Published on 2017-10-28
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आत्मिक विकास में साधना महत्त्वपूर्ण : डॉ. प्रणव पण्ड्याजी

हरिद्वार, २८ अक्टूबर।
अमेरिका के 'द सेंटर फार थॉट ट्रांसफार्मेशन' का सात सदस्यीय दल साधनात्मक मार्गदर्शन प्राप्त करने शांतिकुंज एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय पहुँचा। इन्होंने शांतिकुंज में नियमित रूप से चलने वाले ध्यान, योग व हवन आदि में भागीदारी करते हुए विशेष साधना का प्रशिक्षण प्रारंभ किया।

दल का मार्गदर्शन करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि आत्मिक विकास में साधना महत्त्वपूर्ण है। इसके लिए अपने आहार में सात्विकता और विहार में पवित्रता रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साधना में रूचि रखने वाले अमेरिका के मूल निवासियों एवं शान्तिकुञ्ज के बीच 'द सेंटर फार थॉट ट्रांसफार्मेशन' सेतु का कार्य करेगा। इसके माध्यम से लोगों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि इस दिशा में युवाओं की बढ़ती भागीदारी से एक नया अध्याय जुड़ेगा, जो भारतीय संस्कृति के प्रचार- प्रसार में सहायक होगा। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदीजी ने कहा कि अमेरिकी युवाओं की साधना की ओर झुकाव भारतीय संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता का परिणाम है। इस अवसर पर श्रद्धेय डॉ. पण्ड्याजी व श्रद्धेया शैलदीदीजी ने अमेरिकी दल को साधना की पृष्ठभूमि एवं दैनिक दिनचर्या पर विस्तृत जानकारी दी।

यहाँ बताते चलें कि सन् २०१० में स्थापित 'द सेंटर फार थॉट ट्रांसफार्मेशन' की स्थापना सायमन डेनिस ने की है। उन्होंने अपने भारत प्रवास के दौरान देवभूमि में बिताये एक वर्ष के अनुभव को अमेरिकी युवाओं के बीच साझा करने के लिए श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी के निर्देशन में स्थापित किया है। इस मिशन से अब तक कई हजार युवाओं ने भागीदारी करते हुए अपनी दिशा व दशा में सार्थक परिवर्तन किया है। अमेरिकी दल को प्रशिक्षण देने में शांतिकुंज स्थित विदेश विभाग भी सक्रियता के साथ जुड़ा है।

विभाग के अनुसार इस दल में सायमन डेनिस, सिल्वी डेसा, एलिजाबेथ कैडल, उना मोर, हेना जेफरी, जॉन हॉल, कायल वेरिट प्रमुख हैं। शिविर को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए न्यूजर्सी अमेरिका से श्रीमती नृपाली पटेल साथ आई हैं। साधना के दौरान पञ्चकोशीय एवं सूर्य साधना, ध्यान, योग, यज्ञ का ज्ञान विज्ञान, प्रज्ञायोग, साइंस आफ मंत्रा, हृयूमन एक्सीलेंस, गायत्री का वैज्ञानिक स्वरूप आदि विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिये जायेंगे।


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