधना अभियान चलाया गया हैै। प्रस्तुत नवरात्र साधना उसी विशिष्ट साधना अभियान का एक जीवन्त चरण बनाना है। 

विशिष्ट समय की विशिष्ट साधना 
सामान्यरूप से नवरात्र साधना करने वालों का भाव यह रहता है कि उन्हें विशेष पुण्य मिलेगा, जिससे वे सद्गति के, स्वर्ग- मुक्ति के अधिकारी बनेंगे। अथवा वे प्रचुर शक्ति अर्जित कर सकेंगे, जिससे उन्हें सिद्धियाँ, विशेष कार्य करने की क्षमता मिलेगी। ऐसे संकल्प के साथ साधना करने वाले साधक परम्परागत सामान्य लाभ पाते रहे हैं, पाते रहेंगे। विशिष्ट समय की विशिष्ट साधना का स्वरूप इससे भिन्न होता है। उसके लाभ भी विशिष्ट होते हैं। इस तथ्य को एक सामान्य उदाहरण से समझाया जा सकता है।

कोई व्यक्ति समझदारी और मेहनत के साथ व्यापार करके बड़ी मात्रा में धन कमा सकता है। उसे अपने लिए सुविधाएँ, मौज- शौक के साधन  जुटाने से लेकर जरूरतमंदों की सेवा- सहायता तक में अपनी इच्छानुसार लगा सकता है; लेकिन कहीं कोई महामारी, सूखा- अकाल या बाढ़  जैसी कोई आपदा आ जाये तब स्थिति भिन्न होती है। कोई व्यक्ति सोचे कि वह पर्याप्त कमाई करके अर्जित सम्पत्ति को आपदा निवारण में लगायेगा तो यह विचार अच्छा होते हुए भी व्यावहारिक नहीं कहा जा सकता। धन अर्जित करने में तो लम्बा समय लगता है, जबकि राहत कार्यों के लिए तो तत्काल साधन जुटाने होते हैं।

आपातकाल की व्यवस्था दूसरी तरह की होती है। तब सरकारी एवं गैर सरकारी समर्थ तंत्र उसके लिए अपने भंडार खोल देते हैं। तब कोई सामान्य स्तर का श्रमशील, प्रामाणिक, भावनाशील  व्यक्ति उल्लेखनीय योगदान दे सकता है। यदि वह जरूरतमंदों तक सहायता सामग्री पहुँचाने वाला प्रामाणिक माध्यम बन जाये तो अपनी जीवनभर की कमाई के बराबर कीमत की सामग्री अपने हाथों बाँटकर, उच्चस्तरीय यश एवं पुण्य अर्पित कर सकता है।

आज की स्थिति मनुष्य एवं मनुष्यता पर आपातकालीन स्थिति जैसी है। इसीलिए पूज्य गुरुदेव बार- बार यह बात दुहराते रहे हैं कि तुम लोग साधना से शक्तियाँ, सिद्धियाँ, स्वर्ग- मुक्ति आदि का अधिकार पाने की बात मत सोचो। वह तो हम (ऋषितंत्र के प्रतिनिधि) तुम्हें सहज ही उपलब्ध करा देंगे। तुम्हें तो ईश्वरीय उद्देश्य के लिए समर्पित प्रामाणिक माध्यम बनना है। स्वयं को वासना, तृष्णा, अहंता की संकीर्णता से ऊपर उठाकर प्रभुकार्य के लिए प्रामाणिक व्यक्तित्व के रूप में विकसित होना है। निर्धारित अवधि में संकल्पित जप एवं तप पूरा करने से अपना संकल्प बल, आत्मबल बढ़ता है। उस बढ़े हुए आत्मबल- संकल्प बल को कहाँ लगाना है? उसे लगाना है युग परिवर्तन अभियान के अगले चरण के, उच्च स्तरीय कार्य करने के लिए अपने चिन्तन, चरित्र एवं व्यवहार, गुण- कर्म को अधिक परिष्कृत और प्रखर बनाने के लिए। इस प्रकार के परिष्कृत- समर्पित साधकों को संगठित करके युगशक्ति की प्रतीक लाल मशाल की जीवन्त इकाइयाँ भूमि के हर क्षेत्र और समाज के हर वर्ग में स्थापित करना।

मशाल हो उठे जीवन्त 
युगशक्ति की प्रतीक लाल मशाल की जीवन्त इकाइयाँ इतनी बड़ी संख्या में स्थापित की जानी हैं कि उनके आलोक से कोई भी क्षेत्र अछूता- अप्रभावित न रह जाये। उसकी ज्वाला के ताप और प्रकाश से अवांछनीयताएँ ध्वस्त होने लगें, अज्ञान का अँधेरा मिटने लगे और बौद्धिक क्रान्ति, नैतिक क्रान्ति तथा सामाजिक क्रान्ति की लपटें हर क्षेत्र, हर वर्ग में उठने लगें।

मशाल के जनसमूह में सभी वर्गों- सम्प्रदायों के भले और कर्मठ नर- नारी शामिल हैं। उनमें इतना सघन प्रेम और सहकार हो कि उनकी संयुक्त शक्ति एक समर्थ बाहु, समर्थ इकाई के रूप में प्रकट हो। ईश्वरीय योजना के अनुसार क्रान्ति का संकल्प- 'मशाल' को वे थाम सकें। उनके संयुक्त पुरुषार्थ एवं सहयोग से उसमें क्रान्ति की ज्वाला फूट पड़े। ऐसा होने पर ऋषिसत्ता एवं परमात्मसत्ता के शक्ति अनुदान- तेजोवलय की तरह उन्हें घेर लेंगे। इसके लिए स्नेहसलिला- शक्तिस्वरूपा मातेश्वरी से स्नेह और शक्ति के विशेष अनुदान पाने की पात्रता बढ़ानी होगी।

स्नेह इतना कि उसके नाते प्रभु कार्य के प्रति लगाव के चलते सांसारिक प्रलोभन और अवरोध प्रभावित न कर सकें। स्नेह इस स्तर का कि सामान्य क्रम में, विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सम्पर्क में आने वाला हर व्यक्ति हमारी आत्मीयता के बन्धन में बँध जाये।
 
सहकार इतना कि विभिन्न मतों, रुचियों के व्यक्तियों को एकजुट करने में कठिनाई अनुभव न हो। प्रभुकार्य के लिए इन्हीं सत्प्रवृत्तियों को अपने व्यक्तित्व और अपनी संगठित इकाई में विकसित करने के सुनिश्चित संकल्प के साथ नवरात्र साधना की जाये, तो नौ वर्षीय साधना अभियान के अगले चरण स्वत: खुलते चले जायेंगे।






Click for hindi Typing


Related Stories
Recent News
Most Viewed
Total Viewed 2207

Comments

Post your comment

Niranjankumar Keshavlal Purohit
2017-09-27 06:27:01
Jay Gurudev I have started Anushtan at my home but some problem comes of health
O. P. Mishra
2017-09-20 22:34:04
Sadhu vad
Sahgal Singh
2017-09-20 20:58:11
Like


Warning: Unknown: write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0