सुदर्शक
चक्रधारी श्रीकृष्ण के आविर्भाव को धर्मनगरी के विभिन्न आश्रमों, संस्थानों में धूमधाम मनाया गया। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मुख्य सभागार में जन्माष्टमी का पर्व वैदिक परंपरानुसार पुरुष सूक्त के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को श्रीकृष्ण के शांतिप्रियसमाजोत्थान परक कार्यों का अनुसरण करते हुए समाज में विघटनकारी समुदाय को सही मार्ग दिखाने के संकल्प लेने की प्रेरणा दी गयी। श्रीकृष्ण ने जिस तरह से सुनियोजित रीतिनीति अपनाकर कुविचारों को अपने तार्किक सुविचारों से स्थापित किया, उसी तरह वर्तमान समाज में सुरसा की तरह मुँह खोले भ्रष्टाचार, कुप्रथा आदि को दूर करने के लिये सैकड़ों युवाओं ने संकल्प लिये।

शांतिकुंज
के मुख्य सभागार में आयोजित इस समारोह को सम्बोधित करते हुए श्री श्याम बिहारी दुबे ने श्रीकृष्ण के आविर्भाव से लेकर महाभारत सम्पन्न होने तक के जीवन प्रसंगों की संगीतबद्ध प्रस्तुति की। उन्होंने अत्यंत मार्मिक व प्रेरणाप्रद कहानियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि आज समाज में कई कंस, दुर्योधन, दुस्शासन हैं, उनसे लड़ने के लिए ऐसे कर्मयोगियों की आवश्यकता है जो समाज से बुराइयों व भ्रष्टाचार, आतंक को मिटा सकें। मुख्य पूजा स्थली पर राकेश् प्रताप सिंह सपत्नीक पूजा करने का किया। इस अवसर पर संगीत विभाग के भाइयों द्वारा प्रेरणाप्रद कृष्ण भक्ति के गीत प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनते हुए लोग श्रद्धा से झूम उठे।





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