Initiative News

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निवेदिता बाल संस्कार शाला, कोलकाता

कोलकाता  : गायत्री परिवार यूथ ग्रुप कोलकाता द्वारा बच्चों में अच्छे संस्कारों का बीजारोपण करने के लिए निवेदिता बाल संस्कार शाला चलाई जा रही है | जिसके माध्यम से इस देश की भावी पीढ़ी का निर्माण किया जा रहा है |  

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Scientific Evidence of Garbh Sanskar, Kanpur

Gayatri Pariwar Kanpur was conducted a session on " Scientific Evidence of Garbh Sanskar " in the Teacher's workshop of Cantonement board schools.  It was an interactive , lively session attended by 100 teachers . We also dicussed how this lifestyle modification needs to be implemented from early school days .

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आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी

बच्चों का पालन-पोषण की भूलें हैं जीवन में तनाव और समाज में बिखराव की जिम्मेदार -डॉ. गायत्री शर्मा चंद्रपुर। महाराष्ट्र आज उच्छृंखल होती जा रही युवा पीढ़ी, बिखरते परिवार, जीवन में बढ़ता तनाव यह सब हमारी उस भूल का दुष्परिणाम है जिसके द्वारा माताएँ अपने गर्भकाल में आने वाले शिशु के समुचित विकास के प्रयास नहीं कर पायीं। उन दिनों या तो वे अनजान थीं अथवा पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में खो गई थीं। यह भूल हमें अब नहीं दोहरानी चाहिए। गर्भवती माताओं को अपने नौ माह के गर्भकाल को एक तपस्या मानते हुए इन दिनों में अपने आहार- विहार का पूरा- पूरा ध्यान रखना चाहिए। माता- पिता के साथ पूरे परिवार का आचरण, चिंतन, व्यवहार वैसा होना चाहिए, जैसा कि हम अपने बच्चे के संस्कार चाहते हैं, क्योंकि शिशु का व्यक्तित्व विकास उसके गर्भकाल से ही आरंभ हो जाता है। 'आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी' अभियान की प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. गायत्री शर्मा ने यह संदेश गायत्री शक्तिपीठ चंद्रपुर पर आयोजित एक विषेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया। इस अवसर पर पावर पॉइण्ट के सहारे गर्भ काल में माता के विचार- व्यवहार से बच्चे पर पड़ने वाले प्रभावों को वैज्ञानिक प्रतिपादनों के साथ विस्तार से समझाया। चंद्रपुर, गडचिरोली, नागपुर सहित दूर- दूर के परिजन कार्यक्रम में उपस्थित थे। शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. ओ.पी. शर्मा ने तनाव प्रबंधन के जीवन शैली तथा चिंतन में सकारात्मक बदलाव लाने के सूत्र दिये। इस अवसर पर जोन समन्वयक शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री अशोक ढोके भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में आगामी नवम्बर माह में आयोजित हो रहे १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की सफलता के लिए चलाये जा रहे मंत्र लेखन अभियान की पुस्तिका का विमोचन किया गया। • राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त प्राचार्य श्री नरेन्द्र बोबड़े का तथा उदारमना वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्रीमती प्रभाताई मामिडवार के जन्मदिन के उपलक्ष्य में उनका विशेष सत्कार किया

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सभ्य समाज के निर्माण में चिकित्सकों का योगदान

गाज़ियाबाद में हुए दो सेमीनार, गर्भवती बहनों में जागरूकता बढ़ाएँगे३५० चिकित्सकों ने लाभ लिया।अपने क्लीनिक के स्वागत कक्ष पर पोस्टर, बैनर, हैंगर टांगने तथा ब्रोशर व संबंधित पुस्तक, संबंधित टीवी प्रेज़ेण्टेशन आदि माध्यमों से गर्भवती बहनों को इस संदर्भ में जागरूक करने का आश्वासन दिया।गाज़ियाबाद। उत्तर प्रदेशचिकित्सकों को संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण में उनकी विशिष्ट भूमिका का बोध कराने और तनावमुक्त जीवन के सूत्र प्रदान करने के उद्देश्य से दो सेमीनार आयोजित हुर्इं। २३ फरवरी को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन गाज़ियाबाद पूर्व के भवन में तथा २४ फरवरी को नेशनल आयुर्वेद स्टूडेंट एवं यूथ एसोसिएशन द्वारा ये सेमीनार हुर्इं, जिनमें क्रमश: १५० एवं २०० चिकित्सकों ने भाग लिया।'आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी' अभियान संयोजक शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. गायत्री शर्मा ने इन्हें संबोधित करते हुए आज की युवा पीढ़ी में गिरते नैतिक मूल्यों का प्रमुख कारण गर्भकाल से ही बच्चे के व्यक्तित्व विकास पर ध्यान न देना बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे के व्यक्तित्व और मस्तिष्क का ८० प्रतिशत विकास गर्भकाल में ही हो जाता है, अत: माता और उनके परिवारी जनों को गर्भिणी के आहार, विहार, विचार, व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सक इस दिशा में उनका मार्गदर्शन करते हुए उत्तम संस्कार वाले बच्चों और परोक्ष रूप से सभ्य, सुसंस्कृत समाज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. ओ.पी. शर्मा ने तनावमुक्त जीवन जीने के लिए उपासना, साधना, जप, ध्यान, स्वाध्याय आदि की उपयोगिता को पावर पॉइण्ट के माध्यम से समझाया।आईएमए गाज़ियाबाद की सेमीनार का शुभारंभ शांतिकुंज प्रतिनिधियों के संग आईएमए के अध्यक्ष डॉ. शलभ गुप्ता, डॉ. डी.पी. सिंह, डॉ. प्रकाश द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। एनएएसवायए की सेमीनार में प्रेसिडेण्ट तथा जनरल सेक्रेटरी डॉ. पूजा कोहली, डॉ. चारु त्रिपाठी विशेष रूप से उपस्थित रहे।सेमीनार अत्यंत प्रभावशाली रही। चिकित्सकों ने अपने क्लीनिक के स्वागत कक्ष पर पोस्टर, बैनर, हैंगर टांगने तथा ब्रोशर व संबंधित पुस्तक, संबंधित टीवी प्रेज़ेण्टेशन आदि माध्यमों से गर्भवती बहनों को इस संदर्भ में जागरूक करने का आश्वासन दिया। दोनों सेमीनारों के आयोजन में डॉ. शर्मा, डॉ. आलोक शर्मा, डॉ. पूर्णिमा वाजपेयी, डॉ. चारु त्रिपाठी, श्रीमती प्रज्ञा शुक्ला आदि ने पूरे मनोयोग से सहयोग किया।