Published on 2017-12-23

देव संस्कृति पुष्टिकरण लोक आराधन २५१ कुंडीय गायत्री महायज्ञ, जयपुर
श्रद्धेया शैल जीजी के आगमन से युग सृजेताओं में छाया उल्लास

जयपुर। राजस्थान
अश्वमेध रजत जयंती समारोह शृंखला का अंतिम कार्यक्रम जयपुर में वीटी रोड मानसरोवर स्थित हाउसिंग बोर्ड मैदान पर २३ से २६ नवम्बर की तारीखों में आयोजित हुआ। इस महायज्ञ में आदरणीया शैल दीदी एवं डॉ. चिन्मय पंड्याजी जी देव संस्कृति दिग्विजय के संकल्प को साकार करने के लिए सर्वोच्च समर्पण करने को तत्पर युग सृजेताओं में नवचेतना का संचार करने शांतिकुंज से पहुँचे। कलशयात्रा, हवन, दीपयज्ञ, विचार गोष्ठी, संस्कार सहित विभिन्न कार्यक्रमों में जयपुर, सीकर, टौंक, दौसा, अलवर जिलों से आये हजारों भाई-बहनों ने युग निर्माण आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी के संकल्प लिये।
 
राज्य सरकार के चार मंत्री, विभिन्न आयोग के अध्यक्ष, माननीय न्यायाधीश सहित अनेक गणमान्यों ने अलग-अलग अवसरों पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई।

कलश यात्रा : कलशयात्रा में शामिल ग्यारह हजार से अधिक पीत वस्त्रधारी महिला-पुरुषों ने पूरे मानसरोवर को गायत्रीमय कर दिया। झांकियों और ज्ञान रथों के साथ अनुशासित ढंग से निकली कलशयात्रा को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। दो स्थानों से कलश यात्राएँ आरंभ हुर्इं, मीरा पार्क में राजस्थान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने कलशों का पूजन कर यात्रा को रवाना किया।
 
इन्होंने संभाले रखी व्यवस्थाएं:
अखिल विश्व गायत्री परिवार राजस्थान जोन के प्रभारी अंबिका प्रसाद श्रीवास्तव, स्थानीय शांतिकुंज प्रतिनिधि ताराचंद पंवार, गायत्री परिवार के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता वीरेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सतीश भाटी, ओमप्रकाश अग्रवाल, नंदलाल कचोलिया, संजय गुप्ता, दीपक नंदी, भैंरूलाल जाट, रणवीर चौधरी, हर्ष मिश्रा, भक्तभूषण वर्मा, मनोज पारीक ने अलग-अलग व्यवस्थाओं में सहयोग किया।

 ११०० श्रद्धालुओं ने दीक्षा ली
• ११ लाख आहुतियाँ अर्पित कीं
श्री कालीचरण शर्मा एवं श्री दिनेश पटेल की टोली ने तीन दिनों में गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और देव संस्कृति के पुष्टिकरण, वातावरण परिष्कार, पर्यावरण सरंक्षण, ऋषि परंपरा संवर्धन, संकट निवारण के लिए ११ लाख आहुतियाँ अर्पित करवाई।
 
• ३ वर्षीय कार्ययोजना के संकल्प
• एक करोड़ पौधे लगायेंगे
• तीस लाख देव परिवार बनायेंगे
• हर गाँव में दस कार्यकर्त्ता बनायेंगे
• श्रद्धेया जीजी ने प्रज्ञापुंज एवं प्रज्ञापुत्रों को प्रमाणपत्र प्रदान किये।

संवेदनाओं के जागरण से होगा समस्त समस्याओं का समाधान
• श्रद्धेया शैल जीजी

आज समाज में जितनी भी समस्याएँ दिखाई देती हैं, उनका मूल कारण भाव संवेदनाओं का अभाव है। जिस समाज की संवेदनाएँ सूख जायें वह समाज कभी सुखी नहीं रह सकता। गायत्री उपासना वस्तुत: भाव संवेदनाओं के जागरण की ही साधना है। जिसकी संवेदना जाग जाय वह देवता बनता चला जाता है। देवता वह जो दूसरों के दु:ख-दर्द को अपना समझे और उसके समाधान के लिए प्रयत्नशील रहे। गायत्री परिवार की यही विशेषता है।

आदर्शों के प्रति आस्था का पोषण कर रहा है गायत्री परिवार
 • डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी

समाज का कल्याण केवल वही संगठन कर सकता है जो लोगों की आस्थाओं का पोषण कर सके। हमारी  आस्था जीवन-आदर्शों के प्रति होनी चाहिए; अपने राष्ट्र, समाज संस्कृति पर होनी चाहिए, अपने सृजेता और अपनी सामर्थ्य पर होनी चाहिए। आस्था के पोषण का दायित्व मुख्य रूप से देवालयों पर होता है। उन्हें मात्र पूजा-पाठ के नहीं, जनजागरण के केन्द्र होना चाहिए। गायत्री परिवार यही कार्य कर रहा है। बाल संस्कार शालाएँ भी इस कार्य में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बचपन से ही नैतिकता का पाठ पढ़ाना एक प्रकार से व्यक्ति को आदर्शों के साँचे में ढालना है, जिसका प्रभाव जीवनभर रहता है।  

आत्मदेवता को जगाइये
• श्री कालीचरण शर्मा
मां गायत्री आत्म देवता को जगाने की प्रेरणा और शक्ति देती है। अनुदान और वरदान तो आत्मदेवता ही देते हैं।

देव संस्कृति पुष्टिकरण लोक आराधन संगोष्ठी
४० स्वयंसेवी संगठनों ने भाग लिया, मिलकर काम करने का आश्वासन मिला
गायत्री महायज्ञ के दूसरे दिन २४ नवम्बर को दोपहर को यज्ञ शाला परिसर में  महंत मनोहरदास महाराज के सान्निध्य में देव संस्कृति पुष्टिकरण गोष्ठी एवं विभूति सम्मान समारोह हुआ। इसमें पीड़ित मानवता की सेवा में लगे भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, सेवा भारती सहित ४० से अधिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
 
श्री कालीचरण शर्मा ने इसे संबोधित करते हुए कहा किआज आदमी धन कमाने में जितनी बुद्धि लगा रहा है, उतनी सेवा में लगाए तो यह युग बदल सकता है। आज ज्ञान की कमी है। इसी ज्ञान की कमी के कारण अनेक प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं।
 
श्री घनश्याम पालीवाल ने गायत्री परिवार द्वारा अब तक किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। सभी संगठनों को गायत्री परिवार की गतिविधियों को जानने का अवसर प्राप्त हुआ। गायत्री परिवार की ओर से सभी संगठनों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। उन्होंने गायत्री परिवार के साथ मिलकर कार्य करने का विश्वास दिलाया। नदी स्वच्छता, वृक्षारोपण, नशामुक्ति जैसे अभियानों में सहभागिता के लिए उनमें विशेष रुचि दिखाई दी।
 
रक्तदान शिविर
आयोजन स्थल पर तीनों दिन सवाई मानसिंह अस्पताल संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल और स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक के तीन मोबाइल यूनिटों में रक्तदान शिविर लगाया  गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने रक्तदान किया।

नि:शुल्क पौध वितरण
महायज्ञ में भाग लेने वाले व्यक्तियों को तरु प्रसाद के रूप में लगभग एक दर्जन विभिन्न प्रजातियोंं के पौधे निशुल्क उपलब्ध कराए  गए। प्रभारी विष्णु गुप्ता ने बताया कि  लोगों को आंवला, अमरूद, करुंदा, नींबू, पपीता, गुड़हल, टिकोमा, नागदून, पत्थरचट्टा, तुलसी, कचनार, मेहंदी जैसे विभिन्न पौधे तरु प्रसाद के रूप में निशुल्क उपलब्ध कराए गए।

आकर्षक प्रदर्शनी  
प्रतापगढ़ से आए गायत्री परिजन कुलदीप सिंह राणावत ने यहां १० ७ १० के ४० फलैक्स पर प्रदर्शनी लगाई। वे २०११ से प्रदर्शनी लगा रहे हैं। इसमें महिला सशक्तीकरण का संदेश अत्यंत प्रभावशाली था। छोटी-सी प्रदर्शनी में गायत्री परिवार का समग्र परिचय देने के सुंदर प्रयास किये गये।


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