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सामूहिक उत्कर्ष के लिए सामूहिक साधना समग्र क्रान्ति-महाक्रान्ति को विश्वव्यापी-प्रचण्ड बनाने के लिए कमर कसें युवा क्रान्ति वर्ष के निष्कर्ष क्रान्तिकारी, सृजनशील और शानदार निकलें युगसृजेता सुनें पाञ्चजन्य का उद्घोष शुनिशेपों की खोज रूढ़ियों में न भटकें, विवेक मार्ग अपनायें महालक्ष्मी को प्रसन्न करके उनकी विशेष अनुकम्पा प्राप्त करने का दीपावली पर्व गायत्री उपासना- प्रकाश की साधना मन के हारे हार है मन के जीते जीत प्रखर साधना करें, ईश्वर को पाने की नहीं, अनुभव करने की इस नवरात्र को नौ वर्षीय साधना अभियान का जीवन्त अंग बनायें भक्ति साधना से शक्ति, ज्ञान साधना से प्रगति, कर्म साधना से सिद्धि पायें आत्मा समर्पण की साधना से मिलता हैं परमात्मा उत्थान और पतन का आधार- संवेदना युग निर्माण अभियान बनाम पाँच वर्षीय राष्ट्र जागरण अभियान Today Thought BSGP Exam at South Kolkata एक नई सोच नदी,कुयें को साफ करने का नया तरीका-फिटकरी के गणपतिजी

युगसृजेता सुनें पाञ्चजन्य का उद्घोष

समझदारी अपनायें, श्रेय- अनुदान पायें

बात प्रौढ़ों और प्रखरों से
ऐतिहासिक महाभारत में भारत देश को विशाल भारत के रूप में विकसित करने की योजना थी। आज का लक्ष्य एवं प्रसंग ऊँचा है। अब मनुष्य को महामानव, धरातल को स्वर्ग लोक बनाने की तैयारी है। पतन की दिशा में प्रवाहमान लोक मानस को मानवी गरिमा का गला घोंट डालने से कठोरतापूर्वक रोकना है। पतनोन्मुख प्रवाह को उलटना कितना कठिन ...

शुनिशेपों की खोज

एक पौराणिक कथा
एक बार इन्द्र देव ने कुपित होकर दुष्ट दुरात्मा प्रजाजनों के दुष्कर्मों का दण्ड देने के लिए उन्हें वर्षा का अनुदान देना बन्द कर दिया। बारह वर्षों तक लगातार दुर्भिक्ष पड़ा। पानी न बरसने से घास- पात, पेड़- पौधे, जलाशय सब सूख गये। अन्न उपजना बन्द हो गया। तृषित और क्षुधित प्राणी त्राहि- त्राहि करके प्राण त्यागने लगे। सर्वत्र हा- हाकार मच गया।

स्थिति असह्य हो गयी ...

रूढ़ियों में न भटकें, विवेक मार्ग अपनायें

समय- शक्ति को व्यसन से बचायें, सृजन में लगायें

सनातन दर्शन
भारतीय संस्कृति को 'सनातन' कहा गया है। सनातन का अर्थ होता है जिसका अस्तित्व अनादिकाल से बना रहा है और अनन्त काल तक बना रहेगा। जो सनातन है, वही सत्य है, वही अनश्वर है। परम पिता परमात्मा या माँ आदिशक्ति- चित्शक्ति सत्य- सनातन है। उसकी रची हुई माया परिवर्तनशील है, नश्वर है, उसके रूप बदलते रहते हैं। सभी वस्तुओं और ...

गायत्री उपासना- प्रकाश की साधना

ज्योति है तो जीवन हैअध्यात्म विज्ञान में स्थान- स्थान पर प्रकाश की साधना और प्रकाश की याचना की चर्चा मिलती है। यह प्रकाश बल्ब, बत्ती अथवा सूर्य आदि से निकलने वाला उजाला नहीं वरन् वह परम ज्योति है जो इस विश्व में चेतना का आलोक बनकर जगमगा रही है। गायत्री के उपास्य सविता देवता इसी परम ज्योति को कहते हैं। इसका अस्तित्व प्रत्येक व्यक्ति ऋतम्भरा प्रज्ञा के रूप में प्रत्यक्ष और कण- ...

महालक्ष्मी को प्रसन्न करके उनकी विशेष अनुकम्पा प्राप्त करने का दीपावली पर्व

माता महालक्ष्मी का अनुग्रह पाने के लिए दीपावली श्रद्धापूर्वक मनायें
किन्तु, अन्ध परम्पराओं के मोह में माँ की प्रतिष्ठा न गिरायें, उनका मन न दुखायें

पर्वों का प्रयोजन
भारत के ऋषि- मनीषियों ने मानव जीवन की हर धारा को दिव्य अनुशासनों, उच्च आदर्शों, लोकमंगल की प्रवृत्तियों से जोड़ने के लिए अनोखे और सफल प्रयोग किए हैं। मनुष्य अपने आप में अद्भुत क्षमताओं से सम्पन्न है, किन्तु ...

मन के हारे हार है मन के जीते जीत

मन मान जाता है, मनाइये तो सही - मन अधोगामी नहीं है ।
प्राय: लोगों की यह शिकायत होती है कि हमारा मन बुराई से हटता नहीं। इच्छा तो बहुत करते हैं, धर्मानुष्ठान भी चलाते हैं, जप और उपासना भी करते हैं, किन्तु मन विषयों से हटता नहीं। बुराइयाँ हर क्षण मस्तिष्क में आती रहती हैं।

जब ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं तो लगता है मन ही सब कुछ है, वही जीवन की सम्पूर्ण गतिविधियों का संचालन करता ...

प्रखर साधना करें, ईश्वर को पाने की नहीं, अनुभव करने की

सुनिश्चित नीति अपनायें, त्यागपूर्वक भोग करने की
सच्चाई समझें, अपनायेंसंत तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में मानव जीवन को धन धाम, मोक्षकर द्वाराज् अर्थात् अनुपम साधनों का भण्डार और मोक्ष का दरवाजा कहा है। दोनों बातें थोड़े चिन्तन से ही समझ में आने लगती हैं।
साधन धाम- यह है। मनुष्य के अतिरिक्त और कोई प्राणी चित्र- विचित्र संसाधनों का सृजन और उपयोग करने की कुशलता कहाँ विकसित कर ...

इस नवरात्र को नौ वर्षीय साधना अभियान का जीवन्त अंग बनायें

प्रस्तुत नवरात्र
आश्विन नवरात्र का पर्व सामने है। दिनांक २१ सितम्बर से २९ सितम्बर तक यह नवरात्र चलेगी। इस बार कोई तिथि घटी- बढ़ी नहीं है, इसलिए प्रतिपदा से नवमी तक पूरे ९ दिन हो जायेंगे। यों तो परिजन प्रति वर्ष की तरह व्यक्तिगत एवं सामूहिक अनुष्ठान संकल्पित जप- तप के साथ करेंगे ही, लेकिन इसका अपना कुछ विशेष महत्त्व भी है। विगत गुरुपूर्णिमा से प्रारंभ किए गये नौ वर्षीय ...

भक्ति साधना से शक्ति, ज्ञान साधना से प्रगति, कर्म साधना से सिद्धि पायें

आयोजनों से जुड़ें शक्ति संवर्धन- संगठन के सुनिश्चित लक्ष्य 
नयी दृष्टि- नयी सृष्टि वर्ष २०१७- १८ की आयोजन शृंखला प्रारम्भ होने जा रही है। ध्यान रहे कि इसे नौ वर्षीय मातृशक्ति श्रद्धाञ्जलि महापुरश्चरण का प्रथम- सशक्त, प्रभावशाली चरण बनाना है। इसके लिए ऋषिसत्ता से नयी दृष्टि लेकर नयी सृष्टि करने के विवेकपूर्ण संकल्प करने और तद्नुसार साहसिक कदम बढ़ाने होंगे। 
मनुष्य का ...

आत्मा समर्पण की साधना से मिलता हैं परमात्मा

दो विकल्प आत्मा की परिपूर्णता प्राप्त कर परमात्मा में प्रतिष्ठित होने के दो मार्ग हैं- एक प्रयत्नपूर्वक प्राप्त करना और दूसरा अपने आपको सौंप देना। प्रथम मार्ग में विभिन्न साधनाएँ करनी पड़ती हैं, चिन्तन, मनन, ज्ञान के द्वारा विभिन्न उपक्रमों में सचेष्ट रहना पड़ता है। दूसरी ओर सम्पूर्ण भाव से परमात्मा के प्रति समर्पण करना पड़ता है। तरह- तरह की साधनाएँ, विधि- विधानों का ...





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