Published on 2017-12-22

इंटर्नशिप संभावनाओं को अवसर में बदलने का सुअवसर
देसंविवि के ३८० युवाओं की १३२ टोली रवाना
नेपाल सहित उप्र,गोवा, दिल्ली, गुजरात आदि राज्यों में करायेंगी विभिन्न कार्यक्रम

हरिद्वार २२ दिसम्बर।
शनिवार का दिन देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए नई सुबह का संदेश लेकर आया। जब उन्हें विश्वविद्यालय में अर्जित शिक्षा और विद्या का लाभ समाज में बांटने का निर्देश मिला। मौका था देसंविवि की अनूठी पद्वति इंटर्नशिप प्रशिक्षण सत्र के बाद कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी द्वारा विदाई समारोह का।

इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि ये जो इंटर्नशिप है, यह एक नया जन्म जैसा है। 'बी बॉर्न अगेन' के मूल मंत्र पर आधारित यह समय नयी उमंग, उत्साह का है। उन्होंने कहा कि दुनिया बदलेगी, तो परिव्राजकों से ही बदलेगी। परिव्राजक धर्म का आदर्श प्र्रस्तुत करने वाले स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब कोई अपने इष्ट का संदेशवाहक बनकर निकलता है, तो उसकी शक्तियाँ सौ गुनी हो जाती हैं। उसके विचार, उसका चरित्र और व्यवहार समाज को प्रभावित करता है। अपने जीवन का अनुभव बताते हुए विवि के अभिभावक ने कहा कि समाज के किसी भी क्षेत्र में सफल होना हो, तो समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी को सदैव अपने छाती से चिपकाये रखना चाहिए।

प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने बताया कि देवसंस्कृति विवि की अनुठी इंटर्नशिप प्रक्रिया के तहत यहाँ अध्ययनरत विद्यार्थियों को अपना पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद एक निश्चित अवधि के लिए परिव्रज्या करनी होती है। इसके पश्चात ही उन्हें डिग्री दी जाती है। उन्होंने कहा कि युवावर्ग की समस्याओं को युवा ही बेहतर ढंग से समझ सकता है और समझदार, सुलझा हुआ युवा ही उसका सर्वश्रेष्ठ समाधान सुझा सकता है। उन्होंने बताया कि एमबीए, एमएससी, एमए, बीएड, बीएससी, बीए व सर्टीफिकेट के ३८० छात्र- छात्राओं की १३२ टोली करीब ढाई सौ से अधिक शहरों, कस्बों के सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों में योग व जीवन जीने की पद्धति से रूबरू करायेंगे।

युवा परिव्राजकों की टोली महाराष्ट्र, म.प्र, अरुणाचल, पं बंगाल, बिहार, उप्र, पंजाब, हरियाणा, केरल, गोवा, आंध्रप्रदेश, राजस्थान आदि प्रांत एवं नेपाल के ढाई सौ से अधिक शहरों, कस्बों में देवसंस्कृति की अलख जगायेंगी। इनके कार्यक्रमों में भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे युवाओं को व्यक्तिगत संकीर्णता से ऊपर उठकर समाज व राष्ट्र के लिए अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करना मुख्य उद्देश्य है।


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