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सैन्य अधिकारियों की कार्यदक्षता बढ़ाने में सहयोग


  • आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी का ‘तनाव प्रबंधन’ पर व्याख्यान

सेना के उत्तरी क्षेत्र में
तनाव वस्तुतः व्यक्ति की दुर्बलता की प्रतिक्रिया है। जो बलवान होते हैं वे चुनौतियों का डटकर सामना करते और उन्हें परास्त करते हैं, लेकिन कमजोर उनसे भयभीत होते हैं। यद्यपि सेना के जवान शारीरिक रूप से सर्वाधिक सक्षम होते हैं, लेकिन उनके सामने चुनौतियाँ भी उतनी ही बड़ी हैं। संतुलित मनःस्थिति और आत्मबल के सहारे ही उन पर विजय प्राप्त की जा सकती है। 

अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने यह संदेश सेना के उत्तरी क्षेत्र में सेनाधिकारियों और सेना के जवानों को संबोधित करते हुए दिया। वे ‘तनाव प्रबंधन’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। सेना के कई स्टेशनों के जवान टेले कॉन्फरेंसिंग के माध्यम से जुड़े, अपने प्रश्नों का जवाब प्राप्त किया। 

शांतिकुंज प्रतिनिधि ने तनाव प्रबंधन के लिए अध्यात्मिक जीवन को सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए मन को सबल बनाना जरूरी है। उपासना, साधना, आसन, प्राणायाम, ध्यान जैसी क्रियाएँ आत्मिक शक्तियाँ बढ़ाती हैं। शरीर बल से नहीं, व्यक्ति आत्मबल से प्राणवान, संकल्पवान, साहसी, तेजस्वी बनता है। चुनौतियाँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों धैर्य, साहस और सूझबूझ से हर चुनौती का समाधान संभव है। 

तनाव एक धीमा जहर है। जो अध्यात्म को अपनाते हैं वे हताशा, निराशा, चिंता, क्षोभ से दूर रहते हैं। जीवन में परम पूज्य गुरुदेव का बताया ‘सादा जीवन-उच्च विचार’ का सूत्र अपनाने से अनेक प्रकार के तनाव स्वतः ही दूर हो जाते हैं। व्यक्ति के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य का राज इस सूत्र में है। आहार अनुकूल हो तो शरीर स्वस्थ रहेगा, विचार उच्च हों तो मन प्रसन्न होगा। संकीर्णता छोड़ना, अपनत्व का विस्तार करना ही अध्यात्म है। 

अंत में सेना के मेजर जनरल ने शांतिकुंज प्रतिनिधि का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान किया। 









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