Published on 2016-03-14

 गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय युवा संगोष्ठी का आज समापन हो गया। इस संगोष्ठी में साधना, शिक्षा, स्वावलम्बन, पर्यावरण संरक्षण, नारी जागरण एवं नशा मुक्ति- कुरीति उन्मूलन आदि आंदोलन को गति देने दिये जाने के लिए युवाओं ने हाथ उठाकर संकल्प लिया, तो वहीं होलिका पर्व को अश्लीलता दहन, ३१ मई को व्यसन मुक्ति रैली, २१ जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में गाँव- गाँव, मोहल्ले- मोहल्लें पर निःशुल्क योग शिविर, गुरुपूर्णिमा से श्रावणी तक वृहद् स्तर पर वृक्षारोपण तथा २० सितम्बर को जलस्त्रोतों में सामूहिक स्वच्छता अभियान चलाया जायेगा। इन कार्यक्रमों को देशभर में एक साथ अखिल विश्व गायत्री परिवार के लाखों युवा मिलकर करेंगे। शांतिकुंज इन अभियानों के लिए समय- समय पर युवाओं से सम्पर्क कर कार्यक्रमों की समीक्षा करता रहेगा। साथ ही युवाओं के विकास एवं स्किल डेवलपमेंट के लिए विविध आयोजन किये जायेंगे।

शिविर के अंतिम दिन प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि संयमित व प्रगतिशील युवा राष्ट्रोत्थान में सहयोगी बन सकते हैं। युवा वह है, जिसके चरित्र व विचार सुंदर हो, अपने मित्रों, परिवारों को साथ लेकर चलें। उन्होंने कहा कि अपना देश, समाज यदि उठता है, तो उसके मूल में ऐसी ही सृजनात्मक युवाओं का योगदान होगा। युवकों में शौर्य, साहस और पराक्रम का जोश होता है। उनके एक कोने में योद्धा भी छिपा रहता है, जो अवांछनीयता से जूझने के समय उभरता है। इस पौरुष को सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध लोहा लेने के लिए लगाया जाना चाहिए।

विदाई सत्र को संबोधित करते हुए श्री गौरीशंकर शर्मा ने कहा कि युवावस्था की उठती उम्र अपने साथ शोभा, सौन्दर्य, आशा, उमंग, जोश, उत्साह ही नहीं लेकर आती, वरन् मनुष्य के भाग्य और भविष्य का निर्माण भी इन्हीं दिनों होता है। गीली मिट्टी से ही बर्तन, खिलौने आदि बनते हैं। किशोरावस्था और नवयौवन के दिन ऐसे हैं, जिनमें व्यक्तित्व उभरता, ढलता है। कुसंग से इन्हीं दिनों पतन तथा सुसंग से उन्नति का मार्ग बनाया जा सकता है। इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ पण्ड्याजी ने प्रतिभागियों की विविध शंकाओं का समाधान भी किया, साथ ही उन्होंने युवाओं के स्वावलंबी एवं स्किल डेवलपमेंट के विविध पहलुओं पर जानकारी दी।

शिविर समन्वयक श्री केपी दूबे ने बताया कि इस शिविर में मप्र, उप्र, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार, ओडिशा, गुजरात, पंजाब, दिल्ली सहित देश के कई राज्यों से आये ५०० से अधिक युवा उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ये वे युवा हैं, जिन्होंने अपने परिवार का दायरा बढ़ाकर समाज के विकास में अपना तन,मन, धन से जुटे हुए हैं। तीन दिन चले इस संगोष्ठी में राष्ट्र के विकास में युवाओं के योगदान से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रज्ञा अभियान के संपादक श्री वीरेश्वर उपाध्याय, देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, डॉ. ओपी शर्मा, श्री अशरण शरण श्रीवास्तव, श्री कामता प्रसाद साहू, आशीष सिंह आदि ने सम्बोधित किया।


Write Your Comments Here: