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समाज की पीड़ा करें साझा : श्री गौरीशंकर शर्माजी

[Shantikunj], Jul 04, 2017
युवा जागरण व नारियों को आत्म निर्भर बनाने हेतु चलायेंगी जायेंगी मुहिम
शांतिकुंंज में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय युग प्रवक्ता शिविर का समापन

हरिद्वार ४ जुलाई।
उत्तराखण्ड, म.प्र, उ.प्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात सहित देश के १७ राज्यों के चयनित युग प्रवक्ताओं का विशेष प्रशिक्षण शिविर का आज समापन हो गया। इन्हें समाज की पीड़ा को साझा कर उसके यथासंभव निवारण करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिये गये। साथ ही युवाक्रांति वर्ष के उत्तरार्द्ध में देश भर के युवाओं को संगठित कर भारत के विकास में सहयोग करने के लिए प्रेरित करने हेतु विविध आयोजन सम्पन्न कराने के निर्देश दिये गये। प्रशिक्षण के दौरान यह बताया गया कि देश की नारियों को आत्म निर्भर बनाना है, तभी समाज का सम्पूर्ण विकास हो सकता है और यह भी बताया कि नारियों को रुढ़िवादिता से लड़ने के लिए संगठित किया जाय।

प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र को संबोधित करते हुए व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्माजी ने कहा कि समाज के विकास के लिए समर्पित संगठन का नाम गायत्री परिवार है। हमें समाज की पीड़ा को साझा करते हुए उसके निवारण के लिए उपाय करने होंगे। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने समाज की पीड़ा में सहभागिता करते हुए उनके निवारण का हर संभव प्रयास किये हैं। हम सभी को उनके बताये मार्ग पर चलते हुए समाज के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। श्री शर्मा ने कहा कि कार्यकर्त्ताओं का आचरण जनसामान्य को प्रेरणा देना वाला होना चाहिए।

भेंट परामर्श के क्रम में गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी एवं श्रद्धेया शैलदीदी जी ने प्रतिभागियों के विविध जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने वर्तमान समय को सोने की तरह तप कर निखरने का सुनहरा अवसर बताया। कहा कि आज सारी दुनिया गायत्री परिवार की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रही है। इससे पूर्व देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने संगठन की शक्ति, समाज की गायत्री परिवार से अपेक्षाएँ एवं लोकसेवियों की दिशाबोध पर विस्तार से जानकारी दी।

दक्षिण पूर्व जोन समन्वयक श्री गंगाधर चौधरी ने बताया कि प्रतिभागी बहिनों को नारियों के बीच कार्य करने की मूलभूत अवधारणाओं से अवगत कराया गया। युवाओं के बीच कार्य करने के विविध उपायों की सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिये गये। श्री चौधरी ने बताया कि इस शिविर में उ.प्र, म.प्र, झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, दिल्ली सहित १७ राज्यों के करीब पाँच सौै से अधिक चयनित प्रतिनिधि शामिल रहे। ये प्रतिनिधि प्रांतीय समन्वयक, जिला समन्वक एवं प्रज्ञा संस्थानों के प्रबंध ट्रस्टी हैं। समापन अवसर पर विभिन्न राज्यों से आये प्रतिभागियों ने अपने- अपने क्षेत्रों की समस्याओं को समुचित समाधान पाकर प्रसन्न दिखाई दिये। अंतिम सत्र के अवसर पर जोनल समन्वयक श्री कालीचरण शर्मा जी ने सभी का आभार प्रकट किया। श्री केसरी कपिल, डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. बृजमोहन गौड़, डॉ. गायत्री शर्मा, देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी, श्री केपी दुबे आदि ने विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।






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