Published on 2017-12-23

हरकीपौड़ी के पास नहीं मिलने चाहिए सीवर के नाले : डॉ. प्रणव पण्ड्याजी
पश्चिमी उप्रउत्तराखंड के १६ जिलों के लोगों ने की भागीदारी
साथ ही हाथ बढ़ाना साथी रे के साथ गंगा में उतरे शांतिकुंज कार्यकर्ता


श्रमदान में सत्संकल्पों की ऊर्जा भर जाए, तो वह महाश्रमदान बन जाता है। श्रमदान के ऐसे ही स्वरूप की मनोरम झांकी कुंभनगरी हरिद्वार का हृदय स्थल माने जाने वाले हरकी पौड़ी से लेकर ललिताराव पुल के बीच देखने को मिली। गंगा क्लोजर के अवसर पर आज अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा गंगा स्वच्छता कार्यक्रम संपन्न हुआ। हाथों में खुरपी, फावड़ा, तगाड़ी, झाडू लिए हजारों पीतवस्त्रधारी लोकसेवी गंगा मैय्या की गोद में सेवारत थे।

हरकी पौड़ी से लेकर ललिताराव पुल तक को सेक्टरों में बाँटकर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में करीब हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने अनुशासित होकर अपने- अपने कार्यक्षेत्र में खूब पसीना बहाया। नन्हों से लेकर वयोवृद्धों तक इस अभियान में उत्साहित होकर स्वच्छता में जुटे रहे। इन लोगों ने मानव शृंखला बनाकर गंगा मैय्या की गोद से कई टन कूड़े- कचरे निकाल कर तटों पर इकट्ठा किया।

अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि गायत्री परिवार ने गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक २५२५ किमी की दूरी तय करने वाली पापनाशिनी माँ गंगा को स्वच्छ करने का बीड़ा उठाया है। इस हेतु आज का यह स्वच्छता पर्व भी हम मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी काम टोकन के रूप में नहीं करना चाहिए। एक दिन, दो दिन करने से गंगा स्वच्छ नहीं होने वाली। हमें तो गंगोत्री से गंगासागर तक कई चरणों में कार्य करना है। उन्होंने कहा कि २०२६ तक हमें निरन्तर यह कार्य करना है। इस अवसर पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अभी जहाँ पर हम लोग बैठे हैं, वह सबसे पवित्र तीर्थ है। किन्तु इसके आस पास १२ से १४ सीवर के नाले आकर सीधा गंगा में मिलते हैं। इन दिनों गंगा क्लोजर के कारण जो जल आचमन के लिए छोड़ा गया है, उसमें इन सीवर का पानी आकर मिलता है। उसी का हम आचमन करते हैं। हरिद्वार से आगे औद्योगिक कचरा भी इसमें मिलता जा रहा है।

डॉ. पण्ड्याजी ने प्रधान मन्त्री के सांसद ग्राम योजना का जिक्र करते हुए कहा कि हिमालय हमारा मायका है। मायके से गंगा की शुद्धता के साथ गंगा सागर तक हमें कई चरणों में कार्य करना है। इन्ही में आदर्श ग्राम विकसित करना भी एक चरण है। उन्होंने कहा कि गंगा के दोनों तटों पर बसने वाले लोगों में जन जागरण किया जा रहा है। उन्हें भारत की जीवनदायिनी माँ गंगा को निर्मल बनाये रखने में सहयोग करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी आवश्यकता आस्था और विचारों को बदलने की है। माँ को दूषित कर पुण्य कमाने की मानसिकता को हमें बदलना है। सारा कचरा माँ के पेट में डालकर पुण्य कमाने के भ्रम को मिटाना होगा। जनमानस को बदले बिना देश की नदियों का शुद्धीकरण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार गंगा के साथ सारे देश के जलाशयों और पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए सशक्त अभियान चला रहा है, जिसका समाज पर प्रभाव भी दिखाई पड़ रहा है। इस क्रम में गंगा से गंगासागर के दो चरण का कार्य पूरा हो चुका है। तीसरे चरण के अंतर्गत अमृत कलश रथ उत्तराखंड, उप्र, बिहार व पं० बंगाल में चल रहा है।

इस अवसर पर शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्माजी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विचारों की सार्थकता उन्हें व्यवहार में लाने में है। पूज्य गुरुदेव ने ज्ञान की जो गंगा बहाई है, वह हमारे व्यवहार में उतरकर प्रवाहित होनी चाहिए। विचारों के परिवर्तन से ही गंगा स्वच्छ और निर्मल हो सकती है। आज का गंगा सफाई अभियान वस्तुतः अपने मन को पवित्र बनाने का पर्व है।

मुख्य सभा में जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी नरेश चौधरी, मेयर मनोज गर्ग, लोकसेवा आयोग के सचिव श्री पाण्डेजी सहित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, डॉ. ओपी शर्मा, हरीश ठक्कर, केसरी कपिल आदि गणमान्य उपस्थित थे। सभा का संचालन केदार प्रसाद दूबे ने किया।

वहीं जन जागरण रैली में पश्चिमी उप्र एवं उत्तराखंड के १६ जिलों के विभिन्न शाखाओं के कार्यकर्ता भाई- बहिन, शांतिकुंज के अंतेःवासी कार्यकर्त्तागण, देवसंस्कृति विवि परिवार, गायत्री विद्यापीठ, युग निर्माण स्काउट गाइड, आपदा प्रबंधन टीम एवं विभिन्न शिविरों में आये करीब सात हजार से अधिक लोगों ने भागीदारी की। वहीं विदेशों से शांतिकुंज पहुँचे श्रद्धालुओं ने भी गंगा सफाई में भागीदारी की।


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