Published on 2016-08-20
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हरिद्वार २१ अगस्त।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि ‘उन्नयन- १६’ जीवन में स्फूर्ती और जोश के साथ कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। यह हर वर्ग, उम्र के लोगों को विचारों तथा कर्मों से युवा बने रहने की शिक्षा देता है। आज संसार को जरूरत है ऐसे युवाओं की जिनके कदम उत्कृष्टता की ओर बढ़ते हों।

डॉ. पण्ड्याजी देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युजंय सभागार में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के स्वागत हेतु आयोजित उन्नयन- २०१६ के अवसर पर विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज सभी विश्वविद्यालय में उन्नयन जैसे कार्यक्रम की जरूरत है जिससे जूनियर एवं सीनियर विद्यार्थियों का मतभेद खत्म हो तथा आपस में प्यार बढ़े। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उनके विद्यार्थियों से होती है। जो विश्वविद्यालय की गौरव गरिमा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास रत रहते हैं।

इससे पूर्व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के सीनियर विद्यार्थियों ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों के स्वागत के लिए उन्नयन- १६ का आयोजन किया। इसकी मुख्य थीम उत्तिष्ठत् जाग्रत थी, जिसे कुलाधिपति ने निर्धारित की थी। इस अवसर पर बी.ए तृतीय वर्ष के छात्र देवेन्द्र ठाकुर ने देव स्तुति के मनमोहक नृत्य के साथ कार्यक्रम में समा बांध दिया। इसके उपरान्त छात्र- छात्राओं ने समूह गान, समूह नृत्य, लघु नाटिका, मोनो एक्ट तथा जटिल योगासनों का प्रदर्शन के द्वारा विश्वविद्यालय की खूबियां एवं विभिन्नता को दर्शाते हुए भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्मवाद का संदेश पहुंचाया। साथ ही देसंविवि द्वारा व्यक्तित्व विकास के विविध आयाम स्वाध्याय, यज्ञ, गीता- ध्यान, प्रार्थना आदि को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया, जो विद्यार्थियों के मनोरंजन के साथ- साथ प्रेरणा देने वाला रहा। उल्लेखनीय है उन्नयन- १६ की तैयारी से लेकर सम्पूर्ण कार्य विद्यार्थियों ने ही सम्पन्न कराया।

इस अवसर पर देसंविवि के सभी विद्यार्थी, शिक्षकगण, कर्मचारी, शांतिकुंज एवं ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के कार्यकर्त्ता मौजूद रहे।


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