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जोबट दिनांक 17 अगस्त 2014 स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ में अखण्ड ज्योति पाठक सम्मेलन का आयोजन किया गया ।। इसमें मुख्य अतिथि थे श्री शम्भु सिंह पुरोहित सचिव भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा झाबुआ । यह उल्लेखनीय है कि श्री पुरोहित अकेले 500 अखण्ड ज्योति पत्रिकायें वितरित करते हैं । कार्यक्रम की अध्यक्षता की श्री विनोद जायसवाल ट्रस्टी झाबुआ ने ।। विशिष्ट अतिथि श्री संतोष वर्मा जिला समन्वयक अलीराजपुर थे । तीनों अतिथियों ने देव पूजन कर दीप प्रज्ज्वलित किया ।

अतिथियों का सम्मान उन कार्यकर्ता ने किया जो सेवा भावना से अखण्ड  ज्योति घर घर पहुँचाने का कार्य करते है वे हैं श्रीमती सरोज टवली ,, श्रीमती सारिका सक्सेना, सर्व श्री रमेश चन्द्र राठौड, अनिल श्रीवास्तव, और बंशीलाल अगाल ।

"जो न दे सका आज तक पूज्य गुरुदेव वह दे दिया आपने प्रज्ञा गीत को स्वर दिये श्रीमती मंजुबाला श्रीवास्तव ने । इसके बाद अनुभवों का एक क्रम चल पड़ा । सर्व प्रथम श्री पुरोहित ने अखण्ड ज्योति को आत्मा की भूख प्यास बुझाने वाली पत्रिका बताते हुये कहा यह पूज्य आर्चाय जी की वाणी है । योग शिक्षक श्री गजानन बानखडे ने कहा कि धार्मिक पत्रों में सबसे अधिक छपने वाली अखण्ड ज्योति पत्रिका है । इसे जो पढ़ता है वह प्रभावित हुये बिना नही रह सकता । श्री संतोष वर्मा ने अखण्ड ज्योति में अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय की बात कही ऐसा लगता है मानो इसमें बकरी और शेर को एक घाट पानी पिला दिया है ।

सन साठ के दशक के पाठक श्री आत्मा राम आसोरिया ने अखण्ड ज्योति में जीवन की हर समस्या का हल बताया । श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा अखण्ड ज्योति को हम चंदन पुष्पों द्वारा एकत्रित किया हुआ परम पौष्टिक मधु कह सकते हैं । डाॅक्टर शिव नारायण सक्सेना ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सन 1937 से अब तक की प्रगति पर प्रकाश डाला । अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री विनोद जायसवाल ने कहा यह कोई पत्रिका नहीं विशुद्ध रूप से हमारी आत्मा का साकार रूप है । इसलिये हमें इसे घर घर पहुँचाने का प्रयास करना चाहिए ।

तहसील समन्वयक श्री शिवराम वर्मा ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया और सदस्यता अभियान में वृद्धि के लिये सबको संकल्प दिलाया । परिव्राजक श्री राम सिंह चौहान ने वेद मंत्रों से शान्ति पाठ कर कार्यक्रम के समापन की घोषणा की ।


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