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[KAUSHAMBI], Nov 20, 2017
कटीली झाड़ियों में भी जब पुष्प खिलते हैं, तो वे बड़ी नयनाभिराम बन जाती हैं, तुच्छ और नगण्य मनुष्य में भी जब सद्गुणों का समावेश हो जाता है, तो वे महान् पुरुषों की समता करने लगते हैं। ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य 
जीवन स्वाभाविक और स्वछंद बदलावों की कड़ी है। उन्हें रोकना नहीं चाहिए। सच को सच की तरह स्वीकार किया जाना चाहिए। चीजो को स्वभाविक तरीके से होने दीजिये, जैसी की वह होना चाहती है। ~ लाओत्से
 संसार में अप्रिय घटनायें होती हैं, तुम विश्व की समस्त घटनाओं को अपने अनुकूल नहीं बना सकते। इस दुख से छूट कर सुख प्राप्त करने का यह उपाय है कि घटनाओं को ईश्वर की इच्छा समझ कर शान्त रहो और धर्म समझकर अपने कर्तव्य का पालन करते जाओ। awgp
 जो पुरुष जानता है, वह ऐसे मार्ग पर चलता है जो अमर जीवन की ओर ले जाता है। प्रमाद का मार्ग मृत्यु की ओर ले जाता है। जो जागते हैं वे स्वतंत्र हैं। जो प्रमाद में फंसे हैं वे मानों अभी मर चुके हैं। ~ भगवान बुद्ध
 पानी से शरीर, धर्म से आत्मा, ज्ञान से बुद्धि और सत्य से मन पवित्र होता है। ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य awgp 
प्रेम वह पदार्थ है जो झोंपड़ों में स्वर्ग धाम और खेतों में नन्दन वन की सृष्टि कर देता है। ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य 






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