Published on 2015-06-10


आने वाले २१ जून को सम्पूर्ण विश्व में विश्वयोग दिवस मनने जा रहा है। प्रधान मन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की पहल पर इस विश्व स्तरीय स्वास्थ्य संरक्षण एवं समग्र स्वास्थ्य के प्रति जन- मनों में जागरूकता लाने वाला अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनेगा। योग जहां व्यक्ति को व्यक्ति से जोड़ने का एक माध्यम है, वहीं शरीर को सुदृढ़ और तनावमुक्त बनाने की विधि भी योग में है। युग के अनुसार ऋषियों ने योग के आसनों का पैकेज बनाकर समाज को दिया। समयानुसार इसमें परिवर्तन की आवश्यकता पड़ती गयी। गायत्री परिवार के जनक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने सभी आयु- वर्ग के लोगों की शारीरिक- मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रज्ञायोग व्यायामों का यह युगानुकूल पैकेज तैयार किया है। इसमें ऐसे योगासनों का समावेश किया गया है जिनको सब लोग आसानी से कर सकते हैं और सभी प्रकार के स्वास्थ्य का लाभ ले सकते हैं। सब आदमी सब प्रकार के योगासन नहीं कर सकते। वृद्ध, रुग्ण व कमजोर लोग, ज्यादा उम्र वाली महिलाएँ कठिन योग- व्यायामों का अभ्यास नहीं कर सकते। भारी शरीर वाले लोग भी जटिल योगासन नहीं कर सकते। किन्तु प्रज्ञायोग के व्यायामों का अभ्यास हर कोई कर सकता है। इसमें सहज सरल रूप से किये जा सकने वाले १६ आसन हैं जो आधे घण्टे के अन्दर किए जा सकते हैं। इन आसनों के नियमित अभ्यास करने वाले प्रज्ञायोगी सभी रोगों तथा मानसिक तनावों से वञ्चित रहते हैं। 

विश्वयोग दिवस पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने बताया कि प्रज्ञायोग में किये जाने वाले आसनों के कई प्रकार हैं। यह सुबह बिस्तर त्यागने के साथ ही सक्रियता हेतु की जाने वाली रबिंग (अंग मर्दन) तथा सरल प्रभावी गतियोग से शुरू होता है और २० क्रियाओं वाले विभिन्न सोपानों के गतियोग से होते हुए १६ आसन समुच्चय वाले प्रज्ञायोग तक पहुँचता है। इसमें ताड़ासन, पादहस्तासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, योगमुद्रा, अर्द्धताड़ासन, शशांकासन, भुजंगासन आदि कई प्रभावी आसन हैं जो  सहज करणीय भी हैं और अद्भुत लाभदायक भी।  डॉ.प्रणव पण्ड्याजी के अनुसार नित्य प्रातः आधे घण्टे का समय निकालकर जो भी इन आसनों का अभ्यास करेगा, वह निश्चय ही सभी रोगों एवं तनावों से मुक्त रहेगा। अगर इनके साथ कुछ प्राणायामों का भी अभ्यास कर लिया तो वह अवश्य ही उत्तम स्वास्थ्य तथा मानसिक विकास को प्राप्त करेगा। 

उन्होंने इस पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रज्ञायोग का प्रत्येक सोपान तीन क्रियाओं की समष्टि- गायत्री मन्त्र- पाद, श्वास क्रिया तथा निर्धारित आसन का संयुक्त अभ्यास से पूरा होता है। इस तरह एक- एक कर जब पूरे १६ सोपान पूरे कर लिए जाते हैं तो प्रज्ञायोग का एक चक्र होता है। सूर्य नमस्कार में द्वादश आसनों का चक्र है तथा प्रज्ञायोग से थोड़ा कठिन भी पड़ता है, जबकि १६ आसनों के चक्र वाले प्रज्ञायोग सहज रूप से कर लिए जाते हैं। प्रज्ञायोग के पूरक गतियोग की क्रियायों में शरीर के विभिन्न अंगों की सन्धियों, जोड़ों, मर्मस्थानों तथा सभी उपांगों का व्यायाम हो जाता है। 

प्रज्ञायोग स्वास्थ्य के साथ सभी धर्मों व वर्गों के लोगों के लिए लाभकारी है। चूंकि इसमें किसी भी प्रकार की प्रार्थना या इबादत का उल्लेख न होते हुए स्वास्थ्य के लिए उपकारी आसन और प्राणायाम हैं, इसलिए इसे सभी लोग निर्विवाद कर सकते हैं। डॉ.प्रणव पण्ड्याजी के अनुसार उनके गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने बताया है कि  जो गतियोग के साथ प्रज्ञायोग का विधिपूर्वक नियमित अभ्यास करेगा, वह अवश्य ही शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास को प्राप्त करेगा। 




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