Published on 2018-08-21

केरल में आई बाढ़ के प्रकोप से सभी भलीभाँति परिचित हैं। लगभग हर टेलीविजन चैनल पर दिखाए जा रहे बाढ़ के समाचार प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति को आहत कर रहे हैं। ८ अगस्त को बादल फटने से आरंभ हुई जल प्रलय की तांडव लीला आज (१६ अगस्त) तक थमने का नाम नहीं ले रही। ऐसे में 'मानव सेवा- माधव सेवा' को अपनाते हुए पीड़ित मानवता के दु:ख- दर्द में सदैव साथ दिखाई देने वाले गायत्री परिवार ने केरल के इन बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में भी सेवा कार्य अविलम्ब आरंभ कर दिए हैं। इस भीषण त्रासदी को देखते हुए गायत्री परिवार की सभी शाखाएँ अपने स्वतंत्रता दिवस और ओणम के सभी कार्यक्रम रद्द कर जरूरतमंदों तक सेवा- सहायता पहुँचाने में जुट गए हैं।

एर्नाकुलम से ३० कि.मी. दूर के मुन्नार की पहाड़ी, मालापुरम, वायनाड और आलुआ क्षेत्र बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हैं। जोन कार्यालय एर्नाकुलम (कोचीन) के जोन समन्वयक श्री अशोक अग्रवाल के नेतृत्व में अविलम्ब सेवाकार्य आरंभ कर दिए गए। आरंभ में खाने- पीने के समान जैसे पूड़ी, अचार, बिस्किट, ब्रेड और पानी आदि वितरित किये गये। तत्पश्चात् दक्षिण जोन प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ.ब्रजमोहन गौड़ से परामर्श कर राहत कार्यों के विधिवत् संचालन की विधि- व्यवस्था बनाई गई।

गायत्री परिवार के सदस्यों ने एर्नाकुलम जिला कलेक्टर श्रीमान मोहम्मद वाई सफीउल्ला (आईएएस) से मीटिंग करके राहत कैम्प को गति देने की योजना बनाई। उन्होंने परिस्थितियों और आवश्यकताओं की जानकारी देते हुए खाने- पीने के सामान की बजाय कपड़े, नाइटी, चादर व भोजन करने के प्लेट, बाल्टी, मग की प्रमुख आवश्यकता बताई। तद्नुसार परिजनों ने सबसे पहले १००० लोगों के लिए यह सारी व्यवस्थाएँ जुटाने का निर्णय लिया।

यह गुरुसत्ता का आशीर्वाद ही था
सामान खरीदने गये तब मात्र एक लाख रुपये हाथ में थे, लेकिन सामान का बिल तीन लाख रुपये का बना। सभी असमंजस में थे कुछ सूझ नहीं रहा था। तभी कुछ परिजनों के अपनी ओर से फ़ोन आये, उनका सहयोग मिला। देखते- देखते तीन लाख पाँच हजार रुपये एकत्रित हो गए। इसे गुरुसत्ता और गायत्री माता का संरक्षण- आशीर्वाद नहीं तो क्या कहा जाए!
राहत सामग्री की पहली खेप

१५ अगस्त के दिन बेस कैम्प से जिला प्रशासन की आवश्यकता के अनुरूप राहत सामग्री की पहली खेप गाड़ियों में भरकर वितरण के लिए रवाना की गई। प्रिंसिपल कमिश्नर इनकम टैक्स कोचीन श्री नरेन्द्र गौड़ एवं विश्व हिन्दू परिषद केरल राज्य के अध्यक्ष श्री एस.जे. कुमार ने मशाल ध्वज दिखाकर गाड़ियों को रवाना किया। इन गाड़ियों के माध्यम से १००० लुंगी, १००० नाइटी, १००० चादर, १००० खाने की प्लेटें, १००० प्लास्टिक की बाल्टियाँ, १००० प्लास्टिक जग, ५०० किलो नामक, ५ कार्टून सेलोटेप, एक टेम्पो भर कर कार्टून्स भेजे गए।

शिविर संचालकों ने बताया कि १९ अगस्त को भी १००० लोगों के लिए आवश्यक समान, विद्यार्थियों के लिए कॉपी, कलम, पुस्तकें, बैग, स्कूल ड्रेस आदि भेजे जाने की व्यवस्था की जा रही है।

राहत कार्यों में एर्नाकुलम के श्री अशोक अग्रवाल, श्री लाजपतराय कचौलिया, श्री रमन चोपड़ा, श्री पी़सी़ अग्रवाल, श्री महेश जी आदि अपने युवा साथियों के साथ तन, मन, धन से जुटे हैं। कालीकट और कुन्नूर में भी राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है। कालीकट में श्री एम टी विश्वनाथन जी, श्री ज्योतिष प्रभाकरन एवं कन्नूर डॉ. नारायण पुदुसेरी इसका नेतृत्व कर रहे हैं।

श्रद्घेय ड़ॉ. साहब एवं श्रद्धेया जीजी जी के मार्गदर्शन में दक्षिण जोन कार्यालय शान्तिकुंज, हरिद्वार से श्री उमेश कुमार शर्मा राहत सेवाओं में समन्वय स्थापित कर रहे हैं।


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