Published on 2018-02-04
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पुष्कर। राजस्थान

गतवर्ष राजस्थान के आठ जोनों में अश्वमेध यज्ञों की रजत जयंती में विराट यज्ञ समारोह आयोजित हुए। इनमें उभरे उत्साह का सुनियोजन करते हुए प्रांतीय संगठन ने अगले तीन वर्षों में पूरे राजस्थान में गाँव- गाँव का मंथन कर उसे गायत्रीमय बना देने की योजना तैयार की है। १० दिसम्बर को जयपुर में हुई प्रांतीय गोष्ठी में इसके लिए विस्तृत योजना बनायी गयी। तत्पश्चात् जिलेवार गोष्ठियाँ आयोजित कर उन्हें अंतिम रूप दिया गया।

अनुयाज कार्ययोजना
  • २० हजार गाँवों का मंथन होगा।
  • १२ हजार शक्तिकलश स्थापित किये जायेंगे। इनके सान्निध्य में एक- एक घर में ७ या ९ दिन के सामूहिक साधना अनुष्ठान होंगे। हर अनुष्ठान के बाद गली, गाँव, मोहल्लों में उन्हें अगले घर में पहुँचाया जायेगा।
  • हर गाँव, मोहल्ले, वॉर्ड में २४- २४ वृक्षारोपण, ग्रामतीर्थ की स्थापना।
  • एक करोड़ वृक्षों का आरोपण बनास एवं सहायक नदियों के आसपास।
  • २० हजार विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा। वर्ष २०१८ में २० लाख छात्रों को शामिल करना।
  • हर प्रमुख शक्तिपीठ पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन।
  • १०- १० गाँवों के बीच ५ से २४ कुण्डीय यज्ञों के संचालन के लिए टोलियों का गठन।
  • हर जिले में ५ दिवसीय तीर्थ प्रदक्षिणा यात्राएँ।
  • विचार क्रांति के लिए हर जिले में ज्ञानरथ और प्रचार वाहन।
  • २० हजार बाल संस्कार शालाओं का संचालन।

बसंत पंचमी पर घर- घर यज्ञ हुए

बसंत पंचमी से पूरे राजस्थान में यह अनुयाज योजना आरंभ हो गयी। प्रथम कार्यक्रम के रूप में वसंत पंचमी से एक दिन पूर्व घर- घर एक कुण्डीय यज्ञ अथवा दीपयज्ञों के आयोजन हुए। २१ जनवरी को पूरे प्रदेश में ऐसे १०,००० से अधिक कार्यक्रम होने के समाचार मिले हैं। पर्व के दिन सभी याजकों को शक्तिपीठों पर आमंत्रित कर उनके सम्मेलन किये गये।


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