उत्तराखंड की पहचान है गायत्री परिवार : मुख्यमंत्री

Published on 2016-06-01
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हरिद्वार  जून ।।

मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत ने कहा कि देश की पहचान जिस तरह माँ गंगा है, उसी तरह देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान गायत्री परिवार है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार धार्मिक, सामााजिक कार्यक्रम के साथ सेवा की जो गतिविधियाँ संचालित करता है, उससे पूरा समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। देवभूमि में जहाँ- जहाँ दैवीय विपदाएँ आईं, वहाँ- वहाँ सबसे पहले सेवा, सहयोग के लिए गायत्री परिवार पहुँचा, यह जानकर गायत्री परिवार के प्रति मेरा हृदय गदगद हो जाता है।

श्री रावत गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस शिविर में पंजाब, राजस्थान, उत्तराखण्ड, मप्र, हरियाणा राज्य के ५०० से अधिक शिक्षक- शिक्षिकाएँ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा काम जनमानस को संस्कारित करने का है जो भासंज्ञाप के माध्यम से यह कार्य अच्छे ढंग से हो रहा है। उन्होंने इसे पूरे राज्य में आयोजित कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज ने अपने गुरु पूज्य आचार्यश्री के कार्यों को गति देते हुए जो लकीरें खीचीं है, वह एवरेस्ट जैसा है।

इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति संस्कारयुक्त कृति है जो मानव को महामानव बनाने वाली है। यही संस्कृति सद्गुणों की खेती करना सिखाती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह विज्ञान और अध्यात्म के मिलने से श्रेष्ठ युग आता है, उसी तरह संस्कृति और सभ्यता के मिलन से समग्र मानव का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि १९९४ में कुछ हजार विद्यार्थियों के साथ आरंभ हुआ इस अभियान में २०१५ में करीब ४८ लाख विद्यार्थियों तक पहुंचाने में सफलता मिली। गत वर्ष में यह परीक्षा देश के १८ राज्यों में आयोजित हुई। इस दौरान डॉ. पण्ड्याजी ने मुख्यमंत्री श्री रावत को स्मृति चिह्न एवं युग साहित्य भेंटकर सम्मानित किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ बृजमोहन गौड़ ने किया। इस अवसर पर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, पत्रकारगण सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री के ऋषियुग्म की पावन समाधि में पुष्पांजलि अर्पित कर देवभूमि के विकास हेतु प्रार्थना कीं।


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