Published on 2016-06-14

अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी  ने कहा कि गंगा, गायत्री के साथ युवा शक्ति की मिलने से सम्पूर्ण समाज का उद्धार होगा। गंगोत्री से गंगासागर तक २५२५ किमी दूरी तय करने वाली पतित पावनी मां गंगा सहित ३० सहायक नदियों में स्वच्छता अभियान चलाया जायेगा, साथ ही इन नदियों के दोनों तटों में वृहद स्तर  पर वृक्षारोपण भी किया जायेगा। इन कार्यों के लिए गायत्री परिवार के दस लाख से अधिक स्वयंसेवी जुटेंगे। 

वे करोड़ों अनुयायियों के श्रद्धा के केन्द्र शांतिकुंज के मुख्य सत्संग हॉल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर यमन, कम्बोडिया, दक्षिण कोरिया, मॉरिसश, अफगानिस्तान सहित कई देशों के हजारों नर नारी उपस्थित थे। गायत्री परिवार के प्रमुख ने कहा कि गंगा व गायत्री में विशेष सामंजस्य है। गंगा मानव को पवित्र करती है तो गायत्री बुद्धि को प्रखर बनाती है। स्वर्ग जैसा माहौल गंगा की पवित्रता की प्रेरणा से बन सकता है तो मानव में देवत्व जैसा वातावरण गायत्री के नियमित उपासना से संभव है। गंगा व गायत्री के तीन- तीन चरण हैं जो मानव को महामानव बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। 

युवाओं के प्रेरणास्त्रोत डॉ. पण्ड्या ने कहा कि युवा क्रांति वर्ष- २०१६ के आरंभ से ही युवाओं को हनुमान की भांति बलवान, चरित्रवान बनाने हेतु योजनाएँ बनीं और कार्यान्वित की जा रही हैं। इसके अंतर्गत शांतिकुंज व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय पूरे मनोयोग से जुटे हैं। आने वाले दस वर्षों में १० करोड़ युवाओं को इस विधा से जोड़ने का लक्ष्य है जो समाज के उत्थान में अपनी प्रतिभा निःस्वार्थ भाव से लगायेंगे। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस २१ जून को गायत्री परिवार देश- विदेश में एक लाख से अधिक स्थानों पर शिविर लगायेगा, इसके लिए शांतिकुंज व देसंविवि से प्रशिक्षित युवाओं को रवाना किया जा रहा है। 

संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि पतित पावनी मां गंगा की प्रेरणा और सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री माँ गायत्री की शिक्षाएँ जीवन में उतरे तो ही जीवन सार्थक बनता है। उन्होंने कहा कि जिनके अंतःकरण में साधना उतरती है, वे दूसरों की पीड़ा को कम करने के भरसक प्रयास करते हैं। आदरणीया शैल दीदी ने इस सन्दर्भ में राजा नकुश, हनुमान, माधवाचार्य, स्वामी विवेकानंद, पूज्य आचार्यश्री आदि कई महापुरुषों के संस्मरण भी सुनाये। 

इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने हिन्दी, असमिया, बांग्ला, मराठी, मलयालम सहित ७ भाषाओं में २२ पुस्तकों का विमोचन किया। इससे पूर्व डॉ. पण्ड्याजी व शैलदीदी ने हजारों नर- नारी के प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में वैदिक पद्धति से पर्व पूजन सम्पन्न किया। 

सामूहिक तर्पण एवं संस्कार :गायत्री तीर्थ पहुँचे हजारों लोगों ने अपने आराध्यदेव युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्यजी की २५वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सामूहिक तर्पण कर उनके बताये सूत्रों को जीवन में धारण करने का संकल्प लिया। गायत्री जयंती के पावन अवसर पर हजार से अधिक लोगों ने गुरुदीक्षा ग्रहण की तो वहीं पुंसवन, नामकरण, मुण्डन, विद्यांरभ आदि संस्कार भी बड़ी संख्या में निःशुल्क सम्पन्न कराये। 

उद्घाटन : शांतिकुंज के नवनिर्मित कॉफ्रेन्स हॉल का गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्याजी व संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने उद्घाटन किया। 



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