The News (All World Gayatri Pariwar)
Home Editor's Desk World News Regional News Shantikunj E-Paper Upcoming Activities Articles Contact US

जन्मभूमि में प्रखर हो रहा है गुरुदेव की प्रेरणा और प्राण चेतना का प्रवाह

[आगरा (उत्तर प्रदेश)],

  • अनेक विशेषताओं के साथ देश के मानचित्र पर आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है युगतीर्थ आँवलखेड़ा
अपने देश में तीर्थों का विशेष महत्त्व है। यह प्रायः उन संतों, ऋषियों की तपोभूमि हुआ करते हैं जो समाज के विकास में आ रहे अवरोधों को दूर करने और उसके स्वस्थ विकास का मार्ग सुझाने के लिए अपना जीवन खपाते रहे हैं। आज तीर्थों का वह स्वरूप प्रायः लुप्त होता और तीर्थाटन का उद्देश्य भटकता दिखाई दे रहा है।
इस युग में अध्यात्म के शिखर पुरुष परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी की जन्मस्थली, आगरा (उत्तर प्रदेश) जिले के एक छोटे-से गाँव आँवलखेड़ा को शांतिकुंज द्वारा तीर्थों की स्वस्थ परंपरा के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसे आध्यात्मिक दृष्टि से एक अमूल्य वैश्विक धरोहर के रूप में उभारा जा रहा है। भगवान राम और कृष्ण की तरह छोटे-छोटे लोगों में नवचेतना का संचार कर युग के परिवर्तन जैसे विराट अभियान को जन्म देने वाले युग प्रवर्तक की यह जन्मभूमि आगे भी लोगों को वही प्रेरणा और प्राण ऊर्जा देती रहे ेऐसे प्रयास किये जा रहे हैं। 

शांतिकुंज द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि जिनमें सामाजिक परिवर्तन की चाह है, आत्म परिष्कार की उमंग है, अध्यात्म के वैज्ञानिक स्वरूप को जानने की जिज्ञासा है, वे जन्मभूमि के दर्शन करने आयें, परम पूज्य गुरुदेव के जीवन दर्शन को समझें और प्रेरणा पाकर अपने समाज को सही दिशा प्रदान करें। इस संदर्भ में वहाँ पिछले कई वर्षों से निर्माण कार्य चल रहा है। 


निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुँचे आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी 
१२ अगस्त को आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी अभियंता सर्वश्री शरद पारधी, गौरीशंकर सैनी, सूरज प्रसाद शुक्ला के साथ आँवलखेड़ा में चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुँचे। अगले दिनों सारे विश्व को आकर्षित करने वाले इस युगतीर्थ की भावी संभावनाओं को देखते हुए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर आँवलखेड़ा के व्यवस्थापक श्री घनश्याम देवांगन भी साथ थे। 

आदरणीय डॉ. साहब ने बताया कि जन्मभूमि का विकास जन-जन में आत्म परिष्कार और समाज के नवनिर्माण में सक्रिय योगदान देने का उत्साह जगाने की दृष्टि से किया जा रहा है। लोग यहाँ आकर एक सच्चे ब्राह्मण की सादगी और उसकी क्षमताओं को समझ सकेंगे। सूर्य मंदिर, ब्रह्मकमल, स्वस्तिक भवन जैसी कई विशेषताओं से विनिर्मित दिव्यता लोगों को ध्यान साधना के लिए उत्साहित करेगी। 

गायत्री शक्तिपीठ परिसर ग्राम्य विकास का आदर्श प्रस्तुत करता दिखाई देगा। यहाँ साधना सत्र, कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण, स्वावलम्बन प्रशिक्षण जैसी अनेक योजनाएँ कार्यान्वित होंगी। यहाँ पूरे गाँव को ही एक आदर्श स्वावलम्बी, शिक्षित, स्वस्थ, हरे-भरे गाँव के रूप में विकसित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। 
लोग परंपरा से हटकर एक लोकमंगल के लिए जाग्रत तीर्थ के दर्शन करने के लिए आँवलखेड़ा पहुँचेंगे। आज भी यह आसपास के २४ गाँवों में जनजागरण अभियान चला रहा है। बढ़ती लोकप्रियता के साथ यह क्षेत्र क्रमशः बढ़ता जायेगा। 


भागीदारी का उत्साह,  संपर्क सूत्र
इस ऐतिहासिक निर्माण कार्य में भागीदारी का लोगों में विशेष उत्साह है। एक-एक काम को लोग अपनी ओर से पूरा कराकर अपनी आस्था को चिर स्मरणीय रखने का प्रयास कर रहे हैं। जन्मभूमि पर चल रहे चांद्रायण साधना सत्र में भागीदारी का उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। साधना के इच्छुक परिजनों को पूर्व में ही पंजीयन करा लेना चाहिए। साधना सत्र के पंजीयन, निर्माण कार्य में सहयोग या गौशाला में जो अनुदान देना चाहते हैं, वे निम्र पते पर संपर्क करें।

व्यवस्थापक, गायत्री शक्तिपीठ, 
ग्राम आँवलखेड़ा, जिला आगरा (उत्तर प्रदेश), पिन-२८३२०१,  मोबाइल- ०८३९२९२२२८५
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का बैंक खाता -
वेदमाता गायत्री ट्रस्ट आँवलखेड़ा, जिला आगरा
SBI A/c-३३९५१४४२६७०  IFSC-SBIN०००५९५८


नवनिर्माण की दिशाएँ और जन्मभूमि के भावी आकर्षण
आँवलखेड़ा में जन्मभूमि परिसर और गायत्री शक्तिपीठ अपनी अनूठी पहचान रखते हैं। शक्तिपीठ का शिखर और जन्मभूमि का ब्रह्मकमल दूर से ही दिखाई दे जाते हैं। दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस हाईवे से मात्र १० मिनट में इस गाँव तक पहुँचा जा सकता है, जिससे इस तीर्थ की लोकप्रियता काफी बढ़ने की संभावना है। अब गाँववासियों और क्षेत्र के लोगों को भी यह अनुभव हो गया है कि आने वाले दिनों में उनके गाँव में देश-विदेश के पर्यटक और साधक भारी मात्रा में आने वाले हैं। 


शक्तिपीठ परिसर में 
गायत्री शक्तिपीठ परिसर में पानी के भराव की समस्या न रहे इसके लिए उसकी सतह सड़क से तीन फीट उठा दी गयी है। मंदिर के चबूतरे को साढ़े छः फीट ऊँचा कर दिये जाने से गायत्री माता के दर्शन दूर से ही होने लगे हैं। सड़क की ओर अत्यंत सुंदर एवं भव्य प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है। शक्तिपीठ परिसर की सभी सड़कों को कॉक्रीट और सीमेंट (आरसीसी) के बना दिये गये हैं। प्रवेश द्वार के बाँयीं ओर के वशिष्ठ भवन, जिसमें अभी तक कन्या इंटर कॉलेज चला करता था, खाली हो गया है। वहाँ के कमरों को व्यवस्थित कर उच्च स्तरीय साधना करने वाले साधकों के आवास के रूप में विनिर्मित किया गया है। 

प्रवेश द्वार के दायीं ओर विश्वामित्र भवन में परिव्राजक निवास और प्रशासनिक भवनों का निर्माण हो रहा है। 
आवासीय परिसर ः प्रवेश द्वार के दाहिनी ओर बना विश्वामित्र भवन आवासीय परिसर होगा। 
विशाल सत्संग परिसर ः
  •  वशिष्ठ और विश्वामित्र भवनों के विशाल खाली प्रांगण पर शेड होगा, जिसे शांतिकुंज की भाँति विशाल सत्संग भवन के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इसकी क्षमता ४०० से ५०० लोगों के बैठने की होगी। 
प्रखर प्रज्ञा-सजल श्रद्धा 
  •  गायत्री मंदिर के सामने शांतिकुंज की तरह के विशाल गुरु स्मारक ‘प्रखर प्रज्ञा-सजल श्रद्धा’ की स्थापना होने जा रही है। 
यज्ञशाला-गौशाला ः
  •  शक्तिपीठ में मंदिर के पीछे नौ कुण्डीय यज्ञशाला बनायी गयी है। यहीं विशाल गौशाला है, जहाँ विशुद्ध देशी साहिवाल एवं गीर नस्ल की गायें हैं। यहाँ से देशी गायों के विस्तार का एक अभियान भी चलाया जा रहा है। गोसंवर्धन, गोवंश आधारित कृषि और गोमय चिकित्सा विज्ञान का विस्तार यहाँ से किया जा रहा है। खेत के बीच में सुंदर गोल चबूतरे हैं, जिन पर बैठकर साधना करने का आनंद ही अलग है। 
श्रीराम स्मृति उपवन ः 
  • देव संस्कृति विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीराम स्मृति उपवन की भाँति एक स्मृति उपवन आँवलखेड़ा में गायत्री मंदिर के पीछे बनाया जा रहा है। यह पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य क्रांति का महत्त्वपूर्ण आयाम सिद्ध होगा। गायत्री मंदिर के पीछे ही भोजनालय है। 
साधना अभियान ः
  •  आँवलखेड़ा में गोद्रव्यों का सेवन करते हुए चांद्रायण साधना बहुत लोकप्रिय हो रही है। औसतन ५० साधक इस साधना में भाग लेते हैं। अब तक केवल वर्ष में एक माह-श्रावण मास में यह साधना सत्र चलाया जाता था, लेकिन साधकों की बढ़ती अभिरुचि को देखते हुए चैत्र और आश्विन माह में भी चांद्रायण साधना सत्र आरंभ कर दिये गये हैं। जन्मभूमि की लोकप्रियता बढ़ने के साथ इस साधना अभियान को खूब प्रोत्साहन मिलेगा, ऐसा अनुमान है। 
  • शक्तिपीठ परिसर में वाहनों के प्रवेश को इस तरह बनाया गया है कि जिससे पार्किंग में कोई असुविधा न हो। इसी क्षेत्र में हाल ही में एक कैण्टीन भी बनायी गयी है, जिसका उद्घाटन वर्तमान प्रवास में आदरणीय डॉ. साहब ने किया।


जन्मभूमि परिसर में 
सूर्य मंदिर ः 
  • परम पूज्य गुरुदेव की जन्मभूमि पर एक विलक्षण सूर्य मंदिर बनाया जा रहा है, जो सारी दुनिया में अपनी तरह का पहला मंदिर होगा। मंदिर के शिखर पर विशेष लेंस लगाया जा रहा है, जिसके माध्यम से सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक सूर्य मंदिर परिसर में भगवान भास्कर की किरणें आती रहेंगी। सात घोड़ों वाले भगवान भास्कर की प्रतिमा साधक मन में निश्चित रूप से प्राण चेतना का संचार करती दिखाई देगी। उनके पार्श्व में उदीयमान सूर्य का हृदयस्पर्शी दृश्य उकेरा जा रहा है। सूर्य मंदिर में परम पूज्य गुरुदेव की आवाज में गायत्री मंत्र निरंतर चलता रहेगा। 
स्वस्तिक भवन ः
  •  सूर्य मंदिर के नीचे वाले तल में स्वस्तिक भवन बनाया जा रहा है। इसमें परम पूज्य गुरुदेव के व्यक्तित्व एवं कर्त्तृत्व को प्रदर्शित करने वाली विशाल प्रदर्शनी होगी। गुरुदेव के समस्त साहित्य को भी यहाँ प्रदर्शित किया जायेगा। 
ध्यान कक्ष ः 
  • प्रवेश द्वार के दाहिनी ओर एक शानदार ध्यान कक्ष बनाया जा रहा है। इसी स्थान पर परम पूज्य गुरुदेव का जन्म हुआ था। यहीं एक छोटे-सा ब्रह्मकमल होगा। ब्रह्मकमल के मध्य से उभरता पानी का फव्वारा मन को शीतलता प्रदान करेगा। इसी ब्रह्मकमल को आधार बनाकर साधक सहजता से ध्यान कर सकेंगे। इसके अलावा शिखर पर एक विशाल ब्रह्मकमल बनाया गया है जो दूर से ही दिखाई दिखाई देता है। इसी क्षेत्र में अमृत मंथन से निकले १४ रत्नों की तरह पूज्य गुरुदेव के जीवन की विशेषताओं को दर्शाने वाले १४ पत्थर, जो पहले भी लगे थे, अब नयी तरह से लगाये जा रहे हैं। 
  • प्रवेश द्वार के ठीक दाहिनी ओर परम पूज्य गुरुदेव की स्मृति में युगसंधि महापुरश्चरण की प्रथम पूर्णाहुति के समय सन् १९९५ में स्थापित कीर्ति स्तंभ है। 
जन्मभूमि परिसर ः
  •  जन्मभूमि का दूसरा परिसर है पूज्य गुरुदेव की साधना स्थली। इस क्षेत्र को ऐतिहासिक विरासत के रूप में ज्यों की त्यों सँजोने के शानदार प्रयास किये गये हैं। 
स्वतंत्रता सेनानी गुरुदेव ः
  • तीसरा परिसर वह है जहाँ स्वतंत्रता सेनानी के रूप में परम पूज्य गुरुदेव की गोपनीय गोष्ठियाँ हुआ करती थीं। गुरुदेव की साधना स्थली से लगा हुआ यह परिसर अभी तक किन्हीं और भाई का था, जिसे उन्होंने अब शक्तिपीठ को दे दिया है। इसके पुराने स्वरूप को ज्यों के त्यों बनाये रखते हुए यहाँ परम पूज्य गुरुदेव के स्वतंत्रता सेनानी वाले जीवन की स्मृतियों को ताजा किया जायेगा। इसके लिए प्रदर्शनी और मूर्तियाँ लगायी जायेंगी।






Click for hindi Typing


Related Stories
Recent News
Most Viewed
Total Viewed 1091

Comments

Post your comment


Warning: Unknown: write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0