सभ्य समाज के निर्माण में चिकित्सकों का योगदान

Published on 2018-03-21
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गाज़ियाबाद में हुए दो सेमीनार, गर्भवती बहनों में जागरूकता बढ़ाएँगे

  • ३५० चिकित्सकों ने लाभ लिया।
  • अपने क्लीनिक के स्वागत कक्ष पर पोस्टर, बैनर, हैंगर टांगने तथा ब्रोशर व संबंधित पुस्तक, संबंधित टीवी प्रेज़ेण्टेशन आदि माध्यमों से गर्भवती बहनों को इस संदर्भ में जागरूक करने का आश्वासन दिया।

गाज़ियाबाद। उत्तर प्रदेश

चिकित्सकों को संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण में उनकी विशिष्ट भूमिका का बोध कराने और तनावमुक्त जीवन के सूत्र प्रदान करने के उद्देश्य से दो सेमीनार आयोजित हुर्इं। २३ फरवरी को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन गाज़ियाबाद पूर्व के भवन में तथा २४ फरवरी को नेशनल आयुर्वेद स्टूडेंट एवं यूथ एसोसिएशन द्वारा ये सेमीनार हुर्इं, जिनमें क्रमश: १५० एवं २०० चिकित्सकों ने भाग लिया।

'आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी' अभियान संयोजक शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. गायत्री शर्मा ने इन्हें संबोधित करते हुए आज की युवा पीढ़ी में गिरते नैतिक मूल्यों का प्रमुख कारण गर्भकाल से ही बच्चे के व्यक्तित्व विकास पर ध्यान न देना बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे के व्यक्तित्व और मस्तिष्क का ८० प्रतिशत विकास गर्भकाल में ही हो जाता है, अत: माता और उनके परिवारी जनों को गर्भिणी के आहार, विहार, विचार, व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सक इस दिशा में उनका मार्गदर्शन करते हुए उत्तम संस्कार वाले बच्चों और परोक्ष रूप से सभ्य, सुसंस्कृत समाज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. ओ.पी. शर्मा ने तनावमुक्त जीवन जीने के लिए उपासना, साधना, जप, ध्यान, स्वाध्याय आदि की उपयोगिता को पावर पॉइण्ट के माध्यम से समझाया।

आईएमए गाज़ियाबाद की सेमीनार का शुभारंभ शांतिकुंज प्रतिनिधियों के संग आईएमए के अध्यक्ष डॉ. शलभ गुप्ता, डॉ. डी.पी. सिंह, डॉ. प्रकाश द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। एनएएसवायए की सेमीनार में प्रेसिडेण्ट तथा जनरल सेक्रेटरी डॉ. पूजा कोहली, डॉ. चारु त्रिपाठी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सेमीनार अत्यंत प्रभावशाली रही। चिकित्सकों ने अपने क्लीनिक के स्वागत कक्ष पर पोस्टर, बैनर, हैंगर टांगने तथा ब्रोशर व संबंधित पुस्तक, संबंधित टीवी प्रेज़ेण्टेशन आदि माध्यमों से गर्भवती बहनों को इस संदर्भ में जागरूक करने का आश्वासन दिया। दोनों सेमीनारों के आयोजन में डॉ. शर्मा, डॉ. आलोक शर्मा, डॉ. पूर्णिमा वाजपेयी, डॉ. चारु त्रिपाठी, श्रीमती प्रज्ञा शुक्ला आदि ने पूरे मनोयोग से सहयोग किया।

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