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लोकमंगल के पथ पर बढ़ रहे युग सृजेताओं के साहसी कदम

[Chattisgarh], Dec 24, 2017
दिव्य भारत संघ छत्तीसगढ़ ने छुआ मील का पत्थर
शैक्षणिक संस्थानों में डिवाइन वर्कशॉप आयोजन के निरंतर क्रम का १००० वाँ कार्यक्रम

उपलब्धियाँ
  • दिया छत्तीसगढ़ दुर्ग और आसपास के जिलों के शैक्षणिक संस्थानों में पिछले ५ वर्षों से सतत डिवाइन वर्कशॉप का आयोजन कर रहा है।
  • इनके माध्यम से ३,००,००० से अधिक विद्यार्थियों तक मिशन के विचार पहुँचाये गये।
  • लगभग ४,००० युवाओं ने विविध रचनात्मक आन्दोलनों में भागीदारी की, युग निर्माण अभियान से जुड़े।
  • ओडिशा प्रांत में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन आरंभ किया गया।

भिलाई। छत्तीसगढ़
श्रीचंद्रा नर्सिंग कॉलेज, पुष्पक नगर के सभागार में २५ नवम्बर को दिया छत्तीसगढ़ द्वारा डिवाइन वर्कशॉप का आयोजन किया गया। 'युवाओ सृजन का समय आ गया, राष्ट्र जागरण का समय आ गया' के ओजस्वी स्वर गूँज रहे थे। यह अवसर विशेष था, ऐतिहासिक था। यह पिछले ५ वर्षों की सतत सक्रियता में एक मील का पत्थर था। दिव्य भारत संघ, छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित यह १००० वीं डिवाइन वर्कशॉप थी।

इस विशिष्ट कार्यशाला को संबोधित करने युवा प्रकोष्ठ, शांतिकुंज के प्रवक्ता श्री आशीष कुमार सिंह पहुँचे। उन्होंने उपस्थित कॉलेज के डायरेक्टर श्री मोहन चंद्राकर, समस्त स्टाफ, ५०० छात्र- छात्राओं को वर्तमान परिस्थितियों में युवा जागरण की आवश्यकता और उसके विधि- विधान का बोध कराया। दिया, ओडिशा के श्री संतोष कुमार जेना ने अपने ओजस्वी क्रांति गीतों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर उपजोन भिलाई के समन्वयक श्री एस.पी. सिंह, धीरजलाल टांक, दिया, छ.ग. के संयोजक डॉ. पी.एल. साव एवं उनके प्रमुखसहयोगी डॉ. योगेन्द्र कुमार, इं. सौरभकांत, सर्वश्री रामस्वरूप साहू, लोकनाथ साहू, मोहन उमरे, अखिलेश हिरवानी, प्रेमकांत, पवन वर्मा, अंजना साहू, सुश्री तिलोत्तमा मुदली, सुमन, मधुलिका, श्रद्धा, विनीता, भुवनेश्वरी, श्रीमती उषा किरण, रूपाली गाँधी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यशाला का संचालन इं. युगल किशोर ने किया।

मुख्य वक्ता श्री आशीष सिंह ने कहा :
भारतीय संस्कृति विश्ववंद्य है। भारत का विकास अपनी इसी संस्कृति की गौरव- गरिमा के अनुरूप होना चाहिए, जिसमें श्रद्धा है, संवेदना है, एक- दूसरे के लिए सहयोग एवं त्याग की भावना है। हम अपना ही नहीं, सारे विश्व का कल्याण, शांति और प्रगति चाहते हैं। दिव्य भारत संघ का ध्येय इन्हीं भावनाओं को पुनर्जीवित करना है। पश्चिमी संस्कृति के भ्रम और भटकावों से बचाकर युवा पीढ़ी को राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए समर्पित करना है।






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