• पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित गायत्री परिवार यूथ ग्रुप कोलकाता का अद्वितीय पुरुषार्थ
  • समाज को उस सृजनशील नेतृत्व की जरूरत है, जो लोगों में अनुसरण का उत्साह जगा सके। आशा है कि आपका यह पुरुषार्थ हजारों लोकसेवियों और संगठन-समुदायों को प्रेरणा प्रदान करेगा।
                                        - डॉ. चिन्मय पण्ड्या, प्रतिकुलपति 
                                            देव संस्कृति विश्वविद्यालय


किसी व्यक्ति या समाज का भविष्य उसके विचारों पर निर्भर है। प्रश्न यह नहीं है कि कार्य क्या हुआ। महत्त्व इस बात का है कि वह किस भावना के साथ किया गया। लगातार चार वर्षों तक हर रविवार को वृक्षारोपण अभियान चलाकर आपने जिन संकल्प और भावनाओं का परिचय दिया है, वह सराहनीय है। समाज को उस सृजनशील नेतृत्व की जरूरत है, जो लोगों में अनुसरण का उत्साह जगा सके। आशा है कि आपका यह पुरुषार्थ हजारों लोकसेवियों और संगठन-समुदायों को प्रेरणा प्रदान करेगा। 

गायत्री परिवार यूथ ग्रुप कोलकाता द्वारा आयोजित ‘२००वाँ पर्यावरण रविवार’ समारोह को संबोधित करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के युवा प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने उपरोक्त विचारों के साथ कोलकाता और आसपास के क्षेत्र में वृक्षारोपण का अद्वितीय अभियान चला रहे युवाओं का अभिनंदन किया। 

डॉ. चिन्मय ने भाव संवेदनाओं के जागरण को समय की सबसे बड़ी माँग बताया। उन्होंने कहा कि हम देश को माँ कहते हैं और भ्रष्टाचार करते हैं, नारी को माँ कहते हैं और उसके साथ दुराचार करते हैं, प्रकृति को माँ कहते हैं और अंधाधुंध दोहन करते हुए उस पर अत्याचार करते हैं। 
हमें अपनी सोच बदलनी होगी। लेने नहीं, देने की प्रवृत्ति जगाकर ही हम प्रकृति के प्रकोप से बच पायेंगे। प्रकृति को वृक्ष लौटाने, नदियों को स्वच्छ बनाने, युवाओं को स्वावलम्बी बनाने के बड़े दायित्व युवाओं को सँभालने होंगे। 

समारोह की अध्यक्षता श्री प्रणव चट्टोपाध्याय, हाईकोर्ट जज ने अपने वक्तव्य में गायत्री परिवार के युवाओं के इस आन्दोलन की भरपूर सराहना की। उन्होंने कहा कि हम वृक्षों के उपकार को भूलें नहीं, उनके पोषण के लिए प्रयास करें तभी हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा। 

श्री के.पी. दुबे, रचनात्मक आन्दोलन प्रभारी शांतिकुंज ने पूरे देश में चलाये जा रहे वृक्षगंगा अभियान की विस्तृत जानकारी और वृक्षों के उपकार की जानकारी देते हुए श्रोताओं में नव उल्लास जगाया। उन्होंने इन दिनों चल रहे निर्मल जनगंगा अभियान का भी विस्तार से परिचय दिया और उसकी सफलता में अधिकाधिक योगदान देने का आह्वान किया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के शिक्षक श्री राम अवतार पाटीदार ने समारोह की सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। 

यह समारोह ७ सितम्बर को सॉल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित हुआ। लगभग ८५० युवाओं ने इसमें भाग लिया। इन युवाओं द्वारा उसी दिन १००८ वृक्ष रोपे गये, जिसकी शुरुआत डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने की। उल्लेखनीय है कि गायत्री परिवार यूथ ग्रुप कोलकाता पिछले चार वर्षों से हर रविवार को वृक्षारोपण कर रहा है। ७ सितम्बर उनके अखण्ड अभियान का २००वाँ सप्ताह था। सर्वश्री रवि शर्मा, पवन कजारिया, गोकुलभाई मुंदड़ा, प्रह्लाद शर्मा, राजेश काबरा, शीला जी अनिल गोयल, मुकेश श्रीवास्तव, सोनू ठाकुर, पंकज जी, कृष्णा चौधरी आदि इस अभियान के सूत्रधार हैं। 


महाविद्यालय सभागार का लोकार्पण

देव संस्कृति विवि. के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या द्वारा गायत्री चेतना केन्द्र, रामचंद्रपुर, कोलकाता में नवनिर्मित महाविद्यालय के सभागार का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर उन्हें युगऋषि की तपोभूमि शांतिकुंज से कोलकाता की तुलना करते हुए स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की तपोभूमि की तुलना की। उन्होंने कहा कि दोनों स्थानों की आध्यात्मिक चेतना लोगों को आत्मशक्तियों के जागरण और जीवन विद्या का आलोक जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रेरित करती हैं। 

गायत्री चेतना केन्द्र में देव संस्कृति महाविद्यालय को डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने युवा पीढ़ी को गढ़ने के विशाल अभियान की एक छोटी-सी शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि हम युवाओं को शिक्षा से साक्षरता के साथ विद्या से सार्थकता का पाठ पढ़ाने पर विशेष ध्यान देते हैं। भावी विकास की संभावनाओं की चर्चा हुई, मार्गदर्शन दिया गया। चेतना केन्द्र के विस्तार से युग निर्माण आन्दोलन को गति देने में पूरे मनोयोग से जुटे कार्यकर्त्ता श्रीमती अंजना मेहरिया, सर्वश्री अरविंद मेहरिया, बाबूभाई पटेल, संतोष महतो, अशोक पोद्दार, रतिभाई पटेल, अशोक चौरिवाल आदि का इस लोकार्पण समारोह में मुख्य योगदान था। 


पत्रकार वार्ता
सॉल्ट लेक स्टेडियम में ही पत्रकार वार्ता हुई। सन्मार्ग, दैनिक विश्वमित्र, राजस्थान पत्रिका, प्रभात खबर, छपते-छपते, सेवा संसार, भारत मित्र, सलाम इंडिया, जनसत्ता, जागरण, कलियुग वार्ता सहित कई दैनिक समाचार पत्रों के संवाददाताओं ने इसमें भाग लिया। डॉ. चिन्मय ने शांतिकुंज, देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा चलाये जा रहे राष्ट्रोत्कर्ष के विविध अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोगों के विचारों को बदलकर उन आन्दोलनों को जनजीवन का स्वाभाविक अंग बनाने का हमारा प्रयास है। 




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