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‘युवा क्रान्ति वर्ष’ का प्रखर अभियान वर्ष २०१७ में भी चालू रहेगा

गतवर्ष की उपलब्धियाँ रहीं शानदार, इस वर्ष के प्रयास रहें और भी जानदार

मनुष्य मात्र के लिए उज्ज्वल भविष्य का आधार बनाने वाली ईश्वरीय योजना, युग निर्माण योजना को क्रान्तिकारी गति प्रदान करने के लिए वर्ष २०१६ को युवा क्रान्ति वर्ष् के रूप में मनाया गया। नैष्ठिक प्राणवान लोकसेवियों की कर्मठता रंग लायी और नवसृजन अभियान से युवाओं को जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ मिलीं। इसके लिए सभी संगठित युवाओं और उनके साथ जुड़े प्रौढ़ मित्र हार्दिक साधुवाद के पात्र हैं।

हमारा देश बहुत बड़ा है। उसमें सभी क्षेत्रों तथा सभी वर्गों के युवाओं तक प्रेरणा की लहर पहुँचाना एक चुनौती भरा कार्य था। इसे पूरी तत्परता और कुशलता पूर्वक, योजनाबद्ध ढंग से पूरा करने की व्यवस्था बनायी गयी। पूरे देश के सभी प्रान्तों से लगभग ४०० जिलों को लक्ष्य बनाकर कार्ययोजना बनायी गयी। पच्चीस- पच्चीस जिलों के १५ वर्ग बनाये गये। प्रत्येक जिले से १२ से १५ प्रतिनिधियों को भविष्य निर्माता शिविरोंमें आमंत्रित किया गया। उन प्रतिनिधियों में तेजस्वी युवा और अनुभवी प्रौढ़ मित्र दोनों स्तरों के परिजन शामिल किए गये। सत्र बहुत उत्साह भरे वातावरण में चले तथा बहुत उत्साहवर्धक परिणाम उभरे। सभी सत्रों में लिये गये संकल्पों के कुछ नमूने प्रस्तुत हैं।


१४००००      नये युवाओं को जोड़ा जायगा
१००००     नये युवा मण्डल गठित होंगे
१४००       प्रवासी युवा समयदानी तैयार होंगे
२१००       युग प्रवक्ता तैयार करेंगे
४५००      एक दिवसीय युवा उत्कर्ष शिविर
६७००      डिवाइन वर्कशॉप शिक्षा संस्थानों में


रचनात्मक गतिविधियों को, विभिन्न आन्दोलनों को बढ़ाने के भी पर्याप्त संकल्प हुए हैं। उनके  आँकड़े इसलिए नहीं दिये जा रहे हैं कि सक्रिय युवाओं की संख्या बढ़ेगी तो ये कार्यक्रम स्वतः ही बढ़ेंगे। प्रसन्नता की बात है कि परिजनों ने अपने क्षेत्र में पहुँचते ही अपनी सक्रियता का प्रमाण देना शुरूकर दिया। अभी तक ४०० युवा चेतना शिविर सम्पन्न होने की सूचना मिल भी गयी है। यही क्रम रहा तो विश्वास किया जा सकता है कि वर्ष २०१७ में निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक प्रगति की जा सकेगी।


सावधान :: उपलब्धियों पर प्रसन्न होना स्वाभाविक है, किन्तु ध्यान रहे कि जो कुछ हो सका है, उसकी अपेक्षा शेष कार्य बहुत अधिक है। भारत की आबादी १२० करोड़ मानकर चलें तो ६० % अर्थात् ७२ करोड़ युवा देश में हैं। उन्हें सृजनशील कार्यों में लगने की हवा बनाने के लिए यदि १ % युवाओं को भी प्रभावित किया जाय तो ७२ लाख की संख्या तक तो पहुँचना ही पड़ेगा। इसलिए अपने उत्साह और अपनी रणनीति को इसके लिए तैयार करना ही पड़ेगा। कोई गाड़ी पहले धीरे ही चलती है, लेकिन गतिशील होने के बाद उसकी रफ्तार तेजी से बढ़ती है। बड़े आन्दोलनों में भी ऐसा ही होता है। एक बार चल पड़े तो जल्दी ही तीव्रगति पकड़ लेते हैं। सन् २०१६ में युवा क्रान्ति का क्रम चल पड़ा है। आशा की जा सकती है कि वर्ष २०१७ में उसकी गति ५ से १० गुनी अधिक की जा सकती है।


नये वर्ष की रूपरेखा
नये वर्ष में मुख्य उद्देश्य और कार्यक्रम तो पहले वाले ही हैं। अब उन्हें अधिक व्यापक और प्रामाणिक रूप दिया जाना है। उनके सम्बन्ध में विवरण जानने के लिए युवा प्रकोष्ठ की वेबसाइट को देखा जा सकता है। पूरे वर्ष में किये जाने वाले सामूहिक राष्ट्रीय कार्यक्रमों की सूची इसी अंक के पृष्ठ क्रमांक ३ पर बॉक्स में प्रकाशित है।

प्रशिक्षण क्रम :: इस वर्ष लगभग २५ जिलों के १५ समूहों के केन्द्र में प्रशिक्षण सत्र चलाये गये। प्रत्येक वर्ग में औसतन २५० प्रतिभागी शामिल हुए। नये वर्ष में उन सभी क्षेत्रों में प्रशिक्षण सत्र चलाये जायेंगे। उनमें औसतन २ से ३ हजार प्रतिभागी शामिल होंगे। इसके लिए कार्ययोजना संगठित क्षेत्रीय संगठनों तक पहुँचाई जा रही है।


युवा चेतना दिवस


गतवर्ष की भाँति इस वर्ष भी विशेष कार्यक्रमों का शुभारंभ १२ जनवरी- विवेकानन्द जयंती से किया जायगा। स्वामी विवेकानन्द को युवा पीढ़ी आदर्श युवा मानती है। उनके जन्म दिन पर युवाओं को उनके आदर्शों  पर चलने के लिए प्रेरित- संकल्पित कराने के प्रयास करना युक्तिसंगत है।

 

१२ जनवरी को छुट्टी का दिन नहीं है, इसलिए उस दिन केवल शाम को कार्यक्रम रखने का निर्णय लिया गया है। मुख्य कार्यक्रम “सृजनशील युवा सम्मेलनं ”  २ घंटे का होगा। इसे स्थानीय व्यवस्था के अनुसार किसी सार्वजनिक मैदान या हॉल में किया जा सकता है। इसके लगभग एक घण्टे पहले नगर के विभिन्न स्थलों से मशाल यात्राएँ निकाली जायेगीं, जो सम्मेलन स्थल पर पहुँच कर उसमें शामिल हो जायेंगी। इन दोनों कार्यक्रमों की रूपरेखा इसी पृष्ठ पर पैनल में दे दी गयी है।


रविवार दिनांक १५ जनवरी को 'राष्ट्र सेवा' के नाम से स्वच्छता, सेवा, श्रमदान का कार्यक्रम किया जाना है। इसके लिए निकटवर्ती चिकित्सालय, विद्यालय, वृद्धाश्रम अथवा अनाथालय जैसे स्थानों को चुना जा सकता है। जिन स्थानों को चुना जाय, वहाँ के व्यवस्थापकों से पहले ही परामर्श करके उन्हें विश्वास में ले लिया जाय। निर्धारित स्वयंसेवकों की टोली वहाँ पहुँच कर सेवाकार्य सम्पन्न करे।


पूर्व तैयारी एवं व्यवस्था


युवा चेतना दिवस मनाने के लिए पहले से पर्याप्त मात्रा में योजनाबद्ध पुरुषार्थ करना होगा। उसके बिन्दु इस प्रकार हैं।
• स्थानीय विचारशील एवं कर्मठ परिजन मिल बैठकर अपने यहाँ युवा चेतना दिवस मनाने की रूपरेखा तैयार कर लें। अपनी क्षमता के साथ स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखकर कार्ययोजना बनायी जानी चाहिए।
• आयोजन में भागीदारी के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं विद्यालयों के प्रभावशाली व्यक्तियों को इस बात के लिए सहमत करना चाहिए कि वे अपने यहाँ के युवाओं और वरिष्ठ प्रतिनिधियों को राष्ट्रहित के इस कार्यक्रम में प्रेरित करें।
• उन्हें यह तथ्य समझाया जाना चाहिए कि युवाओं को सृजनशील बनाने तथा उनकी क्षमता का सुनियोजन करने का व्यवस्थित अभियान चलाया जाना बहुत जरूरी है। युवाओं में पर्याप्त ऊर्जा होती है। ऊर्जा को यदि सृजन कार्यों में प्रयासपूर्वक न लगाया जाय तो वह स्वतः व्यसन या विनाश में लग जाती है।
• सृजनशीलता एक गुण है, जिसे समुचित प्रयास करके विकसित किया जा सकता है। इसके लिए युवाओं की रुचि को परिष्कृत करने के साथ उनके अभ्यास को भी गढ़ना पड़ता है। यह दोनों कार्य नियमित और दीर्घकालीन साधना से ही संभव होते हैं। इसलिए प्रेरक समारोहों द्वारा युवकों की रुचि का परिष्कार करके, विभिन्न रचनात्मक प्रवृत्तियाँ चलाकर उनके अभ्यास और चरित्र को सृजनशील संस्कार देने की रूपरेखा बनायी गयी है। उनकी रुचि देखकर उन्हें इस शृंखला में किए जाने वाले अन्य कार्यक्रमों के बारे में बताया जा सकता है।
• जो संगठन एवं व्यक्ति सहमत हो जायें उन्हें मशाल यात्रा, सृजनशील युवा सम्मेलन तथा राष्ट्र सेवा श्रमदान में शामिल होने के लिए प्रतिबद्ध कर लेना चाहिए। उन्हें समुचित श्रेय- सम्मान देते हुए अपना सहयोग देने के लिए आश्वस्त कर देना चाहिए।


मंच व्यवस्था: सृजनशील युवा सम्मेलन के लिए मंच की सज्जा सुरुचिपूर्ण ढंग से सादगी के साथ की जानी चाहिए। मंच पर केवल 'युग शक्ति' की प्रतीक लाल मशाल का चित्र या

कटआउट एवं स्वामी विवेकानन्द का चित्र स्थापित करना चाहिए। इससे विभिन्न संगठनों एवं सम्प्रदायों से जुड़े व्यक्तियों को भी अभियान से जुड़ने में संकोच नहीं होगा।
• मंच को युवा जागरण, राष्ट्र जागरण एवं जन जागरण के अनुरूप सद्वाक्यों से सजाया जा सकता है। दीपक, पुष्प माला आदि की समुचित व्यवस्था रहे।
• संगीत एवं साउण्ड सिस्टम की व्यवस्था स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कर लेनी चाहिए।


प्रवचन उद्बोधन :- प्रारम्भ में कार्यक्रम के उद्देश्य और स्वरूप को समझाने के लिए अपने मिशन के किसी कुशल वक्ता को तैयार कर लेना चाहिए। युवाओं के सृजनशील संगठन की आवश्यकता, युगशक्ति मशाल के स्वरूप की व्याख्या करके अपने पुरुषार्थ और ईश्वरीय अनुदानों के  सुसंयोग का लाभ उठाने की प्रेरणा दी जानी चाहिए। आदर्श युवा कैसे हों? इसकी व्याख्या स्वामी विवेकानन्द तथा अन्य महापुरुषों के उदाहरण से की जा सकती है।
• क्षेत्र के प्रभावशाली प्रगतिशील विचार के सामाजिक- साम्प्रदायिक संगठनों के विचारशील प्रतिनिधियों को उद्बोधन देने के लिए प्रेरित- आमंत्रित किया जाय। जो तैयार हो जायें, उन्हें विषयवस्तु के सूत्र विनम्रतापूर्वक समझा दिया जायें।
• अंत में भी मिशन के किसी योग्य वक्ता को सम्मेलन का सार- संक्षेप बताने तथा सृजन संकल्प दोहराने के लिए नियुक्त किया जाय। मंच संचालन करने वाले परिजन भी इस कार्य को कर सकते हैं।

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१२ जनवरी- युवा चेतना दिवस २०१७ के
कार्यक्रम की रूपरेखा


मशाल यात्रा :: यह सृजनशील युवा सम्मेलन शुरू होने के लगभग एक घंटे पहले निर्धारित स्थलों से प्रारम्भ की जायेगी और सम्मेलन शुरू होने के लगभग १५ मि. पहले वहाँ पहुँच जायेगी ताकि यात्रा में साथ आये प्रतिभागी शान्ति के साथ अनुशासन पूर्वक अपना स्थान ग्रहण कर सकें।
क्रम :  निर्धारित स्थल पर तैयार मशाल लेकर निर्धारित टोली के सदस्य समय पर पहुँचें।
• ५ मि. सामूहिक जयघोष (युवा और राष्ट्रपरक)
• मशाल प्रज्वलन (मंत्र- ॐ अग्ने नय सुपथा राये..)
प्रज्वलित मशाल की ओर हाथ ऊँचा करके युग • निर्माण सत्संकल्प के सूत्र क्रमांक १, ७, १५, १६ एवं १८ दुहरवाये जायें।
• मशाल के साथ नारे लगाते, बीच- बीच में जनता को युवा सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रण देते, सभा स्थल तक पहुँचें।
• मशाल को मंच पर पहुँचा दें और सभी लोग अनुशासनपूर्ण सभा में शामिल हो जायें।

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सृजनशील युवा सम्मेलन

यह मुख्य कार्यक्रम २ घण्टे की अवधि का होगा। जनता को आकर्षित-व्यवस्थित करने के लिए कुछ समय पहले से संगीत आदि की व्यवस्था बनायी जा सकती है।
• मशाल के बड़े चित्र या कटाउट के सामने दीप प्रज्वलन एवं पुषाञ्जलि
• आमंत्रित वक्ताओं को माल्यार्पण
• युवा प्रेरणा गीत
• कार्यक्रम का उद्देश्य ३० मि.
• आमंत्रित २ या ३ वक्ता ४० मि.
• सृजन संकल्प दुहरवाना १५ मि.
(सृजन संकल्प का प्रारूप पैनल में अलग से दिया गया है)
• समापन गीत १० मि.
(गीत : हमारा है यह दृढ़ संकल्प ....)
• समापन-शांतिपाठ ५ मि.
रविवार दिनांक १५ जनवरी को प्रातः ८ से १२ बजे तक ‘स्वच्छता, सेवा, श्रमदान’

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सृजन संकल्प का प्रारूप

# परमात्मा की नवसृजन योजना की सफलता के लिए ‘संघशक्ति- युगशक्ति’ की प्रतीक ‘लाल मशाल’ की साक्षी में मैं एक श्रेष्ठ युवा- नागरिक के कर्तव्यों का पालन करने के लिए हृदय की पूरी सदाशयता और बुद्धि की सजगता के साथ संकल्पित- तत्पर हूँ।
# मुझे विश्वास है कि जीवन की सफलता के लिए जीवन का एक श्रेष्ठ लक्ष्य तय करना ज़रूरी है। लक्ष्य के निर्धारण और उसकी प्राप्ति के लिए निरंतर ज्ञान प्राप्त करते रहने की साधना करनी है।
# इस राष्ट्र के एक जागरूक युवा के तौर पर मैं साहस के साथ कठोर श्रम करने को तैयार हूँ। अपनी सफलता के साथ ही दूसरों की सफलता का आनंद उठाने के लिए संकल्पित हूँ।
# मुझे स्वयं अपने साथ अपने घर- परिवार और पड़ोस के स्थूल- सूक्ष्म वातावरण को स्वस्थ और स्वच्छ बनाये रखना है।
# मुझे विश्वास है कि हृदय की निर्मलता, चरित्र की श्रेष्ठता में बदल जाती है। श्रेष्ठ चरित्र के द्वारा अपने परिवार, राष्ट्र और विश्व में शांति- सद्भाव का वातावरण बनता है। मुझे इस दिशा में सतत प्रयत्नशील रहना है।
# मुझे अपने चिंतन, चरित्र और व्यवहार को ऐसा बनाना है कि मैं भ्रष्टाचार से मुक्त जीवन जी सकूं और दूसरों के लिए एक मिसाल बन सकूँ।
# श्रेष्ठ संकल्पों के माध्यम से मुझे ज्ञान का दीपक जलाना और उसे सतत प्रज्वलित रखना है। ताकि राष्ट्र के नागरिक अंधकार में न भटकें और उज्ज्वल भविष्य के पथ पर आगे बढ़ते रहें।








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