Published on 2019-08-25
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जिंदगी में टेक्नोलॉजी के समावेश से विकास, प्रगति और सफलता का आकलन समृद्धि और सम्पदा से होने लगा है। आज की भागदौड़ की जिंदगी में प्रगति का अर्थ प्रतिद्वन्द्विता हो गया है। जिंदगी थकाने वाली हो गई है।


लेकिन पद और पैसे से व्यक्तित्व नहीं निखरता। पैसे तो लुटेरे और जुआरी भी कमा लेते हैं, लेकिन कोई नचिकेता, विवेकानन्द और आचार्य श्रीराम शर्मा नहीं बन जाता। व्यक्तित्व साधना और संस्कारों से निखरता है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय का लक्ष्य है उच्च शिक्षा के साथ- साथ व्यक्तित्व परिष्कार। यहाँ का कण- कण, यहाँ की हवा, भगवान महाकाल आपके व्यक्तित्व में हर पल उत्कृष्टता का समावेश करेंगे। ज्ञानदीक्षा के समय आपको यह तय करना है कि हम यहाँ से लेकर क्या जायेंगे?

डॉ. चिन्मय पण्ड़या, प्रतिकुलपति, देव संस्कृति विवि.


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