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तृतीय अश्वमेधिक यज्ञानुष्ठान श्रृंखला का शुभारम्भ १४ अप्रैल २०१५ से हो रहा है।
कृपा करके आप अपने परिवार, रिश्तेदार ,मित्र ,पड़ोसियों और संस्था इत्यादि में फ़ोन ,मैसेज ,ईमेल ,SMS ,फेसबुक ,ट्विटर ,, व्हाट्स उप इत्यादि द्वारा भेज कर उन्हें परमात्मा के इस दिव्य आयोजन में सम्मिलित करके महा पुण्य के भागीदार बनाने के लिए प्रोत्साहित करे ।


अश्वमेध यज्ञानुष्ठान एक दिव्य पुरुषार्थ है । कोई भी श्रेष्ठ पुरुषार्थ, श्रेष्ठ भावना एवं श्रेष्ठ विचारणा के बिना सम्पन्न नहीं हो सकता । यज्ञीय पुरुषार्थ के लिए व्यापक स्तर पर यज्ञीय भावना का विकास- विस्तार अनिवार्य होता है ।

"अखण्ड ज्योति" के इसी विवरण को ध्यान में रखते हुए, परिजनों ने ४१ वे "अश्वमेध गायत्री महायज्ञ" कन्याकुमारी (२८ -३१ जनवरी २०१६ )) के लिए २४ -२४ लाख के ५४ महापुरश्चरण करने का संकल्प लिया है । इस संकल्प में आप भी अपना साधना पुरुषार्थ का सहयोग दे कर सहभागी बने ।

आप अपने सुविधा के अनुसार नीचे सुझाये गए किसी भी संकल्प को ले कर अनुष्ठान शुरू कर सकते हैं ।

२४००० गायत्री मंत्र जप (२४०० गायत्री मंत्र लेखन या २४० गायत्री चालीसा )

५४००० गायत्री मंत्र जप (५ ४०० गायत्री मंत्र लेखन या ५ ४० गायत्री चालीसा) 

१.२५ लाख गायत्री मंत्र जप (१२५०० गायत्री मंत्र लेखन या १२५० गायत्री चालीसा)

२.५० लाख गायत्री मंत्र जप (२५००० गायत्री मंत्र लेखन या २५०० गायत्री चालीसा)

५ लाख गायत्री मंत्र जप (५०००० गायत्री मंत्र लेखन या ५००० गायत्री चालीसा)

नए परिजन को भी आप एक ,दो ,तीन माला ,१०- २० मंत्र लेखन या १- २ चालीसा प्रतिदिन करने के लिए प्रोत्साहित करके उन्हें भी परमात्मा के इस दिव्य आयोजन में सम्मिलित करके महा पुण्य के भागीदार बने ।

अनुष्ठान श्रृंखला सूची :-

पहला अनुष्ठान चरण :: २४ जनवरी

दूसरा अनुष्ठान चरण :: ५ मार्च

तीसरा अनुष्ठान चरण :: १४ अप्रैल

चौथा अनुष्ठान चरण :: २४ मई

पांचवा अनुष्ठान चरण :: ३ जुलाई

छठा अनुष्ठान चरण :: १२ अगस्त

सातवाँ अनुष्ठान चरण :: २१ सितम्बर

आठवाँ अनुष्ठान चरण :: ३१ अक्टूबर

नौवा अनुष्ठान चरण :: १० दिसंबर 

पंजीकरण :-

आप अपने आप को निम्नलिखित विधि द्वारा पंजीकृत कर सकते हैं ।


ईमेल :- gayatriashwamedha@gmail.com 

कृपा करके आप अपने परिवार, रिश्तेदार ,मित्र ,पड़ोसियों और संस्था इत्यादि में फ़ोन ,मैसेज ,ईमेल ,SMS ,फेसबुक ,ट्विटर ,, व्हाट्स उप इत्यादि द्वारा भेज कर उन्हें परमात्मा के इस दिव्य आयोजन में सम्मिलित करके महा पुण्य के भागीदार बनाने के लिए प्रोत्साहित करे । 
मंगल कार्य के लिए संकल्पित होना एवं परिजनों के मंगल संकल्पों में सहभागी होना दोनों ही महत्त्वपूर्ण पुण्य कर्म हैं । 





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